भौतिक विज्ञान ( Physics ) मापन ( Measurement ) Part-1
भौतिक विज्ञान
( Physics )
परिचय
- भौतिक विज्ञान :-
- विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत पदार्थ , ऊर्जा एवं उनकी पारस्परिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता हैं।
- इसके अन्तर्गत यांत्रिकी एवं द्रव के गुणों का अध्ययन किया जाता है ।
- इसके अन्तर्गत परमाणु एवं सूक्ष्मकणों का अध्ययन किया जाता है ।
खगोलिकी भौतिकी :-
- इसके अन्तर्गत ब्रह्मांड के विषय का अध्ययन किया जाता है ।
मापन ( Measurement )
भौतिक राशियाँ ( Physical Quantities )
अदिश राशियाँ ( Scalar Quantities )
सदिश राशियाँ ( Vector Quantities )
भौतिक राशियाँ ( Physical Quantities ) : -
- भौतिकी के नियमों को जिन्हें राशियों के पदों में व्यक्त किया जाता है , उन्हें भौतिक राशियां कहते हैं ।
जैसे - वस्तु का द्रव्यमान , लम्बाई , बल , चाल , घनत्व इत्यादि ।
अदिश राशियाँ ( Scalar Quantities ) : -
- जिन भौतिक राशियों के निरूपण के लिए केवल परिमाण की आवश्यकता होती है ,परन्तु दिशा की कोई आवश्यकता नहीं होती ।
जैसे - चाल , समय , द्रव्यमान , दूरी , ऊर्जा , आवेश , विभव , विद्युत धारा इत्यादि ।
सदिश राशियाँ ( Vector Quantities ) :-
- जिन भौतिक राशियों के निरूपण के लिए परिमाण के साथ - साथ दिशा की भी आवश्यकता होती है , उन्हें सदिश राशियां कहते हैं ।
जैसे - वेग , विस्थापन , बल आदि ।
मापन की इकाइयाँ ( Units of Measurement )
- भौतिक विज्ञान में लम्बाई , द्रव्यमान व समय के लिए तीन मूल इकाइया प्रयुक्त होती है ।
- अन्य इकाइया इन्हीं तीनों मौलिक इकाइयो से मिलकर बनी हैं ।
इस आधार पर इन्हें दो भागों में बांटा गया है-
( i ) मूल इकाई
( ii ) व्युत्पत्र इकाई ।
मापन की इकाइयाँ ( Units of Measurement )
मूल इकाई ( Fundamental Units ) व्युत्पन्न इकाई ( Derived Units )
मूल इकाई ( Fundamental Units ) :-
- जिस भौतिक राशि को व्यक्त करने के लिए ऐसे मानकों का प्रयोग किया जाता है जो अन्य मानकों से स्वतंत्र होते हैं ।
जैसे- लम्बाई , द्रव्यमान और समय मूल इकाई है , अन्य माप को इकाईया इन्हीं से निकाली गई हैं ।
व्युत्पन इकाई ( Derived Talts ) :-
- जिस भौतिक राशि को दो या दो से अधिक मूल इकाइयों में व्यक्त किया जाता है , वैसे मूल इकाइयों से निकाली गई माप की इकाइया व्युत्पन्न इकाई कहलाती है ।
जैसे - बल , दाब , कार्य एवं विभव के लिए क्रमशः न्यूटन , पास्कल , जूल एवं वोल्ट व्युत्पत्र मात्रक हैं ।
मापन की प्रमुख पद्धतियाँ ( System of Units )
M.K.S. ( मीटर , किलोग्राम , सेकेण्ड ) :
- इस पद्धति में लम्बाई के मात्रक मीटर , द्रव्यमान के मात्रक किलोग्राम एवं समय के मात्रक सेकेण्ड होते हैं ।
EPS ( फुट , पौण्ड , सेकेंड ) :
इसे ब्रिटिश पद्धति कहते हैं । इस पद्धति में लम्बाई के मात्रक फुट , द्रव्यमान के मात्रक पाउण्ड एवं समय के मात्रक सेकेण्ड होते हैं ।
CGS ( सेंटीमीटर , ग्राम , सेकेण्ड ) :
इस पद्धति को फ्रेंच या मीट्रिक पद्धति कहा जाता है । इस पद्धति में लम्बाई के मात्रक सेंटीमीटर , द्रव्यमान के मात्रक ग्राम एवं समय के मात्रक सेकेण्ड होते हैं ।
