Kaidi aur Kokila Class 9 Solutions Pathit Kavyansh कैदी और कोकिला पठित काव्यांश / पद्यांश

Kaidi aur Kokila Class 9 Solutions Pathit Kavyansh कैदी और कोकिला पठित काव्यांश / पद्यांश


 

निम्नलिखित काव्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

  

1. क्या गाती हो?

क्यों रह-रह जाती हो?

कोकिल बोलो तो!

क्या लाती हो?

संदेशा किसका है?

कोकिल बोलो तो!

ऊँची काली दीवारों के घेरे में,

डाकू, चोरों, बटमारों के डेरे में,

जीने को देते नहीं पेट-भर खाना,

मरने भी देते नहीं, तड़प रह जाना !

जीवन पर अब दिन-रात कड़ा पहरा है,

शासन, या तम का प्रभाव गहरा है?

हिमकर निराश कर चला रात भी काली

इस समय कालिमामयी जगी क्यूँ आली?


(क) कवि ने रात के अंधेरे में किसे संबोधित किया है और क्यों?

(ख) कवि को कारागार में किसके साथ बंद किया गया है?

(ग) कवि ने शासन की तुलना किससे की है?

(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य प्रतिपादित कीजिए।

(ङ) कवि को जेल में क्यों बंद किया गया था? कोयल की कूक का कवि पर क्या प्रभाव पड़ा था?


उत्तर-(क) कवि ने रात को कोयल की उपस्थिति को अनुभव किया था और संबोधित किया था क्योंकि कारागार में शेष सब तो सो रहे थे। केवल कवि जाग रहा था और कोयल भी रात के अंधेरे में कूक रही थी।


(ख) कवि को कारागार में डाकुओं, चोरों और राह चलते लोगों को लूटने वाले लुटेरों के साथ बंद किया गया था।


(ग) कवि ने अंग्रेजी शासन की तुलना गहरे अंधेरे से की है।


(घ) कवि ने अंग्रेजों के कारागार में अत्याचारों और अपमान को झेला था। उसे चोर-लुटेरों के साथ बंद किया गया था। दिन-रात उस पर पहरा रहता था। कवि न तो भूखा-प्यासा जी पाता था और न ही मर पाता था। वह निराशा के भावों से भर गया था। कवि ने खड़ी-बोली का प्रयोग किया है जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दावली का समन्वित प्रयोग सराहनीय है। अभिधा शब्द शक्ति और प्रसाद गुण ने कथन को सरलता-सरसता से प्रकट किया है। अनुप्रास, और पुनरुक्ति प्रकाश अलंकारों के स्वाभाविक प्रयोग ने काव्य-सौंदर्य में वृद्धि की है। गेयता का गुण विद्यमान है। करुण रस है।


(ङ) अंग्रेजी शासन में स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए किए जाने वाले प्रयत्नों के कारण कवि को जेल की कोठरी में बंद कर दिया था। आधी रात के समय किसी कोयल के कूकने की आवाज को सुन कवि को ऐसा अहसास हुआ कि कोयल भी पूरे देश को एक कारागार के रूप में देखने लगी थी, इसलिए वह आधी रात में चीख उठी थी।


2. क्यों हूक पड़ी?

वेदना बोझ वाली-सी;

कोकिल बोलो तो!

क्या लुटा?

मृदुल वैभव की रखवाली-सी,

कोकिल बोलो तो!

क्या हुई बावली?

अर्धरात्रि को चीखी,

कोकिल बोलो तो!

किस दावानल की

ज्वालाएँ हैं दीखीं?

कोकिल बोलो तो!


(क) कवि कोयल से क्या जानना चाहता है?

(ख) कवि ने कोयल के लिए किस विशेषण का प्रयोग किया है?

(ग) कवि ने 'दावानल की ज्वालाएँ' किसे माना है?

(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य को प्रतिपादित कीजिए।

(ङ) कवि किन कष्टों में रातभर कहाँ जागता रहता था और कोयल से वह क्या जानना चाहता था?

(च) कवि ने कोयल की कूक' को 'हूक' क्यों कहा है?


