सरल आवर्त गति ( Simple Harmonic Motion )( Physics ) part - 5
सरल आवर्त गति ( Simple Harmonic Motion )
आवर्त गति Periodic motion -
- जब कोई पिंड एक निश्चित समयान्तराल में एक ही निश्चित पथ पर बार - बार अपनी गति को दोहराता है , तो उसकी गति को आवर्त गति कहते है ।
- किसी दोलन को एक दोलन पूरा करने में लगे समय को आवर्त काल कहते है।
- इसे T द्वारा निरूपित करते हैं ।
आवृत्ति frequency : -
- कंपन करने वाली वस्तु एक सेकेण्ड में अपनी गति को जितनी बार दोहराती है , वह उसकी आवृत्ति ( Frequency ) कहलाती है ।
- इसका SI मात्रक हर्ट्ज ( Hz ) होता है ।
सरल आवर्त गति : -
- यदि कोई वस्तु किसी एक सरल रेखा पर मध्यमान स्थिति ( Mean Position ) के दौरान इस प्रकार गति करे कि वस्तु का त्वरण विस्थापन के अनुक्रमानुपाती हो तथा त्वरण की दिशा मध्यमान स्थिति की ओर हो , तो उसकी गति सरल आवर्त गति कहलाती है ।
- जब कण अपनी साम्य स्थिति में रहता है तो उस पर लगने वाला बल शून्य होता है ।
प्रत्यायन बल :-
- जब कण को साम्य स्थिति से विस्थापित कर दिया जाता है तो उस पर लगने वाला बल सदैव साम्य स्थिति की ओर दिष्ट होता है , इस बल को प्रत्यायन बल कहते हैं।
- प्रत्यायन बल के कारण ही कण में त्वरण उत्पन्न होता है और वह दोलन करती है ।
- यदि किसी डोरी के निचले हिस्से में किसी गोल कण को लटकाकर डोरी को किसी दृढ़ आधार से लटका दें तो इस समायोजन को सरल लोलक कहते हैं ।
- लोलक को थोड़ा विस्थापित कर छोड़ने पर उत्पन्न हुई गति को सरल आवर्त गति कहते हैं ।
- लम्बाई बढ़ने पर आवर्तकाल बढ़ जाएगा एवं लम्बाई घटने पर आवर्तकाल घट जाएगा ।
- यही कारण है कि झूला - झूलते लड़की के खड़े हो जाने पर झूले का गुरुत्व केन्द्र ऊपर उठ जाएगा एवं उसकी प्रभावी लम्बाई घट जाएगी अर्थात झूला जल्दी - जल्दी दोलन करेगा ।
- पृथ्वी तल से नीचे या ऊपर जाने पर g का मान कम होता है
- यही कारण है कि लोलक घड़ी को पृथ्वी तल से ऊपर या नीचे ले जाने पर घड़ी का आवर्तकाल ( T ) बढ़ जाता है अर्थात घड़ी सुस्त हो जाती है । गर्मियों में लोलक की लम्बाई बढ़ जाने के कारण उसका आवर्तकाल भी बढ़ जाता है जिससे गर्मियों में लोलक घड़ी सुस्त हो जाती है ।
- सर्दियों में लोलक की लम्बाई भी कम हो जाता हैं।
- जिसके कारण लोलक घड़ी तेज चलने लगती हैं।
- भारहीनता की स्थिति के कारण लोलक घड़ी उपग्रह में काम नहीं कर पाती है ।
- चन्द्रमा पर g का मान पृथ्वी के g के मान के 1/6 गुना होने के कारण चन्द्रमा पर लोलक घड़ी का आवर्तकाल बढ़ जाता है ।


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