गांधी जी का चरित्र चित्रण

आलोक - वृत्त ( गुलाब खंडेलवाल)

 ‘आलोक वृत्त ’ खंडकाव्य की रचना कविवर गुलाब खंडेलवाल द्वारा की गई है। इस खंडकाव्य की कथा युगपुरुष महात्मा गांधी के जीवन पर आधारित है। इस खंडकाव्य की कथावस्तु निम्नलिखित है

प्रथम सर्ग: भारत का स्वर्णिम अतीत



1869 ई. में महात्मा  गांधी का जन्म पोरबंदर नामक स्थान पर  हुआ था। गांधीजी का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि समस्त दानवी एवं पार्श्विक शक्तियां भी उनके सामने टिक न सकी। ब्रिटिश शासन भयभीत हो गया। गांधी जी ने अपने साहस और शक्ति से शासन के क्रूर अत्याचारों और धनात्मक कार्यों से पीड़ित जनता को शक्ति प्रदान की लिस्ट आफ गांधीजी के रूप में भारतीय जनता को नया जीवन स्त्रोत मिला।

द्वितीय सर्ग: गांधीजी का प्रारंभिक जीवन

 युवा होने  पर गांधी जी का विवाह कस्तूरबा के साथ हो गया। कुछ समय बाद ही उनके पिता का स्वर्गवास हो गया।  पिता की मृत्यु के समय गांधी जी उनके पास नहीं थे फिर उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए वह इंग्लैंड चले गए। गांधीजी की माता जी को यह डर सता रहा था कि उनका पुत्र विदेश में जाकर मांस-मदिरा का सेवन न करने लगे। अतः विदेश जाने से पहले उन्होंने अपने पुत्र से वचन लिया  
मांध्य-मांस-मदिराक्षी से बचने की शपथ दिलाकर माँ ने तो दी विदा पुत्र को मंगल तिलक लगाकर।’’ अपनी शिक्षा समाप्त कर जब गांधीजी स्वदेश लौटे तो उन्हें ज्ञात हुआ कि उनकी माताजी उन्हें छोड़कर स्वर्ग सिधार गई हैं यह सुनकर उन्हें अत्यधिक कष्ट हुआ।

 तृतीय सर्ग गांधीजी का अफ्रीका प्रवास

 दक्षिण अफ्रीका में एक बार गांधीजी रेल में प्रथम श्रेणी में यात्रा कर रहे थे। एक गोरी ने उन्हें अपमानित करके गाड़ी से नीचे उतार दिया पुलिस ने रंगभेद की इस नीति को देखकर वह बहुत दुखी हुए फुलस्टॉप वह शांत भाव से एकांत में बैठे ठिठुरते रहे। ए वे वहां बैठे-बैठे भारतीयों की दुर्दशा पर चिंतित चिंतन करने लगे उन्होंने अपनी जन्मभूमि से दूर विदेश की भूमि पर बैठकर मानवता के उद्धार का संकल्प लिया सत्य और अहिंसा के इस मार्ग को उन्होंने सत्य सत्याग्रह का नाम दिया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में सैकड़ों सत्याग्रह का नेतृत्व किया और संघर्ष में विजय प्राप्त की। 

चतुर्थ सर्ग गांधी जी का भारत आगमन

 गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आए। भारत आकर उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता प्राप्त करने हेतु जागृत किया। डॉ राजेंद्र प्रसाद जवाहरलाल नेहरू सरदार वल्लभभाई पटेल विनोबा भावे सरोजनी नायडू सुभाष चंद्र बोस मदन मोहन मालवीय आदि अनेक प्रमुख देश प्रेमी उनके अनुयाई बन गए। गांधी जी के आवाहन पर देश के महान नेता एकजुट होकर सत्याग्रह की तैयारी में जुट गए। गांधी जी ने चंपारण में नील की खेती को लेकर आंदोलन प्रारंभ किया जिसमें वह सफल रहे। उनके भाषण सुनकर विदेशी सरकार विषम स्थिति में पड़ जाती थी। इस आंदोलन में सरदार वल्लभ भाई पटेल का व्यक्तित्व अच्छी तरह निखर कर सामने आया। 

   पंचम: सर्ग असहयोग आंदोलन

 गांधी जी के नेतृत्व में स्वाधीनता आंदोलन निरंतर बढ़ता गया। अंग्रेजों की दमन नीति भी बढ़ती गई। गांधी जी के ओजस्वी भाषण ने भारतीयों में नई स्फूर्ति भर्ती लेकिन अंग्रेजों की फूट डालो और शासन करो की नीति ने यत्र तत्र संप्रदायिक दंगे करवा दिए। गांधी जी को बंदी बना लिया गया पोस्ट ऑफिस जेल में गांधीजी अवश्य और स्वस्थ हो गए स्टॉप पता उन्हें छोड़ दिया गया स्टॉप जेल से आकर गांधीजी हरीश जनों द्वारा हिंदू मुस्लिम एकता शराब मुक्ति खादी प्रचार आदि के रचनात्मक कार्यों में लग गए हिंदू मुस्लिम एकता के लिए गांधीजी ने 21 दिनों का उपवास रखा। 
आत्मा शुद्धि का यज्ञ कठिन यह पूरा होने को जब आया बापू ने 21 दिनों के अनशन का संकल्प सुनाया। 
   
   षष्टम सर्ग: नमक सत्याग्रह

 अंग्रेजी के द्वारा लगाए गए नमक कानून को तोड़ने के लिए गांधीजी ने समुद्र तट पर बसी दांडी नामक स्थान तक की पैदल यात्रा 24 दिनों में पूरी की। नमक आंदोलन में हजारों लोगों को बंदी बनाया गया पोस्ट तत्पश्चात अंग्रेज शासकों ने गोलमेज सम्मेलन बुलाया जिसमें गांधी जी को बुलाया गया। इस कान्फ्रेंस के साथ-साथ कवि ने वर्ष 1937 के प्रांतीय स्वराज्य की स्थापना संबंधी कार्य कल आप का सुंदर वर्णन किया है।

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