उत्तर-(क) कवि कोयल से जानना चाहता है कि वह आधी रात के समय किस पीड़ा से परेशान हो कर कूकी थी? क्या वह पागल है या उसे जंगल में लगी आग की लपटें दिखाई दी थीं?


(ख) कवि ने कोयल के लिए 'मृदुल वैभव की रखवाली-सी' विशेषण का प्रयोग किया है।


(ग) कवि ने 'दावानल की ज्वालाएँ' भयंकर और दुःखदायी संकटों के लिए माना है। हमारा देश उस समय अंग्रेजी शासन का गुलाम था इसलिए हमारे लिए परतंत्रता ही 'दावानल की ज्वालाएँ' थीं। कवि नहीं जानता कि आधी रात के समय कूकने वाली कोयल के लिए 'दावानल की ज्वालाएँ' क्या थीं।


(घ) कवि देश की स्वतंत्रता के लिए किए जाने वाले प्रयलों के कारण विदेशी सरकार के द्वारा कारागार में बंद कर दिया गया था। वह परेशान था और उसे आधी रात के समय कूकने वाली कोयल भी परेशान प्रतीत हुई थी। मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि किसी दुःख से परेशान व्यक्ति को अन्य प्राणी भी उसी दुःख से पीड़ित प्रतीत होने लगते हैं। कवि ने प्रश्न, उपमा और अनुप्रास अलंकारों का सहज स्वाभाविक प्रयोग किया है। लयात्मकता का प्रयोग किया गया है। तत्सम शब्दावली की अधिकता है। प्रसाद गुण, अभिधा शब्द शक्ति और बेचैनी का भाव प्रस्तुत हुआ है।


(ङ) कवि को अंग्रेजी सरकार ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण कारागार में बंद कर दिया था। कवि वहाँ के कष्टों से परेशान रात-रात भर जागता रहता था। आधी रात के समय कूकने वाली कोयल को कवि ने संबोधित करते हुए उनके कष्टों के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की थी।


(च) कवि स्वयं अंग्रेज़ी शासन के व्यवहार से परेशान है। उसे कोयल । कूक भी परेशानी से भरी हुई प्रतीत होती है। इसलिए कवि ने उसे हूक कहा है।


3. क्या?-देख न सकती जंजीरों का गहना?

हथकड़ियाँ क्यों? यह ब्रिटिश-राज का गहना,

कोल्हू का चर्रक चूँ?-जीवन की तान,

गिट्टी पर अंगुलियों ने लिखे गान !

हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जूआ,

खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कूँआ।

दिन में करुणा क्यों जगे, रूलाने वाली,

इसलिए रात में गज़ब ढा रही आली?

इस शांत समय में,

अंधकार को बेध, रो रही क्यों हो?

कोकिल बोलो तो!

चुपचाप, मधुर विद्रोह-बीज

इस भाँति बो रही क्यों हो?

कोकिल बोलो तो!


(क) कवि ने कौन-से गहने पहने हुए हैं?

(ख) कवि को कारागार में कौन-कौन से शारीरिक परिश्रम के काम दंड रूप में करने पड़ते थे?

(ग) कवि दिन के समय अपनी पीड़ा के भावों को क्यों नहीं प्रकट करना चाहता?

(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य प्रतिपादित कीजिए।

(ङ) कवि ने कारागार में किन कष्टों की ओर संकेत किया है?

(च) कवि ने ब्रिटिश अकड़ का कुआं किस प्रकार खाली किया था?

(छ) रात के समय कोकिल किस कारण आई थी?

(ज) 'मोट' और 'जूआ' क्या हैं?

(झ) कवि ने कोकिल के कूकने को 'रो रही क्यों हो' क्यों कहा है?