SI- अन्तर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति ( इन्टरनेशनल पद्धति ऑफ यूनिट ) :
- सन् 1960 ई . में SI पद्धति को अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति के रूप में स्वीकार किया गया ।
- वर्तमान में एस.आई. पद्धति को सारे संसार में श्रेष्ठ मानक के तौर पर उपयोग किया जाता है ।
- यह सात मूल मात्रकों पर आधारित मूल मात्रकों के प्रतीकों को ठीक इसी रूप से समस्त संसार में स्वीकार किया गया है ।
- ये मात्रक सभी भाषाओं में अपने मूल रूप में ही लिखे / पढ़ें जाते हैं ।
विमा ( Dimension ) : -
- संकेताक्षर M , L , T के प्रयोग द्वारा मात्रकों को संक्षिप्त रूप में व्यक्त करने को विमा कहते हैं ।
- जहाँ - M = मात्रा , L = लम्बाई व T = समय है ।
प्रकाश वर्ष ( Light Year ) :
- यह दूरी का मात्रक है , प्रकाश द्वारा निर्वात में एक वर्ष में तय की गई दूरी को 1 प्रकाश वर्ष कहते हैं जो लगभग 5,878,625,373,183.61 मील
- मील के बराबर है । 1 प्रकाश वर्ष = 9.46 x 10^ 15 मीटर
- यह दूरी मापने की सबसे बड़ी इकाई है
- 1 Parsec = 1 पारसेक = 3.26 प्रकाश वर्ष = 3.08 x 10^16 मीटर
यांत्रिकी ( Mechanics )
यांत्रिकी के अन्तर्गत पिण्डों पर बल का प्रभाव और इससे उत्पन्न गति का अध्ययन किया जाता है ।
इसकी तीन शाखाएं हैं
- स्थैतिकी ,
- गतिकी
- शुद्ध गतिकी
वस्तु की विरामावस्था व गत्यावस्था ( Object at Rest and in Motion ) :
- एक ही वस्तु किसी व्यक्ति को गति करती हुई व दूसरे व्यक्ति को विरामावस्था में प्रतीत हो सकती है ।
- उदाहरण के लिए , चलती हुई बस या ट्रेन में बैठे हुए यात्रियों को सड़क या पटरी के किनारे खड़े लोग , पेड़ , भवन पीछे की ओर गति करते हुए प्रतीत होते हैं , जबकि चलती हुई बस या ट्रेन के प्रत्येक यात्री को लगता है कि उसके साथी यात्री गति में नहीं हैं , क्योंकि उनके बीच की दूरी में परिवर्तन नहीं हो रहा है । इन प्रेक्षणों से प्रकट होता है कि गति सापेक्षिक होती है ।
दूरी तथा विस्थापन ( Distance and Displacement ) : -
- किसी वस्तु द्वारा प्रारम्भिक बिन्दु एवं अन्तिम बिन्दु के बीच की न्यूनतम दूरी को वस्तु का विस्थापन कहते हैं
- किसी वस्तु द्वारा अपनी प्रारम्भिक स्थिति से अन्तिम स्थिति तक पहुंचने में तय की गई दूरी को दूरी कहते हैं ।
- यही वस्तु पुनः अपने प्रारम्भिक स्थान पर पहुंच जाती है , तब उसका विस्थापन शुन्य होता है यह एक अदिश राशि है , तथा यह सदैव धनात्मक होती है ।
चाल ( Speed ) :
- किसी वस्तु के विस्थापन की दर को चाल कहते हैं ।
- चाल एक अदिश राशि है , इसका S1 मात्रक मीटर प्रति सेकेण्ड ( m / s ) होता है ।
चाल = दूरी / समय
वेग ( Velocity ) :
- किसी वस्तु द्वारा एक इकाई समय में किसी निश्चित दिशा में जितनी दूरी तय की जाती है , उसे वस्तु का वेग कहते हैं ।
- यह एक सदिश राशि है ।
- इसका S1 मात्रक मीटर प्रति सेकेण्ड ( m / s ) होता है । वेग धनात्मक , ऋणात्मक या शून्य कुछ भी हो सकता है ।
गति ( Motion ) :
- जब कोई वस्तु समय के साथ - साथ अपनी स्थिति में परिवर्तन करती है तो वह गति की अवस्था में होती है ।
एक समान गति :
