NCERT Book for Class 8 Geography - Resource ( NCERT Book for Class 8 भूगोल - संसाधन ) Chapter 1
CLASS-8 LESSON-1
संसाधन
- प्रत्येक वस्तु जिसका उपयोग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जा सकता है।
- वस्तुओं का उपयोग उपयोगी (प्रोयोज्यता) कहलाता है।
मूल्यवान
- वस्तु की उपयोगिता वस्तु की मूल्य तय करती है।
पेटेंट:
- किसी भी विचार अथवा अविष्कार पर एक मात्र अधिकार से है।
प्रौद्योगिकी:-
- वस्तु बनाने में नवीनतम ज्ञान का अनुप्रयोग ही प्रौद्योगिकी कहलाता है।
संसाधन को परिवर्तित करने वाले दो महत्वपूर्ण कारक हैं:-
- समय
- प्रौद्योगिकी
- मानव स्वयं ही सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है
संसाधन के प्रकार:+
- प्राकृतिक संसाधन
- मानव निर्मित संसाधन
प्राकृतिक संसाधन:-
प्राकृतिक द्वारा प्राप्त संसाधन जो बिना संशोधन के उपयोग में लाया जाता है उसे प्राकृतिक संसाधन कहते हैं।
जैसे:-नदिया, झील का जल, मृदा , खनिज
प्राकृतिक संसाधन को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:-
- नवीकरणीय
- अनवीकरणीय
नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन:-
- ऐसे संसाधन जो शीघ्रता से नवी कृत या पुनः पूरित हो जाते हैं जिनमें कुछ और सीमित हैं और कुछ पर मानवीय क्रियाओं का प्रभाव नहीं पड़ता है।
जैसे - सौर,पवन ऊर्जा
कुछ नवीकरणीय संसाधन:-
जल, वन को लापरवाही से किया गया उपयोग उनके भंडार को प्रेरित कर सकता है इसलिए जल और सीमित नवीकरणीय संसाधन जान पड़ता है।
अनवीकरणीय:-
- जिनका भंडार सीमित है, भंडार एक बार समाप्त होने के बाद नवीकृत पुन: पूरित होने में हजारों वर्ष लग सकते हैं उन्हें अनवीकरणीय संसाधन कहते हैं।
जैसे:- कोयला ,पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस
मानव निर्मित संसाधन:-
- वे संसाधन जिनका मूल रूप बदल दिया जाता है उसे मानव निर्मित संसाधन करते हैं।
जैसे- लौह अयस्क
संसाधन का भंडार:-
- संसाधन की उपलब्ध मात्रा है।
मानव संसाधन:-
- मानव की संख्या और योग्यता (मानसिक तथा शारीरिक) से है।
- लोग मानव संसाधन के अंतर्गत आता है।
- अधिक संसाधनों के निर्माण में असमर्थ होने के लिए लोगों के कौशल सुधार करना मानव संसाधन विकास कहलाता है।
संसाधन संरक्षण:-
- संसाधनों का सतर्कता पूर्वक उपयोग और नवीकरण (पुन: संग्रहित होना) के लिए समय देना संसाधन संरक्षण कहलाता है।
- संसाधनों का उपयोग करने की आवश्यकता और भविष्य के लिए संरक्षण में संतुलन बनाए रखना ही सतत पोषणीय विकास कहलाता है।
सतत पोषणीय विकास के कुछ सिद्धांत:-
- जीवन के सभी रूपों का आदर और देखभाल करना चाहिए
- मानव जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाना
- पृथ्वी के जीवन शक्ति और विविधता का संरक्षण करना
- प्राकृतिक संसाधनों के हास्य को कम से कम करना
- पर्यावरण के प्रति व्यक्तिगत व्यवहार और अभ्यास में परिवर्तन
- समुदायों को अपने पर्यावरण के देखभाल करने योग्य बनाना
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