घर के जल में ही गंगा जल मिलाकर मना सकते है गंगा दशमी

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आज गंगा दशमी, दशहरा है। गंगा दशमी ज्येष्ठ शुक्ल की दशमी तिथि को आज 20 जून, 2021 को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर आईं थीं। गंगा दशहरा का बहुत अधिक महत्व होता है। गंगा को सलीम खान की एक याचिका पर चार बरस पहले कोर्ट ने भी जीवित प्राणी माना है। मां गंगा की पूजा- अर्चना करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। धर्मशास्त्र के अनुसार इस दिन गंगा-स्नान करना चाहिए। गंगा सुलभ न हो तो घर पर ही गंगाजल मिश्रित जल से नहाना चाहिए एवं गंगाजल का पान करना चाहिए। 


असाधारण धार्मिक महत्त्व के साथ भारत की सबसे बड़ी नदी गंगा है। गंगोत्री से अवतरित पावन गंगा आज दिन-प्रतिदिन मैली होती जा रही है। आज यह दुनिया की छठी सबसे प्रदूषित नदी मानी जाती है। केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार गंगा का पानी तो प्रदूषित हो ही रहा है किन्तु अब इसका बहाव भी कम होता जा रहा है। गंगा नदी में ऑक्सीजन की मात्रा भी सामान्य से कम हो गई है।वैज्ञानिकों का मन्ना हैं कि गंगा के जल में बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्म जीवों को समाप्त कर देते हैं। किन्तु प्रदूषण के चलते इन लाभदायक विषाणुओं की संख्या में भी काफी कमी आई है। इसके अतिरिक्त गंगा को निर्मल व स्वच्छ बनाने में सक्रिय भूमिका अदा करने वाले कछुए, मछलियाँ एवं अन्य जलीय जीव भी संकट में है।


गंगा ही नहीं हर नदियां सदैव ही जीवनदायिनी है। नदियाँ अपने साथ बारिश का जल एकत्रित उसे भू-भाग में पहुचती हैं। यह विडंबना ही है कि हमारी आस्था की पवित्र और संस्कृति से जुड़ी नदियां प्रदूषित हो रही हैं। हमें नदियों के प्रति प्रचित काल से चले आ रहे  सम्मान का भाव बनाए रखना होगा जिससे की  हम इनकी स्वच्छता और पवित्रता को चिरकाल तक बनाए रख सकें। 

ऐसा कहा जाता है कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के जहाज अपनी यात्रा के दौरान पीने के लिए गंगाजल अपने साथ रखते थे जो उनके इंग्लैंड पहुँचने पर भी खराब नहीं होता था। यात्रा के बाद बचे हुए जल को भी वह फेंकते नहीं थे बल्कि वे लोग उस जल को अपने घर ले जाते थे तथा वह पानी पीने में उपयोग करते थे। इसी तरह ब्रिटिश सेना भी युद्ध के समय गंगाजल अपने साथ रखती थी जिससे कि घायल सिपाही के घाव को धोया जाता था। इससे घाव में इन्फेक्शन नहीं होता था। गंगा जल को आज भी हिंदू लोग अपने घरों में रखते हैं। 


इस तरह हम नदियों का जल घर पर लाकर उपयोग कर सकते है जिससे कि नदियों पर नहाने पर होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके. हम इस तरह के विशेष दिन में जिसका दिवस है उस नदी का जल अपने नहाने के पानी में मिलाकर नहा सकते है. इस तरह से हम नदियों को प्रदूषित होने से बचा सके। किन्तु फैक्ट्रियों या उद्योगों की गंदगी या अन्य कारणों से नदियों में प्रदूषण फैलने से रोकने के लिए शायद ही हम कुछ कर सके।

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