- जब कोई वस्तु समय अन्तराल के बराबर दूरी तय करती है तो इसे एक समान गति कहा जाता है । जैसे - यदि कोई वस्तु 5 मिनट तक गतिमान रहती है तथा प्रत्येक मिनट के बाद उसकी चाल में कोई परिवर्तन नहीं होता तो उसकी गति एक समान गति कहलाएगी ।
असमान गति :
- जब कोई वस्तु समय अन्तराल के साथ - साथ बराबर दूरी तय न करें तो उसकी गति असमान गति कहलाती ।
स्थानांतरीय एवं घूर्णन गति :
- जब कोई वस्तु एक सीधी रेखा में गति करती है तो ऐसी गति को स्थानांतरीय गति कहते हैं ।
- स्थानांतरीय गति को रेखीय गति भी कहा जाता है ।
- जब कोई पिण्ड अपने अक्ष के परितः घूमता है तो ऐसी गति को घूर्णन गति कहते हैं ।
- सड़क पर दौड़ रही कार स्थानांतरीय गति एवं लटू का अपने अक्ष पर घूमना घूर्णन गति का उदाहरण है ।
त्वरण ( Acceleration ) :
- किसी गतिमान वस्तु के वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं ।
- यदि किसी वस्तु का प्रारम्भिक वेग u हो तथा t समय पश्चात उसका अन्तिम वेग v हो जाये तो वस्तु का त्वरण होगा ।
v = u+at
मंदन ( Deceleration ) :
- किसी गतिमान वस्तु के वेग में जो कमी आती है , उसे मंदन कहते हैं ।
- जैसे - प्लेटफार्म पर आती हुई गाड़ी जो धीरे होते - होते एक बिन्दु पर जाकर रूक जाती है । यह मंदन के कारण होता है ।
वृत्तीय गति ( Circular Motion ) :
- जब कोई कण किसी वृत्ताकार मार्ग में समरूप चाल से गति करता है तो उस कण की गति समरूप वृत्तीय गति कहलाती है ।
- किसी पथ पर गतिशील कण को केन्द्र से मिलाने वाली रेखा एक सेकेण्ड में जितना कोण घूमती है , उसे उस कण का कोणीय वेग कहते हैं ।
- यदि यह रेखा t सेकेण्ड में 0 रेडियन के कोण में घूमती है तो कोणीय वेग ,
0 / t = रेडियन / सेकेण्ड
न्यूटन के गति के नियम ( Newton's Law of Motion )
न्यूटन का प्रथम नियम :-
- ये जड़त्व के संबंधित बात करता है , इसलिए इसे जड़त्व का नियम भी कहते है
न्यूटन का दूसरा नियम :-
- ये बल और त्वरण से संबंधित है ।
न्यूटन का तीसरा नियम:-
- यह संवेग से संबंधित बात करता है ।
- वस्तुओं की गति को नियन्त्रित करने वाले नियमों को सर्वप्रथम आइजक न्यूटन ने वर्ष 1687 ई . में अपनी पुस्तक प्रिंसीप्रिया स्थापित किया था
- इन नियमों से बल की परिभाषा मिलती है तथा आरोपित बल व वस्तु की गति की अवस्था के मात्रात्मक सम्बन्ध प्राप्त होता है ।
न्यूटन का प्रथम नियम ( Newton's First Law ) : -
- प्रत्येक अपनी स्थिर अवस्था अथवा सरल रेखा में एक समान गति की अवस्था में बनी रहती है जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल न लगे अर्थात् सभी वस्तुएं अपनी गति की अवस्था में किसी परिवर्तन का विरोध करती हैं । वस्तुओं की अपनी गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करने की प्रकृति को जड़त्व कहते हैं ।
- गति - विषयक न्यूटन के प्रथम नियम को जड़त्व का नियम भी कहते हैं ।
जड़त्व के उदाहरण :-
- रुकी हुइ गाड़ी के अचानक चल पड़ने पर उसमें बैठे यात्री का पीछे की ओर झुक जाना ।
- गोली मारने से कांच में गोल छेद हो जाना , परन्तु पत्थर मारने पर कांच के टुकड़े हो जाना ।
जड़त्व( Inertia ) :-
