life of pie friendship | 2 main character in the story | कहानियां
hindi kahan friendship story
दोस्तो यह कहानी दो दोस्तों की है इस कहानी में अखिलेश और सुरेश दो मित्रो के बिछड़ने और मिलने की कहानी है।
इसमे इनके बचपन की अनोखी दास्ता यह अपने आप मे एक अनूठी कहानी जिसमें दोनों दोस्तों के साथ हुआ वह नही होना चाहिए।
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| (Photo credit: Andre Furtado from Pexels) |
सुरेश और अखिलेश दोनों बचपन से ही साथ रहते थे इनको साथ रहने में बड़ा मजा आताथा। ये दुसरो के खेतों में जाकर कुछ न कुछ तोड़ लाते। इनका दिमाग हमेसा free की चीज कैसे मिले।
पेड़ो पे चढ़ कर आम, कटहल, अमरूद, जो भी मिले उसे तोड़ लेते। कुछ दिन बाद अखिलेश के पिता अपना सभी कुछ बेच कर शहर चले गए।
सुरेश अब अकेले ही रह गया सुरेश को उसकी माँ गांव के school भेजने लगी पढने के लिए।
वहाँ एक लड़के से उसकी दोस्ती हो गई उसका नाम सोहन था। सोहन के पिता दूसरो के खेतों में काम किया करते जो कुछ थोड़ा बहुत मिलता उसी से उसका घर परिवार चलता।
सोहन का परिवार बहुत गरीबी से गुजर रहा था। सोहन बहुत मजबूत मांसल शरीर का शक्तिशाली बालक था और उसकी समझ औरो से कम थी। चूंकि सोहन बहुत ही चतुर था उसको ये पता था कि सोहन आगे उसके कितने काम आने वाला था।
इसी इसी कारण सुरेश उससे दोस्ती किया। सुरेश सोहन को कभी पटरी पर लिखने के लिए चॉक देता तो कभी पढ़ने के लिए किताब इसी तरह की दोस्ती थी। एक दिन बगल के गांव का लड़का सुरेश को कुछ बोल दिया तो सुरेश कुछ बोलता इससे पहले ही सोहन ने उसे ऐसे घुमा के हाथ मारा की बेचारा गिर गया।
कुछ समय बाद मास्टर साहब आये और उन दोनों को सजा में खड़ा कर दिये तकरीबन दो घण्टी बितने के बाद इंटरबल हुआ मास्टर साहब ने दोनों का दो दो छड़ी लगाई और बोला कि अब झगड़ा मत करना जाओ इंटरबल हुआ नास्ता कर लो।
सोहन तो सुरेश के परम भक्त दोस्तों में से था। मास्टर में मुझे मारा तो चलेगा लेकिन सुरेश को मारा वो सोचने लगा कि अब क्या करूँ।
मास्टर साहब की साइकिल रखी थी वो धीरे से गया और सुरेश का दिया हुआ परकाल से मास्टर साहब की साइकिल के टायर में परकाल घुसाने लगा वो टायर को घूम-घूम के परकाल घुसाया कम से कम एक एक टायर में पचास पचास बार परकाल घुसाई और वह वापस आ गया।
साइकिल के पास से वापस आते समय उसी लड़के ने देख लिया जिससे उसकी लड़ाई हुई थी। सोहन ने आकर सुरेश को बताया।
"मास्टर साहब क साइकिल सही कर देली गुरु। सुरेश ने कहा कोई देख तो नही सोहन बोला एक मिला देखले हाव् वही जउने से झगड़ा वा भायल रहल।"
अब बारी सुरेश की थी सुरेश दौड़ता हुआ मास्टर साहब के पास पहुचा और बोला सुनील ने आप की साइकिल खराब कर दी और चलागया। मास्टर साहब सोचे कुछ हल्का फुल्का हुआ होगा चलो छुट्टी में ठीक करवा लूंगा।
छुट्टी हुआ मास्टर साहब अपनी साइकिल ले कर जब दुकान पहुचे। दुकानदार पंचर लगाने के लिए खोला और मुस्कराने लगा। किसी तरह से मास्टर साहब अपने घर गए और दूसरे दिन क्या हुआ होगा ये बताने की जरूरत नही।
कुछ दिनों के बाद उनके स्कूल में नए हिंदी के मास्टर आये मास्टर साहब थोड़े बुजुर्ग थे उन्हें हाइड्रोसिल नामक रोग था।
वो भी साइकिल से ही चलते। एक दिन पूरे स्कूल के बच्चों से सवाल पूछा बच्चे नही बात पाए तो मास्टर् साहब भी अपने पवार का इतेमाल किया।
देखते देखते पूरे क्लास के बच्चों को मुर्ग बना के पनिसमेट दे दिया। सोहन और सुरेश भी उसी क्लास में थे वो लोग भी मुर्गा बना दिये गए।
थोड़ी देर बाद सोहन को प्यास लगी पानी पीने के लिए बाहर गया वो देखा कि मास्टर साहब की साइकिल खडी है वो मास्टर साहब के साईकिल की गद्दी को पकड़ कर नोंच दिया गद्दी का कबर हाथ मे आ गया और स्प्रिंग भी उखाड़ गया और ऊपर की ओर निकल गया।
सोहन ने गद्दी का कवर उसीपर धीरे से रखा और पानी पी के क्लास में चला गया। जब छुट्टी हुआ सभी बच्चे अपने अपने घर चले गए और मास्टर साहब जी लोग जाने की तैयारी करने लगे। नए मास्टर जी भी अपनी साइकिल निकली और जैसे ही चढ़ने के लिए लपके तो उनकी गद्दी का कवर गिर गया अब तो जो करना था तो वो स्प्रिंग को करना था।
