उदासी के सब शेड पहचाने हुए हैं

आख़िर क्यूँ है कि कुछ फ़िल्में देख कर आह तक नहीं निकलती लेकिन कुछ फ़िल्में हमें बेध देती हैं। हमारे भीतर एक सिसकी  ड्रिल होती जाती है। एक रिसता हुआ दुःख जिनमें शायद हमारे जैसे लोग पनप सकते हैं। कि हमने धान की खेती देखी है। घुटने भर पानी भरे खेतों में उगे और उखाड़ कर फिर से लगाते हुए धान के बिचड़े देखे हैं। जो गीत खेतिहर औरतों ने नहीं गाए, वे गीत हमारी चुप्पी की शब्दावली रचते हैं। 

हैपी टुगेदर नाम की फ़िल्म में ख़ुशी के बहुत छोटे छोटे टुकड़े हैं। प्रेम का भोला पागलपन है। एक प्रेमी युगल आर्जेंटीना घूमने गए हैं, वहाँ एक लैम्प पर बहते झरने की तस्वीर है जिसके व्यू पोईंट पर एक युगल खड़ा है। वे उस झरने को जा कर देखना चाहते हैं। वे साथ में प्रेम में तो हैं लेकिन ख़ुश नहीं हैं। कभी कभी वे ख़ुश हैं लेकिन प्रेम में नहीं हैं। उनमें से एक झरने पर जब जाता है तो उसे लगता है वहाँ उन दोनों को होना चाहिए था। और कभी कभी  वे ख़ुश हैं, सिर्फ़ इसलिए कि वे साथ में हैं।


कुछ दृश्यों का एक पैटर्न वौंग कार वाई की कई फ़िल्मों में होता है। टैक्सी वाला सीन। बालकनी से नीचे दिखता दृश्य। और अकेला सिगरेट पीता हुआ आदमी। 


हर बार वे रिश्ता तोड़ते और एक कहता, हम फिर से शुरू करते हैं। एक वक़्त के बाद, दूसरा इस शुरुआत से उकता गया होता है। वो अब लौट कर हॉंकांग जाना चाहता है, अपने घर। ऐसे ही बोर होने के बाद रिश्ता तोड़ कर एक जा चुका है और बहुत दिन बाद फिर लौट कर आया है। उसके के दोनों हथेलियों पर प्लास्टर है। वे दोनों जब टैक्सी में बैठे होते हैं तो एक सिगरेट पी रहा होता है और दूसरे के होठों पर भी लगा रहा होता है क्यूँकि वो ख़ुद सिगरेट पकड़ नहीं सकता। उसके चेहरे पर विरक्ति है। दुःख के लूप में जीने का भय है। ख़ुशी का अंदेशा है। पीली रोशनी में टोनी के चेहरे पर आते जाते भावों में लय है। वह कितना कुछ  अपने चेहरे पर दर्शा सकते हैं, यह अपने आप में कविता है।   


उसका एक मित्र उसे एक वॉकमैन देता है कि मेरे लिए कुछ रेकर्ड कर दो। भले कोई उदास बात सही। मैं तुम्हारी उदासी को दुनिया के आख़िरी छोर पर बने लाइटहाउस में छोड़ आऊँगा। शोर-शराबे वाले उस बार में वह लड़का वॉकमैन पकड़े धीमे धीमे रोने लगता है। हम इन मूड फ़ॉर लव में ऐसा ही एक दृश्य देखते हैं जिसमें अपना दुःख, अपना राज़, अपना प्रेमसब एक पेड़ की खोह में कह रहा होता है। इस दृश्य से बिलकुल उसी दृश्य की याद आती है। ऐसी चुप्पी वाला रोना लेकिन इसे सब लोग समझ नहीं सकते। वो लड़का जो बचपन में कम देख सकता था, इसलिए ज़्यादा सुनता था। वो जब वॉकमैन को प्ले करता है तो उसे लगता है रिकॉर्डर ख़राब हो गया था और उसमें किसी के रोने जैसी  आवाज़ आती है। 


फ़िल्म ब्लैक ऐंड वाइट और कलर के बीच घटती है। कल इसे पहली बार देखा। अभी कुछ और बार  देखूँगी बेहतर समझने के लिए। कुछ दृश्य बार-बार देखने लायक़ हैं। इसमें एक में उसने सिगरेट माँगी है। फिर लाइटर। लाइटर नहीं है, सिगरेट से सिगरेट जलानी है। वो मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़ता है जिसमें सिगरेट थमी है। उसकी अनिच्छा और ग़ुस्से के बीच धुआँ है। एक उलझा हुआ रिश्ता है। अजीब सी  तन्हाई है। ख़ुशी और उदासी को साथ गूँथती हुयी धुनें हैं। जीने का सामान है। नेस्तनाबूद हो जाने  का भी। 

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