उत्तर-(क) कवि ने अंग्रेज़ सरकार के द्वारा लोहे की बनी हथकड़ियों रूपी गहने पहने हुए हैं।


(ख) कवि को कारागार में तेल निकालने के लिए पशुओं की तरह कोल्हू चलाना पड़ता था; हथौड़ों से ईंट-पत्थर की गिट्टियाँ बनानी, पेट की सहायता से हल जोतना, बैलों की तरह छाती से फीता लगाकर चूना आदि पीसने का काम करना पड़ता था।


(ग) कवि नहीं चाहता था कि कारागार की कठिनाइयों से व्यथित उसके मन की दशा कारागार के पहरेदार जान पाते। इसलिए दिन के समय अपनी पीड़ा के भावों को प्रकट नहीं करना चाहता था।


(घ) कवि ने विदेशी शासकों की कारागार में स्वतंत्रता सेनानियों को दी जाने वाली यातनाओं का सजीव चित्रण किया है जिससे उनकी क्रूरता का परिचय मिलता है। चित्रात्मकता के गुण ने कवि के कथन में छिपी पीड़ा को वाणी प्रदान की है। प्रश्न, रूपक और अनुप्रास अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग सराहनीय है। करुण रस विद्यमान है। तद्भव और सामान्य बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिससे कथन को सरलता और स्वाभाविकता प्राप्त हुई है। अभिधा शब्द शक्ति का प्रयोग है।


(ङ) कवि ने कैदियों को कारागार में दिए जाने वाले तरह-तरह के कष्टों की ओर संकेत किया है।


(च) स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए देश भक्तों ने संघर्ष करते हुए ब्रिटिश सरकार के द्वारा दी जाने वाली यंत्रणाओं को चुपचाप झेला था जिससे उन्होंने ब्रिटिश अकड़ का कुआं खाली किया था।


(छ) रात के समय कोकिल स्वतंत्रता सेनानियों के कष्टों में सहभागी बनने और उनके कष्टों पर मरहम लगाने के लिए आई थी। वह उनके साथ मिलकर रोना चाहती थी।


(ज) 'मोट' कुएं से पानी निकालने के लिए चमड़े का बना डोल-सा है और जूआ' लकड़ी का मोटा लट्ठा है जो बैलों के कंधे पर रखा जाता है। इसमें हल बांधकर खेत जोता जाता है।


(झ) कवि ने कोकिल के कूकने को 'रो रही हो क्यों' इसलिए कहा कि मधुर स्वर में कूकने वाली उनके विद्रोही स्वर को प्रेरणा दे रही थी। अंग्रेजी शासन के प्रति उनके आक्रोश को बढ़ा रही थी।


4. काली तू, रजनी भी काली,

शासन की करनी भी काली,

काली लहर कल्पना काली,

मेरी काल कोठरी काली,

टोपी काली, कमली काली,

मेरी लोह-श्रृंखला काली,

पहरे की हुंकृति की ब्याली,

तिस पर है गाली, ऐ आली !

इस काले संकट-सागर पर

मरने की, मदमाती!

कोकिल बोलो तो!

अपने चमकीले गीतों को

क्योंकर हो तैराती!

कोकिल बोलो तो!


(क) कवि ने अपने आस-पास के वातावरण में किन-किन काली वस्तुओं की गणना की है?

(ख) पहरेदारों की हुँकार कवि को कैसी प्रतीत होती है?

(ग) काला 'संकट-सागर' क्या है?

(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य प्रतिपादित कीजिए।

(ङ) कवि ने किस वातावरण का चित्रण किया है?

(च) 'काली' विशेषण किन-किन अर्थों को स्पष्ट करता है?

(छ) कोयल की कूक 'चमकीला गीत' क्यों है?


उत्तर-(क) कवि ने अपने आस-पास के वातावरण में कोयल को काला माना है। रात काली है। अंग्रेजी शासन काला है, लहर काली है, कवि की कल्पना काली है। काल कोठरी काली है, उसकी टोपी काली है, कंबल काला है और उसको बाँधने वाली जंजीरें भी काली हैं।


(ख) कवि को पहरेदारों की हुँकार सर्पिणी जैसी विषैली प्रतीत होती है।


(ग) देश पर विदेशी शासन काला 'संकट-सागर' है जिसमें सारे देशवासी निरंतर डूब रहे थे।


(घ) कवि ने कारागार में तरह-तरह के कष्ट उठाये थे। उसे प्रतीत होता था कि वह पीड़ा के अंधेरे में डूबा हुआ है जिस के चारों तरफ गहरा कालापन छाया हुआ है। दृश्य बिंब योजना है जिससे निराशा का भाव टपकता है। अनुपास, रूपक और पदमैत्री का सहज-स्वाभाविक प्रयोग किया गया है। अभिधा शब्द का प्रयोग कथन की सरलता-सरसता का आधार बना है। प्रसाद गुण तथा करुण रस विद्यमान है। तत्सम और तद्भव शब्दावली का समन्वित रूप प्रकट किया गया है।