- कोई भी वस्तु अपनी गति की अवस्था एवं विराम अवस्था में बनी रहती है जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल न लगे । वस्तु के इसी गुण को जड़त्व कहते हैं ।
- किसी वस्तु का द्रव्यमान उसके जड़त्व की माप होता है अर्थात वस्तुओं में जड़त्व का गुण उतना ही अधिक होता है . जितना उसका द्रव्यमान अधिक होगा
न्यूटन का दूसरा नियम ( Newton's Second Law ) :--
- " किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर लगाए गए बल के आनुपातिक है
- यह उसी दिशा में होता है जिसमें बल कार्य करता है ।
- " न्यूटन का गति का दूसरा नियम बल तथा त्वरण इन्हीं दोनों राशियों को एक - दूसरे के साथ मात्रात्मक विधि से सम्बन्धित करता है ।
- यदि बल ' F ' न्यूटन ( बल या SI मात्रक ) , द्रव्यमान ( M ) किलोग्राम तथा त्वरण ( a ) मीटर प्रति सेकेंड ( न्यूटन ) तो द्वितीय नियमानुसार F = ma
- समान वेग से आती हुई क्रिकेट गेंद एवं टेनिस गेंद में से टेनिस गेंद को कैच करना आसान होता है ।
- क्रिकेट खिलाड़ी तेजी से आती हुई गेंद को कैच करते समय अपने हाथों को गेंद के वेग की दिशा में गतिमान कर लेता है ताकि चोट कम लगे ।
- गाड़ियों में स्प्रिंग ( spring ) और शॉक एब्जार्बर लगाए जाते हैं ताकि झटका कम लगे
- कराटे खिलाड़ी द्वारा हाथ के प्रहार ईंटों की पट्टी तोड़ना ।
- अधिक गहराई तक कील को गाड़ने के लिए भारी हथौड़े का उपयोग किया जाता है ।
- किसी भी क्रिया के लिए ठीक उसके बराबर , परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है ।
- जैसे- यदि किसी बॉल को फर्श पर मारा जाता है तो बॉल ऊपर की तरफ उछलती है , जितना बल बॉल द्वारा फर्श पर लगाया जाता है , उतना ही बल विपरीत दिशा में फर्श भी बॉल पर लगाता है । बॉल का उछाल इसी बल का परिणम है ।
- बंदूक से गोली छोड़ते समय पीछे की ओर झटका लगना ।
- नाव के किनारे पर से जमीन पर कूदने पर नाव का पीछे हटना ।
- कुआँ से पानी खींचते समय रस्सी टूट जाने पर व्यक्ति का पीछे गिर जाना ।
- द्रव्यमान और वेग के कारण वस्तुओं में जो विशेष गुण उत्पन्न होता है , उसे संवेग कहते हैं अर्थात " किसी गतिमान वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग के गुणनफल को वस्तु का संवेग कहते हैं । " इसका मात्रक किग्रा . मी / से . या न्यूटन - सेकेंड होता है ।
- घर्षण बल के कारण ही मनुष्य सीधा खड़ा रह पाता है तथा चल पाता है ।
- घर्षण बल के अभाव में हम केले के छिलके तथा बरसात में चिकनी सड़क पर फिसल जाते हैं ।
- यदि सड़कों पर घर्षण न हो तो पहिए फिसलने लगते हैं ।
- जब कोई नियत बल F किसी वस्तु पर एक निश्चित समय अन्तराल t के लिए कार्य करता है तो बल और समय अन्तराल के गुणनफल को उस बल का आवेग कहते हैं ।
- आवेग सदिश राशि है । इसका SI मात्रक न्यूटन - सेकेंड ( या किग्रा . मी . / से . ) है ।
- जब दो या अधिक वस्तुएं एक - दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करती हैं और कोई भी बाह्य बल नहीं लग रहा हो तो उनका कुल संवेग स्थायी रहता है ।
- जब कोई वस्तु किसी तल पर फिसलती है तो उसकी गति की विपरीत दिशा में एक प्रतिरोधी बल कार्य करता है । इस बल को घर्षण बल कहते हैं ।
