Solar panel क्या है,यह सोलर काम कैसे करता है?
Solar panel क्या है,जैसे की हमने AC वाले Post में जाना की फिजिक्स कहता है, की Energy को न तो Generate किया जा सकता है न ही Destroy किया जा सकता है इसे एक रूप से दूसरे रूप में convert किया जा सकता है, हमारा सोलर भी इसी पर वर्क करता है, वह कोई एनर्जी को उत्पन नहीं करता केवल सूरज की ऊर्जा को इलेक्ट्रिक ऊर्जा में बदलता है।
Solar Panel क्या है?
सौर पैनल जिन्हें फोटोवोल्टिक सेलों के रूप में भी जाना जाता है ,सौर पैनल का प्रयोग एक बड़े फोटोवोल्टिक प्रणाली में एक घटक के रूप में वाणिज्यिक और आवासीय अनुप्रयोगों के लिए बिजली प्रदान करने के लिए किया जाता है।
फोटोवोल्टिक सेलों एक ऐसी डिवाइस है जो Sunlight को विद्युत धारा में कन्वर्ट करती है| सोलर पैनल सोलर एनर्जी को absorb करता है और Direct current यानि DC दिष्ट धारा में बदलती है.
कैसे बना? History
1839 में, प्रकाश के संपर्क से विद्युत आवेश बनाने की कुछ सामग्रियों की क्षमता पहली बार अलेक्जेंड्रे-एडमंड बेकरेल ने देखी थी। हालांकि प्रीमियर सौर पैनल बहुत सरल इलेक्ट्रिक उपकरणों के लिए भी अक्षम थे, जिनका उपयोग उन्हें प्रकाश को मापने के लिए एक उपकरण के रूप में किया गया था। 1873 तक फिर से बिक्रेल द्वारा अवलोकन को दोहराया नहीं गया था, जब विलॉबी स्मिथ ने पाया कि चार्ज सेलेनियम की हल्की मार के कारण हो सकता है। इस खोज के बाद, विलियम ग्रिल्स एडम्स और रिचर्ड इवांस डे ने 1876 में स्मिथ के परिणामों को दोहराने के लिए किए गए प्रयोग का वर्णन करते हुए "सेलेनियम पर प्रकाश की क्रिया" प्रकाशित की।
1881 में, चार्ल्स फ्रिट्स ने पहला वाणिज्यिक सौर पैनल बनाया, जिसे फ्रिट्स ने "निरंतर, निरंतर और काफी बल के रूप में न केवल सूर्य के प्रकाश के संपर्क में, बल्कि मंद, विसरित दिन के प्रकाश के रूप में बताया था।" हालांकि, ये सौर पैनल। बहुत अक्षम, खासकर कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों की तुलना में। 1939 में, रसेल ओहल ने सौर सेल डिजाइन बनाया जो कई आधुनिक सौर पैनलों में उपयोग किया जाता है। उन्होंने 1941 में अपने डिजाइन का पेटेंट कराया। 1954 में, इस डिज़ाइन का उपयोग पहली बार बेल लैब्स द्वारा पहली व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य सिलिकॉन सौर सेल बनाने के लिए किया गया था।
1957 में, मोहम्मद एम। अटाला ने बेल लैब्स में थर्मल ऑक्सीकरण द्वारा सिलिकॉन सतह के पारित होने की प्रक्रिया विकसित की। सतह की पारित होने की प्रक्रिया तब से सौर सेल दक्षता के लिए महत्वपूर्ण है।
1957 में, मोहम्मद एम। अटाला ने बेल लैब्स में थर्मल ऑक्सीकरण द्वारा सिलिकॉन सतह के पारित होने की प्रक्रिया विकसित की। सतह की पारित होने की प्रक्रिया तब से सौर सेल दक्षता के लिए महत्वपूर्ण है।
सोलर पैनल कैसे काम करता है ?
Sunlight, जिसमें photon होता है Sunlight जब solar panel पर पड़ती है तब solar panel में लगे pvcell या photovoltaic cells sunlight में present photons को DC current के लिए electrons में बदल देते है एक solar panel में बहुत से pvcell होते है ये dc current वायर के थ्रू invertor तक पहुँचती है जो dc को Ac में बदल देता है जो हम use कर सकते है
जब सबसे पहला solar panel बना होगा बहुत बढ़ा बना hoga होगा जिसमें बहुत सारे Pv cell होंगे sun से आने बाली किरण जिनमें Solar energy या photon होते हैं यह photovoltaic cells पर पढ़ते ही Electron देते हैं यह Electron बहुत कम संख्या में होते थे
यदि हम सिंपल भाषा में बात करें तो मान लें सूरज से आने वाली Solar energy में 100 फोटोन है और यह Pv सेल पर पढ़ते 1 Electron देती थी यानि की efficiency बहुत कम होगी यदि हम वर्तमान की बात करें तो jyada badiya hai यहाँ तक कि एक फोटोन से एक से ज्यादा Electron लेना संभव हो रहा हैpv cell sunlight में से photon को absorb कर लेता है और electron release कर देता है
वास्तव में हर एक metal में अनंत free Electron होते है Solar energy में उपस्थित फोटोन जब इस पर बढ़ते यह फ़्री इलेक्ट्रॉन को motivate करते हैं जिससे इलेक्ट्रॉन घूमने लगते हैं और Electric energy generat होने का कारण बनते हैं
Pvcell- pvcell semiconductive material सिलिकॉन और इसमें की गयी doping से बने होते है pvcell में दो layer semiconductive material की होती है
- n type layer- silicon में phosphorous की doping की जाती है जब प्राप्त होता है
- p type layer-silicon में boron की doping की जाती है तब p प्राप्त होती है,
sun से आने वाली rays,ulteravoilet rays होती है और इन rays की की प्रकति electromagnatic radiation होती है photon, electromagnatic energy या radiation का एक बहुत ही छोटा हिस्सा quantum होता है जो की solar panel से electercity बनने का करण बनता है





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