तड़प है, कसक है, खलिश है Love...

बेचैनियाँ रूह की और बेकरारियाँ दिल की... दोस्त जीवन में जो सबक खाली पेट,खाली जेब,बुरा वक़्त और टूट हुआ दिल सिखाता है,वो कोई स्कूल या यूनिवर्सिटी नही सिखाती...क्या दुश्मनी थी हमारी जो तूने मेरी हस्ती खेलती आंखे नम कर दी,हमे तो जन्न्त बनाना था जिंदगी अपनी पर दोस्त तूने क्यों मरी जिंदगी जहन्नम कर दी...कुछ नही चाहा तुमसे तुम्हारे सिवा इस राज ने, उसके वावजुद भी तूने ही न जाने क्यों मेरे फीलिंग से खिलवाड़ kiya दोस्त...ये सितम, ऐ बेरहमी, बेपरवाह, बेकदर येसब कँहा से सीखा दोस्त, इन सब शब्दों को हमने अपने लव स्टोरी में नही लिखी थी दोस्त...जब नासमझ थे तो ख्वाब मुठ्ठी में बंद थे,समझ आयी तो ख्वाबों ने हमें मुठ्ठी में बंद कर दिया दोस्त...सच्ची मित्रता उत्तम सवास्थ के सामान है,उसका महत्त्व तभी जान पाते है जब हम उसे खो देते है दोस्त...बुलंदियां ख़ुद ही तलाश लेंगी तेरे राज को,क्योंकि अभी भी दर्द औऱ मुश्किलों में मुस्कुराने की आदत बरकरार है...क्या रूबरू करूँ मैं अपनी आरजू और तमन्नाऐ तम्माम होने की, जिसनी ने भी की,लाजबाब ही नही दोस्त बेहतरी तरीके से की...जलवे तो बेपनाह थे इस कायनात में दोस्त,ये बात और है कि नजर तुम पर ही ठहर गई...फ़िज़ा में महकती शाम हो तुम,प्यार में झलकता जाम हो तुम,सीने में छुपाये फिरते हैं चाहत तुम्हारी,तभी तो मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम दोस्त...आँसूं तब नहीं आते जब आप किसीको खो देते हो,आँसूं तब आते है दोस्त जब खुद को खोकर भी किसीको पा नहीं सकते...आकर्षण तो कही भी हो सकता है,पर समर्पण कही - एक ही जगह होता है दोस्त...हर दर्द की दवा है इस जमाने में दोस्त बस...किसी के पास कीमत नहीं तो किसी के पास किस्मत ही नहीं है...एक ये भी खासियत है जिंदगी की,कर्ज वो भी चुकाने पड़ते हैं दोस्त जो कभी लिए ही नहीं...मेरे लिए संबंध का एक अर्थ है...भरोसा,अपनापन और ईमानदारी भांड में जाय दुनियादारी दोस्त...ज़ाहिर हो जाए वो दर्द कैसा, और जो ख़ामोशी ना पढ़ पाए दोस्त वो हमदर्द कैसा...हसरतों के सिक्के लिए उजाले ख़रीदने हम कभी निकले थे, तबाह तो हम मोहब्बत के बेवफाई की गलियों में हो गये दोस्त...क्या छेड़ूँ किस्सा उस उल्फत का वो बड़ी लम्बी कहानी है,मैं ज़िन्दगी से नहीं हारा किसी अपने की मेहरबानी है दोस्त...मै अलग हूँ ये ज़ाहिर है ,तू जुदा है ये कभी नही हो सकता दोस्त...किस बात की सजा दिया तुमने प्यार में,प्यार किया इसलिए या फिर तुमसे ज्यादा किया इसलिए दोस्त...वो रिश्ता ही क्या जिसे निभाना पडे,वो प्यार ही क्या जिसे जताना पडे,प्यार तो एक खामोश एहसास है,वो एहसास ही क्या जिसको लफ्जों मे बताना पडे...नाराज़गी भी एक खूबसूरत रिश्ता है जिससे भी होती है,वह व्यक्ति दिल और दिमाग दोनों में रहता है...लम्हे लम्हे मैं बसी है तुम्हारी यादों की महक,यह बात और हैं मेरी नज़रों से दूर हो तुम दोस्त...बेचैनियाँ रूह की और बेकरारियाँ दिल की,शायद यही शौगात ए मोहब्बत होती है दोस्त...तड़प है, कसक है, खलिश है और सजा है,कौन कमबख्त कहता है कि इश्क़ बे-मजा है दोस्त...शायरी खुदखूशी का धंधा है,अपनी ही लाश अपना ही कंधा hi,आईना बेचता फिरता है,शायर उस शहर में जो शहर ही अंधा हैं दोस्त...राज

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