थोड़ी सी समझ थोडा़ सा समझौता,थोड़ा सा सम्मान...

हर तरफ शोर है तेरे आने का ऐ फरवरी ,ईश्क़ -ए- मोहब्बत ने तुझे भी मशहूर कर दिया...दोस्त जरा अपना ख्याल रखना सुना है,इश्क इसी मौसम में शिकार करता है...दोस्त दौर काग़ज़ी था जब देर तक ख़तों में जज़्बात महफ़ूज़ रहते थे,अब मशीनी दौर है उम्र भर की यादें ऊँगली से ही ङिलीट हो जाती हैं...उम्र चाहे जो भी हो मनचाहे रिश्ते अपने आप हम उम्र हो जाते हैं न दोस्त...यकीनन खोया है मैंने खुद को एक तुम्हें पाने में,वरना वजूद अपना मुझे यूँ अजनबी ना लगता दोस्त...हुस्न की मल्लिका हो या सांवली सी सूरत,इश्क अगर रूह से है तो हर चेहरा कमाल लगता हैं न दोस्त... special line friend...उसने कहा- बेवजह ही ख़ुश हो क्यों? मैंने कहा- हर वक्त दुखी भी क्यों रहूँ?,उसने कहा- जीवन में बहुत ग़म है मैंने कहा -गौर से देख ख़ुशियाँ भी कहाँ कम हैं?दोस्त...क्या जरुरी है हर मोहब्बत मुक्कमल हो दोस्त, कुछ सफर तो मंजिल से भी खूबसूरत होते है न...दोस्त अपनी कलम से लिखूं तो लफ्ज़ हो तुम,अपने दिमाग से सोच लूँ वो खयाल हो तुम...बड़ी अजीब सी मोहब्बत थी तुम्हारी...पहले पागल किया...फिर पागल कहा...अंत में पागल समझ कर पगले को छोड़ दिया दोस्त...नाज़ है मुझे मेरे मोहब्बत पर दोस्त,तेरी नफरतों की अकेला वारिस जो हुं मैं...सिमट जाती हैं तमन्नायें तहजीब के दायरे में अक्सर,वरना इश्क अरमाँ और ख़्वाहिशें कब बेजुबाँ होती हैं दोस्त... दोस्त थोड़ी सी समझ थोडा़ सा समझौता,थोड़ा सा सम्मान और थोडी सी स्नेह रिश्तों का जुड़ाव होते हैं...लफ्ज 'साढ़े' तीन ही थे,कभी 'प्यार' बन गए तो कभी 'ख्वाब' दोस्त...मत करना किसी के गुलाब आज कुबूल ऐ दोस्t,है कसम अपनी है मोहब्बत की तमाम उम्र चुभते हैं काटें इसके...तुम पढ़ते हो इसलिए लिख देता हूँ...वरना मैं तो मेहसूस कर के भी तेरी आहट को छु सकता हूँ दोस्त... राज

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