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मुझे पाना है A child's story
ये hindi story for kids एक लडके के बारे में है जिसका रंग कला होने के वजह से उसको अपनी मंजिल पाने में कितनी मुस्किलो सामना करना पड़ा
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| (Photo credit: Ashutosh Jaiswal from Pexels) |
इसलिए जैसे तैसे कर स्पर्श ने हाई स्कूल तक की परीक्षा पास की और उसके न चाहते हुए भी उसे पढ़ाई छोड़नी पड़ी। कुछ दिन वह घर पर रहा फिर उसको एक फैक्ट्री में काम मिल गया। स्वभाव से अच्छा होने के कारण उसको सभी पसंद करने लगे लेकिन उसके दिल मे काले होने की कचट बरकरार थी। कुछ दिन तक ऐसे ही चला और लंच के लिए सभी एक जगह जुटते और बाते करते।
एक दिन अपने साथी से बातो बातो में स्पर्श ने अपने और स्कूल के बारे में बताया की उसके साथ क्या हुआ था? उसे आगे पढ़ाने का कितना मन करता है। यह सब सुनने के बाद उसके साथी को बुरा तो लग रहा था, लेकिन उसने एक स्कूल के बारे में बताया जहां किसी भी काले गोरे का भेद भाव नहीं किया जाता वहां पर सब समान है।
इस बात से स्पर्श को बड़ी खुशी हुई। उसने पूछा कि यह स्कूल कहां है? लेकिन उस साथी को पता मालूम नहीं था बस उसने सुना था कि यह कॉलेज फरुखाबाद में है। बस यही जानकारी मिल सकी। वो उस कालेज का पता लगाना चाहता था।
इसलिए वह पता लगाना शुरु किया लोगों से पता चला कि यह कालेज जो कि फरुखाबाद सिटी में था। वह उदास हो गया क्योंकि उसके पास ना तो कोई रहने का स्थान था ना ही कोई ज्यादा पैसे थे। वह एक बहुत गरीब परिवार से था इसलिए वह जानता था कि ज्यादा मदद तो इसके घर से नही मिलने वाला था। वह उदास रहने लगा।
उसके भाई ने उससे पूछा क्या हुआ क्या बात है क्यों उदास हो, तो उसने अपने भाई से सारी बात बताई। भाई ने उसे साफ मना कर दिया और बोला कि तुम कहा चक्कर मे पड़ रहे हो तुम जहाँ काम कर रहे हो आराम से काम करो कहां पढ़ाई के चक्कर मे पड़ रहे हो।
लेकिन कुछ दिन बाद में उसने जैसे तैसे सभी को मना लिया और वह जाने के लिए तैयार हो गया। उसे मालूम ही नहीं था कि वह स्कूल कहाँ है। वह नहीं जानता कि पहुंच पायेगा कि नहीं? परंतु वह तैयार हो गया और थोड़े से पैसे लेकर वह घर से निकल गया।
उसे इस बात का दुख था कि वह अपनी मां को छोड़ कर जा रहा है, वह दोबारा मिलेगा भी कि नहीं। लेकिन मां ने बिना अपने आंखों को झपकाए उसे जाने की इजाजत दे दी। उसने अपनी यात्रा आरंभ किया। अपने पैसे को बचाते हुए कुछ दूर तक का ही सफर किया था कि उसके सारे पैसे खत्म हो गए।
और इसने हार नहीं मानी वह कुछ दूर पैदल और कुछ दूर किसी की मदद ले कर जाने लगा। अभी वहां से कॉलेज 80 किलोमीटर की दूरी पर था उसके पैरो ने भी जवाब दे दिया। उसने रोड के किनारे दुकान के चबूतरा बना हुआ था थोड़ा इधर उधर देखा और वही बैठ गया।
वह थका तो था ही उसे नींद आने लगी तो बैग को सिर पर लगा कर सो गया। काफी रात होने पर उसे कुछ लोगों के पैरों की आहट से उसेकी नींद खुल गई। वह इतना थका हुआ था कि वो अपनी पलको को नही खोल पा रहा था। उसे पूरी रात खटखट ठक ठक जैसे आवाजे सुनाई देती रही।
अब सुबह हुआ वह का हर चीज नया था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि मुझे अब कहां जाना है और मैं क्या करूँ भूख भी लग रही थी।
