पक्षियों को मिले दाना पानी: जिया गोयल, मनावर, धार, मप्र
विगत कुछ वर्षों से पक्षियों की संख्याएं लगातार कम होती जा रही हैं जिसका मुख्य कारण कांक्रीट की बहुमंजिला इमारते हैं जिसमें की पक्षियों को रहने के लिए पहले की तरह जगह नहीं मिलना और कांक्रीट की पक्की सड़कें हैं जहां उनके लिए दाना-पानी मिलना भी दुर्गम हैं। साथ ही मोबाइल टावरों की बढ़ती संख्या भी इनकी कमी का मुख्य कारण हैं की क्योंकि मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगें भी इनकी जान की दुश्मन हैं। यही कारण हैं की एशिया और यूरोप की घरेलु चिड़िया गौरेया (पासर डोमेस्टिकस) की संख्या लगातार कम होती जा रही हैं और यह विलुप्ति की कगार पर हैं। गौरैया चिड़िया को बीज काफी पसंद हैं जो अब उसे शहरीकरण के कारण नहीं मिल पा रहे हैं। गौरैया के साथ ही सभी पक्षियों के लिए प्रदुषण और उच्च तापमान भी जानलेवा हैं। यदि हम गौरैया और अन्य पक्षियों को विलुप्त होने से बचाना चाहते हैं तो हमें उनके लिए दाना-पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। हमें अपने घर के बाहर इनके लिए पानी से भरा बर्तन और दाना रखना होंगा साथ ही हम घर के बाहर कम से कम एक वृक्ष भी लगाएं जिसमें की पक्षी अपना घोंसला बना कर वहां रह सके।


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