जानिए कर्म का प्रभाव के बारे में आचार्य चाणक्य जी ने कही हैं ऐ बातें।
चाणक्य कर्म -फल के प्रभाव के बारें में कहते हैं कि प्राणी जो कर्म करता हैं और स्वयं उसका फल भोगता हैं। स्वयं संसार में भटकता हैं और स्वयं इससे मुक्त हो जाता हैं। इन सबका सामना प्राणी को स्वयं करना पड़ता हैं। जब कभी जाकर उसे ज्ञान होता हैं तो स्वयं ही इस जन्म मरण के चक्कर से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता हैं।

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