NCERT Book for Class 8 Geography (भूगोल) Chapter 2 in Hindi (भूमि, मृदा ,जल प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन संसाधन)

 CLASS- 8                                                                                                        Chapter - 2


भूमि, मृदा ,जल प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन संसाधन


  • विश्व की 90% जनसंख्या भूमि क्षेत्र के 30 प्रतिशत भाग पर ही रहती है शेष 70% भूमि पर या तो विरल जनसंख्या है या वह निर्जन है।

भूमि:

  • भू-पृष्ठ के कुल क्षेत्रफल का लगभग 30% भाग भूमि है।

भूमि उपयोग:-

  • भूमि का उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है
  • कृषि ,वानिकी ,खनन, सड़कों
  • जनसंख्या और प्रौद्योगिकी भी भूमि उपयोग के प्रतिरूप के महत्वपूर्ण निर्धारक हैं।

स्वामित्व के आधार पर निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है :-

  1. निजी भूमि 
  2. सामुदायिक भूमि 

निजी भूमि :-

  • यह भूमि व्यक्तियों के स्वामित्व में होती है।

सामुदायिक भूमि :-

  • इसका संबंध समुदाय के स्वामित्व से संबंधित होता है। 

        जैसे:- चारा ,फल , औषधियां ,बूटियों को एकीकृत करना इसे साझा संपत्ति संसाधन भी कहते हैं।

पर्यावरण के लिए प्रमुख खतरा:-

  • भूस्खलन, मृदा ,अपरदन, मरुस्थलीकरण

मृदा

  • पृथ्वी के पृष्ठ पर दानेदार कणों के पतली  आवरण को क्या कहते हैं।
  • मृदा का निर्माण चट्टानों से प्राप्त खनिजों और जो पदार्थ और भूमि पर पाए जाने वाले खनिजों से होता है।
  • अपाचे की प्रक्रिया के माध्यम से बनती हैं।
  • खनिज और जैव पदार्थ  का सही मिश्रण मृदा को  उपजाऊ बनाता है


भूस्खलन:-


  • भूस्खलन के सामान्य रूप से शैल ,मलवा ढाल से गिरने वाली मिट्टी के वृहद संचलन के रूप में बताया जाता है।
  • भूकंप बाढ़ ज्वालामुखी से घटित लंबे समय तक भारी वर्षा होने से भूस्खलन होता है। इसमें नदी की प्रवाह अवरुद्ध होने के कारण अचानक फूट पड़ने से निकली घाटियों के आवासों विध्वंस हो जाता है।

मृदा परिच्छेदिका:-

  • ह्यूमस और  वनस्पति के साथ ऊपरी मृदा
  • बालू, गाद, क्ले के साथ उपमृदा
  • अपक्ष्यीत चट्टानी पदार्थ
  • जनक चट्टानें

अपक्षय:-

  • तापमान परिवर्तन तुषार ,क्रिया पौधों प्राणियों और मनुष्य के क्रियाकलाप द्वारा अनावृत शैल का टूटना और क्षय होना।
  • केवल 1 सेंटीमीटर मुर्दा को बनाने में सैकड़ों वर्ष लग जाते हैं।

मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक:-

  • जनक शैल ,रंग ,गठन, रासायनिक गुणधर्म खनिज मात्रा पारगम्यता निर्धारित करती है।
  • उच्चवच तुंगता और ढाल मृदा के संचय को निर्धारित करते हैं।
  • वनस्पति जात और प्राणीजात सूक्ष्मजीव ह्यूमस निर्माण की दर को प्रभावित करते हैं।
  • समय मृदा परिच्छेदिका मोटाई को निश्चित करता है।
  • जलवायु तापमान वर्षा अपक्षय और हिम्मत निर्माण की दर को प्रभावित करते हैं।

मृदा संरक्षण के उपाय :-

मल्च बनाना:-

  • पौधे के बीच खाली भूमि को जैव पदार्थ जैसे प्रवाल से ढक दी जाती है जिसे मृदा में आद्रता रुकी रहती है

वेदिका फार्म:-

  • वेदिका फार्म डीपी डालो पर बनाया जाते हैं ताकि सपाट सत्ता फसल उगाने के लिए उपलब्ध हो जाए इनसे पृष्ठीय प्रवाह और मृदा अपरदन कम होता है।

समोच्च रखिए जोताई:-

  • यह  प्रिया पहाड़ी ढोल पर सो मच रेखाओं के समानांतर जुताई ढाल से नीचे बहते जल के लिए एक प्राकृतिक और और का निर्माण करती है।

समोच्च रेखीय रोधिकाए :- 

  • इसे बनाने के लिए पत्थरों घास ,मृदा का उपयोग किया जाता है रोधिका ओं के सामने जल एकत्र करने के लिए खाईया बनाई जाती हैं।

चट्टान बांध:-

  • जल के प्रवाह को कम करने के लिए बनाए जाते हैं यह नालियों की रक्षा करते हैं और मृदा क्षती को रोकते हैं।

बीच की फसल उगाना:-

  • वर्षा दोहनसे मिला को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग समय पर भिन्न-भिन्न फसल एकांतर कतारों में उगाई जाती हैं।

  • वर्ष 1975 में मानव उपयोग के लिए जल की खपत 3850  किलोमीटर वर्ष थी ।
  • जो वर्ष 2000 में बढ़कर 6000 घंटे लो मीटर वर्ष से भी अधिक हो गई है।

जल चक्र:-

  • वाष्पीकरण ,वर्षण ,वाह भूमि और पुणे महासागरों में चक्र द्वारा निरंतर गतिशील है जिसे जलचक्र कहते हैं
  • प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन
  • स्थलमंडल ,जलमंडल और वायुमंडल के बीच जुड़े एक संकरे क्षेत्र में पाए जाने वाले प्राकृतिक वनस्पति वन्य जीवन को जैवमंडल कहते हैं।

पारितंत्र:-

  • जीवित जातियां जीवित रहने के लिए एक दूसरे पर परस्पर निर्भर रहती है इस जीवन आधारित तंत्र को पारितंत्र करते हैं।

अपमार्जक:-

  • मृत जीव-जंतुओं को खाने वाले जंतु को अपमार्जक करते हैं।
  • सभी जी चाहे वह बड़े हो या छोटे हो पारितंत्र को संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

प्राकृतिक वनस्पति का वितरण:-

  • वनस्पति की वृद्धि मुख्यत: तापमान और आर्द्रता पर निर्भर है।

विश्व की वनस्पति को मुख्य 4 वर्गों में रखा जाता है:-

  1. वन 
  2. घास 
  3. स्थल और टुंड्रा

  • शीत ध्रुवीय प्रदेशों की टुंड्रा वनस्पति में मांस और लाइकेन हैं।

जैवमंडल निचय :-

  • यह वैश्विक नेटवर्क द्वारा जुड़े रक्षित क्षेत्रों की एक श्रृंखला है जिसे संरक्षण और विकास के बीच संबंध को प्रदर्शित करने के इरादे से बनाया गया।

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