इसी तरह समय बीतता गया अब सुरेश बड़ा हो गया। सुरेश और सोहन की शादी भी हो गई उनकी दोस्ती अभी भी तगड़ी वाली ही थी लेकिन एक बात तो थी। सोहन के संगत में सुरेश एकदम सुधार गया।
गांव से थोड़े दूरी पर मेला लगा था। उस मेले में सुरेश और सोहन मेला घूमने गए गया। मेला गाँव का था इसलिए इसलिए गाँव के आसपास के लोगों की ही भीड़ थी, उस मेले में झूले कई प्रकार के थे बड़े छोटे, सरकश का खेल, जादूगरी का खेल, चिड़ियाघर, गुब्बारे फोड़ने वाला, फ़ोटो खीचने वाली आदि बहुत तरह की दुकानेलगी थी।
खाने पीने में गुड़ की बनी जलेबी जिसको चोटहवा जलेबा कहते है दोनों को बहुत पसंद था। दोनों ने जलेबा खाया। नानखटाई, रेवाड़ी चूड़ा, नारियल की मिठाई, आदि ले लिए।
बच्चों के लिए लकड़ी के खिलौने भी लिए। वहाँ पे बहुत तरह-तरह की दुकानें लगी थी उन दुकानों में लोगों का तांता लगा था। एकाएक सुरेश को लगा कि कोई उसकी पॉकिट से कुछ निकलने की कोशिश कर रहा है।
सुरेश ने बहुत तेजी से उसका हाथ पकड़ लिया और बोला ये क्या कर रहे हो और इधर से सोहन ने देखा तो वह घूम के उस व्यक्ति को पीछे से जाके पकड़ लिया। और बोला का भयल गुरु ई का कैलेश।
वह व्यक्ति भी बहुत चतुर था बोला भीड़ की वजह से आप को परेशानी हुई होगी मैने तो कुछ नही किया फालतू में तुम लोग परेशान कर रहे हो।
सोहन बोला चलो बताओ तुम कहाँ के रहने वाले हो हम छोड़ देंगे। उस व्यक्ति ने गाँव का पता बताया जहां कि अखिलेश रहता था उसका नाम पूछने पर अपना नाम अखिलेश बताया। सोहन ने कहा लगता है ये ठीक कह रहा है जाने दो जाओ भाई। सुरेश समझ गया ये उसका पुराण दोस्त अखिलेश ही है।
सुरेश बोला सोहन इसको छोड़ो मत ये रामदीन काका का लड़का अखिलेश है ये बहुत बड़ा ठग है। बेचारा अखिलेश सन्न रह गया इसको कैसे पता मै कौन हूँ? और मेरे पिताजी का नाम कैसे जनता है?
सुरेश और सोहन उसे एक दुकान पर लेगये और पूछा अखिलेश तुम क्या खाओगे? अखिलेश बोला पहले तुम बताओ ये सब क्या है? तुमको मुझसे क्या काम है? सुरेश कुछ नही बोलता है बस समोसा लाने के लिए चला जाता है सभी समोसा खाते है और मेला घूमते है।
शाम होने पर सुरेश अखिलेश से पूछता है कि शहर जाओगे की गाँव मे चलोगे। अखिलेश परेसान था इसलिए वो गांव आने के लिए राज़ी हो गया कि माजरा क्या है ? ये व्यक्ति कौन है ? मुझे कैसे जनता है ?
यही जानने के लिए अखिलेश तैयार हो गया। जब वह गाँव मे दाखिल हुआ तो बोला भाई देखो यहाँ एक कटहल का पेड़ था उसके नीचे बूढ़ी काकी दान भुजा करती थी। थोड़ा और आगे बढ़ा तो बोला यहां आम का बगीचा था इस बाग में मैं और मेरा दोस्त आम तोड़ते थे अब पता नही वो दोस्त कहाँ है और क्या करता होगा।
बात चीत करते करते सोहन का घर आ गया। सोहन को देखते ही उसके बच्चे दौड़ाते हुए आय सोहन ने बच्चों को मिठाई और लकड़ी के खिलौने दिए। बच्चे खिलोने और मिठाई पाकर काफी खुश थे। दौड़कर झोपड़ी में चले गए।
सुरेश बोला सोहन हम लोग भी चलते है शाम होने वाली है यह बोलकर दोनों आगे बढ़ गए।
जब अखिलेश सुरेश के घर के पास पहुचा तो अखिलेश को शक हुआ कि मेरा दोस्त सुरेश ही है। अखिलेश बोला तुम सुरेश ही हो बोलो मैं समझ नही पाया। इतना कह के रोने लगा।
सुरेश उसको गले से लगा लिया और उसको अपने घर मे ले गया। सुरेश की पत्नी दोनों के लिए पानी ले आयी। पानी पीने के बाद अखिलेश अपने गाँव को छोड़ के जाने के बाद उसके साथ क्या-क्या हुआ वो कितने परेशानियों के बीच बड़ा हुआ ये सभी बातें सुरेश को बताया।
सुरेश भी अपनी सभी बाते अखिलेश को बताई अखिलेश की तो हँसते हँसते हालत खराब हो गई। दोनों अपने दोस्ती के दिनों को याद करने लगे। बाते करने में ये इतने व्यस्त थे कि अंधेरा हो गया पता ही नही चला।
सुरेश की पत्नी मंजू लोटे में पानी ले आई बोली "हाथ धो लीजिये आप लोग खाना ला रही हूं।" अखिलेश और सुरेश खाना खाएं और घर के बाहर खेत मे चारपाई बिछा के सो गये।

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