प्रकाश ( Light ) ( Physics ) part-7

 प्रकाश ( Light )


प्रकाश ( Light ) :

  •  प्रकाश ऊर्जा का ही एक रूप है ।
  • यह विद्युत चुम्बकीय विकिरण है जो विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक तथा मानव निर्मित स्रोतों से प्राप्त होता है । 
  • प्रकाश का अभिज्ञान हमें आँखों द्वारा होता है ।
  •  फोटोग्राफी फिल्मों और प्लेटों में रासायनिक अभिक्रिया उत्पन्न करना तथा पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया ऐसे उदाहरण हैं जो सिद्ध करते हैं कि प्रकाश एक ऊर्जा है ।

  •  प्रकाश सूर्य , तारों , लैम्प आदि से प्राप्त एक प्रकार की ऊर्जा है .
  •  जो विद्युत चुम्बकीय तरंगों के रूप में संचारित होता है 
  • इसका तरंगदैर्ध्य 3900 °A से 7800 °A के बीच होता है ( 1°A % 10^-10 ° m . ) 

  • प्रकाश के प्राकृतिक स्रोत - सूर्य , तारे एवं अंतरिक्ष के अन्य प्रकाश हैं । 
  • सूर्य से पृथ्वी को लगभग 4 x 10^26 जूल प्रति सेकेण्ड की दर से ऊर्जा मिलती है । 
  • जो प्रकाश जीव - जन्तुओं से प्राप्त होता है , उसे जैव - प्रकाश कहते 

प्रदीप्त वस्तुएँ ( Luminous Bodies ) : 

  • प्रदीप्त वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं , जो अपने स्वयं के प्रकाश से प्रकाशित होती हैं ।
  •  जैसे - सूर्य , विद्युत बल्ब आदि ।

अप्रदीप्त वस्तुएँ ( Non - Luminous Bodies ) : 

  • अप्रदीप्त वस्तुएँ , वस्तुएँ हैं , जिनका अपना स्वयं का प्रकाश नहीं होता , लेकिन उन पर प्रकाश डालने पर वे दिखायी देने लगती हैं । 

पारदर्शक वस्तुएँ ( Transparent Bodies ) :

  •  पारदर्शक वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जिनसे होकर प्रकाश की किरणें निकल जाती हैं जैसे - काँच । 

 अर्द्धपारदर्शक वस्तुएँ ( Translucent Bodies ) : 


  • कुछ वस्तुएँ ऐसी होती हैं जिन पर प्रकाश की किरणें पड़ने से उनका कुछ भाग तो अवशोषित हो जाता है तथा कुछ भाग बाहर निकल जाता है , ऐसी वस्तुओं को अर्द्धपारदर्शक वस्तुएँ कहते हैं ।
  • जैसे - तेल लगा हुआ कागज ।

 अपारदर्शक Opaque Bodies ) :

  • अपारदर्शक वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं , जिनसे होकर प्रकाश कीकिरणें बाहर नहीं निकल पातीं 
  • जैसे - धातुएँ आदि । 

प्रकाश की चाल ( Velocity of Light ) : 

  • सामान्यत : प्रकाश की चाल वायु तथा निर्वात में सबसे अधिक होती है । 
  • निर्वात में प्रकाश की चाल तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकेण्ड होती है तथा यह माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करती है । 
  • जिस माध्यम का अपवर्तनांक जितना अधिक होता है , उसमें प्रकाश की चाल उतनी ही कम होती है ।
  •  सूर्य से प्रकाश को पृथ्वी तक आने में 500 सेकेण्ड या 8 मिनट 20 सेकेण्ड लगते हैं । 

  • चन्द्रमा से परावर्तित प्रकाश को पृथ्वी तक आने में 499 सेकेण्ड का समय लगता है । 

प्रकाश का परावर्तन ( Reflection of Light ) : 

 

  • प्रकाश किरण के चिकने पृष्ठ से टकराकर वापस लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं ।
  • समतल दर्पण प्रकाश का सबसे अच्छा परावर्तक माना जाता है । 
  •  परावर्तक पृष्ठ के लम्बवत् सीधी रेखा को अभिलम्ब कहते हैं । 
  • जो किरण परावर्तक तल पर आकर गिरती है , आपतित किरण कहते हैं ।
  • जो किरण परावर्तन के पश्चात् वापस उसी माध्यम से लौट जाती है , उसे परावर्तित किरण कहते हैं । 
  •  आपतित किरण व अभिलंब के बीच के कोण को आपतन कोण तथा अभिलंब एवं परावर्तित किरण के बीच के कोण को परावर्तन कोण कहते हैं । 

प्रकाश का परावर्तन दो नियमों के अनुसार होता है

  •  ( i ) आपतित किरण , अभिलंब एवं परावर्तित किरण एक ही समतल में होता है । 
  • ( ii ) आपतन कोण का मान परावर्तन कोण के बराबर होता है