- जब किसी वस्तु को किसी सतह पर खिसकाने के लिए बल लगाया जाए और यदि वस्तु अपने स्थान से नहीं खिसके तो ऐसे दोनों सतहों के मध्य लगने वाले घर्षण बल को स्थैतिक घर्षण बल कहते हैं ।
- जब कोई वस्तु किसी सतह पर सरकती है तो सरकने वाली वस्तु तथा उस सतह के बीच लगने वाला घर्षण बल सर्पी घर्षण बल कहलाता है ।
- जब एक वस्तु किसी दूसरी वस्तु के सतह पर लुढ़कती है तो इन दोनों वस्तुओं के सतहों के बीच लगने वाला बल लौटनिक घर्षण बल कहलाता है ।
- दो सतहों के मध्य लगने वाला घर्षण बल उनके क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता , बल्कि सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है ।
- लोटनिक घर्षण बल का मान सबसे कम और स्थैतिक घर्षण बल का मान सबके अधिक होता है ।
- जो वस्तुओं की विरामावस्था या समरूप गत्यावस्था में परिवर्तन कर दे अथवा परिवर्तन लाने की क्षमता रखता हो , बल कहलाता है ।
- बल का SI मात्रक न्यूटन है ।
- जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर चलती है , तो उस पर एक बल वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करता है
- इस बल को अभिकेंद्रीय बल कहते हैं । इस बल के अभाव में वस्तु वृत्ताकार मार्ग पर नहीं चल सकती है ।
- यदि कोई m द्रव्यमान का पिंड v चाल से । त्रिज्या के वृत्तीय मार्ग पर चलता है , तो उस पर कार्यकारी वृत्त के केंद्र की ओर आवश्यक अभिकेंद्रीय बल
- अजड़त्वीय फ्रेम ( non - intertial frame ) में न्यूटन के नियमों को लागू करने के लिए कुछ ऐसे बलों की कल्पना करनी होती है
- जिन्हें परिवेश में किसी पिंड से संबंधित नहीं किया जा सकता ।
- ये बल छद्म बल या जड़त्वीय बल कहलाते हैं ।
- अपकेंद्रीय बल एक ऐसा ही जड़त्वीय बल है ।
- इसकी दिशा अभिकेंद्री बल के विपरीत दिशा में होती है ।
- कपड़ा सुखाने की मशीन , दूध से मक्खन निकालने की मशीन आदि अपकेंद्रीय बल के सिद्धांत पर कार्य करती है ।
- लोटनिक घर्षण बल
- स्थैतिक घर्षण बल
- सपी घर्षण बल
- वृत्तीय पथ पर गतिमान वस्तु पर कार्य करने वाले अभिकेंद्रीय बल की प्रतिक्रिया होती है । जैसे “ मौत के कुएं " में कुएं की दीवार पर मोटर साइकिल अंदर की ओर क्रिया बल लगाती है , बल जबकि इसका प्रतिक्रिया बल मोटर साइकिल द्वारा कुएं की दीवार पर बाहर की ओर कार्य करता है । कभी - कभी बाहर की ओर कार्य करने वाले इस प्रतिक्रिया बल को भ्रमवश अपकेंद्रीय कह दिया जाता है जो कि बिल्कुल गलत है
- भारहीनता वह स्थिति है जब किसी वस्तु का भार नगण्य प्रतीत होता है ।
- वस्तु का भार पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल पर निर्भर करता है ।
- जैसे - जैसे पृथ्वी से वस्तु की दूरी बढ़ती जाती है , उसके भार में भी कमी आती रहती है , वस्तु के भार में 150 मील की ऊंचाई पर जाने के बाद भारहीनता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है ।
- चुम्बकीय बल ( magnetic Force )
- स्थिर - विद्युत बल ( Electrostatic Force )
- विद्युत चुम्बकीय बल , गुरुत्वाकर्षण बल से 10 गुणा अधिक शक्तिशाली होता है ।
- दो चुम्बकीय ध्रुवों के मध्य लगने वाला बल चुम्बकीय बल कहलाता है ।
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