life of pie sweet kulfi ki hindi kahani in the village
कुल्फी story
the moral story in Hindi sweet kulfi ki Kahani story in the village
life of pie से जुडी मेरे जीवन की एक अनोखी कहानी वो मै अपने जीवन में कभी नहीं भूल सकता जो कहानी आप के लिए लिखा है वो पुरे मन से उन लमहो को hindi kahani के रूप में आप के साथ बटाने की कोशिश किया हूँ
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| (Image credit: takuya nagaoka on unsplash) |
मै हर साल गर्मियों के छुट्टि में मामा के घर जाया करता था वहाँ मुझे कुछ न कुछ नया हमेशा दिखाई देता मेरे लिए सभी चीजें नई होती जैसे चाहे मछली पकड़ने हो, नरकट का कलाम बनाना जिसे किरिच कहते और उसे इंक में डुबो के लिखना, तेल निकालने का तरीका जो बैलो के माध्यम से होता।
वहाँ पे मुझे दाना भुनाते देखना सबसे अच्छा लगता था क्युकी वहा जमीन पर एक चूल्हा होता जिसमे एक साथ कई सारे मिटटी के बरतन होते उसमे बरी बरी डाल कर भुनाते और वही दाना इतना स्वादिस्ट होता की उस दाना को मै आज तक नहीं भूल पाया नारिया थपुवा बनाते देखना ये सभ चीजे मेरे लिए नई थीं।
story उन दिनों की है जब गर्मी की छुट्टी में मैं जब अपने मामा के घर गया जो एकदम हरियाली से भरी गांव का क्षेत्र था।
वहां जब पहुंचा तो देखा कि कुछ बच्चे पेड़ के नीचे भीड़ लगाए थे, एक आदमी अपने साइकिल के पीछे पेटी बांधे खड़ा था तभी हमारे मामा का लड़का वह दौड़ता हुआ मेरी तरफ कुछ लेकर आया वह एक सफेद रंग की काफी कड़क आइसक्रीम थी मैंने खाया ठीक लगा बचपन में क्वालिटी कौन देखता बस ठंडी बर्फ है और मीठी लग रही है बस हो गया।
हमारे मामी ने कहा "यह सब अच्छा नहीं होता है रुको कुल्फी वाला आएगा तो, तुम लोगों kulfi खाने लेना।"
एक-दो दिन तक कुल्फीवाला नजर नहीं आया।
हम लोग एक पेड़ जो काफी छोटा था उसके ऊपर चढ़कर खेल रहे थे तभी एक लड़का चिल्लाते हुए उधर से गुजरा जो अपने घर की तरफ जा रहा था उस लड़के के मुंह से खाली "कुल्फी वाला आ रहा है कुल्फी" बस इतना ही शब्द निकल रहा था।
यह सुनकर हम लोगों को पता चल गया कि लगता है उस तरफ कुल्फी वाला आ गया है और हम सब धीरे से पेड़ से उतरे और मामी को खोजने लगे।
मामा के घर के बगल से मामा के दोस्त के लड़के आते दिखाई दिए।
मामा के दोस्त का बड़ा लड़का अपने छोटे भाई का एक हाथ पकड़े हुए था। जो छोटा भाई था वह एक हाथ से तो अपने बड़े भाई का हाथ पकड़ा था दूसरे हाथ से अपना पैजामा। क्योंकि उसके पजामे में नाड़ा ही नहीं था।
मैंने पूछा भाई तुम इससे पैजामे में मैं नाडा क्यों नहीं डाल देते तो, उसने बताया यह बहुत शैतान है कम से कम एक हाथ तो व्यस्त रहेगा अपने पजामा को पकड़ते हुए।
तभी सामने से kulphi वाला अपना ठेला लेकर आ रहा था। उसका ठेला काफी छोटे साइज का था जिसके ऊपर पटरा नहीं था उसमें नीचे की तरफ पटरा लगा हुआ था। उसमें एक बड़ी साइज की मटकी जिसके ऊपर टाट का बोरा चारों तरफ लपेटा हुआ था। उस मटके में कुल्फी के कोन रखे हुए थे।
तभी मामा का लड़का घर के अंदर से थोड़ा गेहूं लेकर बाहर आया। उस समय मैं चौक गया यह गेहूं क्यों लेकर आया है क्या यह गेहूं के बदले कुल्फी देगा क्या। कुल्फी वाले ने गेहूं हाथ में लिया और देखा यही कितने मूल्य का है, और हम लोगों को उसने कुल्फी दे दिया।
हम लोग कुल्फी खाए कुल्फी बहुत स्वादिष्ट था। कुल्फी वाले के मटकी में कई स्वाद का कुल्फी होती थी।
जैसे दूध मलाई काजू वाला नारियल वाला यह सारे तो कुल्फी का कोन था। पर उसके पास कोला वाला और ऑरेंज वाला पाइप भी रखता था। जो आज भी गाँव मे देखने को मिल जाता है।

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