(ङ) कवि ने कारागार के वातावरण का चित्रण किया है।


(च) कवि ने 'काली' विशेषण का साभिप्राय प्रयोग किया है जो निम्नलिखित अर्थों को प्रकट करता है- 

(i) काला रंग = कोकिल, रात, टोपी. कंबल लोहे की जंजीर।

(ii) भयानकता = काली लहर, काली कल्पना, काली काल-कोठरी।

(iii) अन्याय/ क्रूरता = शासन की करनी, संकट-सागर ।

 

(छ) कवि को कोकिल की कूक आशा और उत्साह का भाव और स्वर प्रदान करती थी जिस कारण वह अपनी निराशा से मुक्ति पाता था। वह उसे प्रेरणा प्रदान करती थी। कवि को कोकिल का स्वर देशभक्ति का भाव भरता सा प्रतीत होता था इसलिए उसने उसे 'चमकीला गीत' कहा है।

 

5. तुझे मिली हरियाली डाली,

मुझे नसीब कोठरी काली !

तेरा नभ-भर में संचार

मेरा दस फुट का संसार !

तेरे गीत कहार्वे वाह,

रोना भी है मुझे गुनाह!

देख विषमता तेरी-मेरी,

बजा रही तिस पर रणभेरी !

इस हुंकृति पर,

अपनी कृति से और कहो क्या कर दूँ?

कोकिल बोलो तो!

मोहन के व्रत पर,

प्राणों का आसव किसमें भर दूँ !

कोकिल बोलो तो!

 

(क) कवि ने अपनी और कोकिल की अवस्थाओं में किस प्रकार तुलना की है?

(ख) कवि का हृदय क्या कर रहा है?

(ग) कवि ने किसके व्रत का पालन करने का निश्चय किया था?

(घ) अवतरण में निहित काव्य-सौंदर्य प्रतिपादित कीजिए।

(ङ) कवि किस पीड़ा से पीड़ित है?

(च) 'नभ-भर का संचार' से क्या आशय है?

(छ) दस फुट का संसार क्या है?

(ज) मोहन का व्रत क्या है?

 

उत्तर-(क) कवि ने माना है कि कोकिल को रहने के लिए हरी-भरी शाखाएँ प्राप्त हुईं तो उसे काली कोठरी मिली। कोकिल का संचरण सारे आकाश में होता है तो कवि का संसार दस फुट की कोठरी है। कोकिल का कूकना गीत कहलाता है तो कवि का रोना भी गुनाह है।

 

(ख) कवि का हृदय देश की आजादी का आह्वान करते हुए रणभेरी बजा रहा है।

 

(ग) कवि ने महात्मा गाँधी के द्वारा देश की आजादी के व्रत का पालन करने का निश्चय किया है।

 

(घ) कवि ने देश की आजादी के लिए उसी रास्ते को अपनाने का निश्चय किया है जो महात्मा गाँधी ने निर्धारित किया था। कवि ने सामान्य बोल-चाल के शब्दों का प्रयोग किया है। लयात्मकता की सृष्टि हुई है। अभिधात्मकता ने कवि के कथन को सरलता-सरसता प्रदान की है। प्रश्न, पदमैत्री और अनुप्रास का स्वाभाविक प्रयोग सराहनीय है। प्रसाद गुण विद्यमान है।

 

(ङ) कवि कारागार में बंद होने की पीड़ा से पीड़ित है। वह चाह कर भी अपना दुःख-सुख व्यक्त नहीं कर पाता।

 

(च) 'नभ-भर का संचार' से कवि का तात्पर्य स्वतंत्रता है; खुले आकाश विहार करना है।

 

(छ) छोटी-सी काल कोठरी ही कवि के लिए 'दस फुट का संसार' है।

 

(ज) मोहन का व्रत' महात्मा गांधी (मोहन दास करम चंद गांधी) के द्वारा स्वतंत्रता के लिए निरंतर संघर्ष करते रहना है।

 

 



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