समास (हिंदी व्याकरण)
समास :- अनेक शब्दों का एक शब्द हो जाना, समास कहलाता हैं।
जैसे :- जिसके सिर पर चंद्रमा हो ~ चंद्रशेखर (शंकर)
जिसके हाथ में वीणा हो ~ वीणापाणि ( सरस्वती)
सामासिक विग्रह :- एक शब्द का अनेक शब्द हो जाना, सामासिक विग्रह कहलाता हैं।
जैसे :- लंबोदर ~ जिसका उदर (पेट) लंबा हो
सामान्यतः समास के 6 भेद होते हैं।
1. अव्ययीभाव समास
2. बहुव्रीहि समास
3. कर्मधारय समास
4. तत्पुरुष समास
5. द्विगु समास
6. द्वंद्व समास
7. नञ समास
1. अव्ययीभाव समास :- वैसा समास जिसका पहला/प्रथम/ अगला / पूर्व पद प्रधान होता है,उसे अव्ययीभाव समास कहते है।
जैसे:-
दिन - दिन = प्रतिदिन
जीवन भर = आजीवन
शक्ति के अनुसार = यथाशक्ति
गंगा के समीप = उपगंगा
विशेष:- इस समास का प्रथम पद उपसर्ग के जैसा व्यवहार करता है, प्रति,यथा, उप ,आ आदि का उपयोग उपसर्ग के रूप का होता है।
2. द्वंद्व समास :- जिस समास का दोनों पद प्रधान होता है, द्वंद्व समास कहलाता है।
जैसे :-
गौरी - शंकर ~ गौरी और शंकर
राधा - कृष्णा ~ राधा और कृष्णा
भाई - बहन ~ भाई और बहन
लोटा - डोरी ~ लोटा और डोरी
विशेष :- इस समास में 'और' का अर्थ छिपा हुआ रहता है।
3. नञ समास :- नहीं अर्थ बताने वाले समास को नञ समास कहते हैं।
जैसे :-
न उपस्थित ~ अनुपस्थित
न शांति ~ अशांति
न धर्म ~ अधर्म
न योग्य ~ अयोग्य
4. द्विगु समास :- जिस समास का पहला पद संख्यावाची होता है, उसे द्विगु समास कहते हैं।
जैसे :-
पंचवटी ~ पांच वटों का समूह
चौराहा ~ चार राहों का समूह
त्रिभुज ~ तीन भुजाओं का समूह
सप्तर्षि ~ सात ऋषियों का समूह
नवग्रह ~ नव ग्रहों का समूह
5. कर्मधारय समास :- जिस समास में विशेष्य - विशेषण का मेल होता हैं, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
जैसे :-
चंद्रमुख ~ चंद्रमा जैसा मुख
शोकसागर ~ शोक का सागर
घनश्याम ~ घन के जैसा श्याम
कमलनयन ~ कमल के जैसा नयन
* विशेषण :- जो शब्द किसी की विशेषता बताता हो, उसे विशेषण कहते हैं।
* विशेष्य :- जिस शब्द की विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहते हैं।
जैसे :- काली टोपी , लाल रुमाल, उजला हाथी, मोटा आदमी इत्यादि।
यहां काली, लाल, उजला, मोटा विशेषण है तथा टोपी, रुमाल, हाथी, आदमी विशेष्य हैं।
6. बहुव्रीहि समास :- जिस समास का कोई भी पद प्रधान नहीं होता है तथा जो किसी दूसरे के लिए आता है, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।
जैसे :-
जिसका उदर (पेट) लंबा हो ~ लंबोदर (गणेश)
जिसके सिर पर चंद्रमा हो ~ चंद्रशेखर (शंकर)
जिसका अंबर (वस्त्र) पीला हो ~ पीतांबर (विष्णु)
जिसे दश आनन (मुख) हो ~ दशानन (रावण)
7. तत्पुरुष समास :- जिस समास का अंतिम पद प्रधान होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
अथवा (या)
जिस समास के सामासिक विग्रह करने पर कारक का चिन्ह प्रयोग होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
जैसे :-
गगनचुंबी ~ गगन को चूमने वाला
कामचोर ~ काम से जी चुराने वाला
पापमुक्त ~ पाप से मुक्त
विद्यालय ~ विद्या का आलय
तत्पुरुष समास के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण :-
राजपूत्र ~ राजा का पुत्र
पुरुषोत्तम ~ पुरुषों में उत्तम
गंगाजल ~ गंगा का जल
चिड़ीमार ~ चिड़ियों को मारने वाला
माखनचोर ~ माखन को चुराने वाला
हथकड़ी ~ हाथ के लिए कड़ी
आत्मनिर्भर ~ आत्म पर निर्भर
रोगग्रस्त ~ रोग से ग्रस्त
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