उसे कुछ समझ नही आ रहा बहुत भूख लगी थी उसके पास कोई पैसे भी नहीं थे वो तो पहले ही खत्म हो चुके थे। वह सोचने लगा कि भाई सही बोल रहा था फिर कहा कि मैं सही हूँ मै पहुंच जाऊँगा इसी उधेड़बुन में उसके सामने कुछ लोग एक दुकान की साफ सफाई का काम कर रहे थे और कुछ लोग एक ट्रक से माल उठा के दुकान में लग रहे थे।
उसने सोचा क्यों ना मैं इस काम को करू जिसके बदले में मुझे कुछ पैसे मिल जाए जिससे कि कम से कम कुछ खा सकु।
फिर वो दुकान के पास जाकर बात करने में डर रहा था लेकिन वह डरता हुआ वो मालिक के पास जाकर अपनी बाते बताई मालिक दयालु था। उसने कहा मेरे यहाँ यही काम है अगर तुम कर सकते हो तो करो। अपने एक आदमी को बुला के बोला इसे काम समझा दो, अब से ये यही काम करेगा।
उसने अपना काम खत्म करने के बाद अपने मजदूरी मांगी और सीधा एक नाश्ते के दुकान पर गया जो उसके दुकान के पास ही खुमचा में अपनी दुकान लगाया था। खोमचे में इडली बेचता था इडली वाला एक उम्रदराज आदमी था उसकी पूरी उम्र निकल गई थी इडली बेचते बेचते।
उसे पूरे बाजार में सभी जानते थे और उम्र होने की वजह से उसकी इज्जत भी करते थे। बच्चे ने इडली लिया, बहुत प्यार से खाने लगा और उसे लगा कि ऐसा इडली कभी नहीं खाया वह उसे इतना स्वादिष्ट लग रहा था कि वह शब्दों में बयां नहीं कर सकता था।
क्योंकि उसे भूख बहुत तेज लगा और वो इडली भी बहुत अच्छी बनाता था।
अब शाम हुई तो सोने के लिए वही स्थान पर जा के सो गया जहां पर पहली बार सोया था क्योंकि इतने पैसों भी नहीं थे कि किराए पर होटल या कमरा ले सके। अब वही सिलसिला काफी महीनो तक चला। इसके पास अब पर्याप्त पैसे जुट चुका था।
अब स्कूल तक सफर कर के आगे जा सकता था इसलिए उसने अपने मालिक को धन्यवाद दिया और वहां से स्कूल के लिए चल पड़ा। दो से तीन घंटों में वह पहुंच गया जब उसने स्कूल के गेट को देखा तो उसकी सारी तकलीफ मिट गई।
अब वह अंदर गया अध्यापक से बात की और सारी बात बताई अध्यापक कुछ बोला तो नहीं परंतु उसे काम दिया उसे कहा जाओ कमरे में कुछ मेज कुर्सी और किताबें रखी रही है उसे साफ कर दो। लड़का सोचने लगता है उंहें मैं पसंद नहीं आया क्या, क्योंकि उसने कई दिनों से नहाया नहीं था और उसके कपड़े भी बहुत गंदे थे।
फिर भी उसने सोचा चलो कोई तो काम दिया। इस बहाने अगर पढ़ने का मौका नहीं मिला तो स्कूल में छोटे मोटे काम कर लूंगा। इसलिए स्पर्श बड़ी मन से कुर्सियों की साफ-सफाई कर दी सभी चीजों को ऐसे साफ किया की रोशनी पड़े तो मेहनत समझ में आ जाए।
तभी वह अध्यापक वहां आ गया साफ सफाई देखकर बहुत खुश हुआ। पूछा यहां क्या करोगे। उसने बड़ी मुसीबत भरी आवाज से बोला यहां सिर्फ पढने आया हूं। अध्यापक ने कहा यहाँ की फीस तो कुछ ज्यादा है इतने पैसे कहाँ से ले के लाओगे?
स्पर्श अब क्या बोलेगा इसकी बोलती तो बंद हो चुकी थी। अपने सिर को झुका के खड़ा रहा बोला कुछ नही। अध्यापक ने कहा कि मै ऊपर बात करता हूं सायद कुछ हो सके। अध्यापक ने ऊपर बात करके उसी कॉलेज में रहने और पढने की व्यवस्था कर दी।
किसी काम में लगन हो तो कहते है कुदरत भी आप का साथ देती है
Writed by- रिशु कुमार
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