 प्रकाश का अपवर्तन ( Refrection of Light ) : 

  • जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है तो अपने पथ से थोड़ा मुड़ जाता है , इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं । 
  • इसके लिए प्रकाश का दो अलग - अलग माध्यमों से गुजरना आवश्यक है ।
  •  जब प्रकाश की कोई किरण विरल माध्यम ( Rarer Medium ) से सघन माध्यम ( Denser Medium ) ( वायु से जल ) में प्रवेश करती है तो वह दोनों माध्यमों के पृष्ठ पर खींचे गये अभिलम्ब की ओर झुक जाती है
  • जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम ( पानी से हवा ) में प्रवेश करती है तो वह अभिलंब से दूर हट जाती है । 
  • जब प्रकाश की किरण अभिलंब के समानांतर प्रवेश करती है तो उनके पथ में कोई परिवर्तन नहीं होता तथा वे बिना झुके सीधी निकल जाती हैं । 
  • किसी माध्यम का अपवर्तनांक भिन्न - भिन्न रंगों के प्रकाश के लिए भिन्न - भिन्न होता है । 
  • प्रकाश की तरंगदैर्ध्य बढ़ने के साथ वायु के सापेक्ष अपवर्तनांक का मान कम होता जाता है । 
  • दृश्य प्रकाश में लाल रंग का अपवर्तनांक सबसे कम तथा बैंगनी रंग का सबसे अधिक होता है क्योंकि लाल रंग की तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक व बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होती है । 
  • ताप के बढ़ने के साथ अपवर्तनांक का मान कम होता जाता है

क्रांतिक कोण ( Critical Angle ) :


                            
  • जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम विरल माध्यम में जाती है तो अपवर्तन के कारण अपवर्तित किरण अभिलम्ब से दूर हट जाती है , जिससे अपवर्तन कोण सदैव आपतन कोण से बड़ा होता है । 
  •  यदि आपतन कोण का मान धीरे - धीरे बढ़ाया जाए तो आवर्तन कोण भी बढ़ता जाता है ।
  •  यदि आपतन कोण के एक विशेष मान पर अपवर्तन कोण का मान 90 ° होता है तो इस विशेष मान कोण को क्रान्तिक कोण कहते हैं ।
  •  क्रान्तिक कोण पानी - वायु माध्यम युग्म के लिए 42 ° होता है । 
  • हीरा - वायु माध्यम युग्म के लिए इसका मान 24 ° है ।
  •  हीरे के अंदर जब किसी पृष्ठ पर आपतन कोण 24 ° से कम होता है , तभी वह प्रकाश हीरे से बाहर निकलता है तथा जब यह प्रकाश हमारी आँखों पर पड़ता है तो हीरा हमें चमकदार दिखायी देता है ।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन ( Total Internal Reflection ) :
  •  यदि आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से जरा सा भी अधिक जाए तो प्रकाश विरल माध्यम से बिल्कुल नहीं जाता , बल्कि ' संपूर्ण f ' प्रकाश परावर्तित होकर सघन माध्यम में ही लौट आता है । इस घटना को प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं । 
प्रतिबिम्ब ( Image ) : 
  • दर्पण के सामने रखी वस्तु से चलने वाली प्रकाश किरणें दर्पण के तल से परावर्तित होकर हमारी आँखों में पड़ती हैं जिससे हमें वस्तु की प्रकृति दिखाई देती है ।
  •  इस आकृति को वस्तु का प्रतिबिम्ब कहते हैं ।
 प्रतिबिम्ब दो प्रकार के होते हैं -
  •  वास्तविक प्रतिबिम्ब 
  •  आभासी प्रतिबिम्ब 
 वास्तविक प्रतिबिम्ब :
  • किसी बिन्दु से चलने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद जिस बिन्दु पर मिलती हैं , वह उस बिन्दु का वास्तविक प्रतिबिम्ब होता है।
आभासी प्रतिबिम्ब :
  •  एवं जिस बिन्दु से फैलती हुई प्रतीत होती है , वह उस बिन्दु का आभासी प्रतिबिम्ब होता है । 
  • आभासी प्रतिबिम्ब को पर्दे पर नहीं प्राप्त किया जा सकता है , जबकि वास्तविक प्रतिबिम्ब को पर्दो पर लिया जा सकता है । 
  •  वस्तु के प्रतिबिम्ब की लम्बाई तथा उस वस्तु की लम्बाई के अनुपात को प्रतिबिम्ब का रेखीय आवर्धन  ( Linear Magnification ) कहते हैं । 
  •  रेखीय आवर्धन= प्रतिबिम्ब की लम्बाई / वस्तु की लम्बाई

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