समुद्र में लगातार बढ़ रही है कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा


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वातावरण में बढ़ी हुई कार्बन डाइ ऑक्साइड महासागरों में अवशोषित होकर गहरे समुद्रों में जमा हो जाती है, जो 100 से 1,000s वर्षों के समय तक रहती है। दक्षिणी महासागर कार्बन डाइ ऑक्साइड को वायुमंडल से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नेचर क्लाइमेट चेंज पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन पश्चिमी अंटार्कटिक प्रायद्वीप से दक्षिणी महासागर की कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने की क्षमता को बदल रहा है, जिसके कारण जलवायु परिवर्तन लंबे समय तक बढ़ सकता है।

कार्बन डाई ऑक्साइड और दूसरे खतरनाक अपशिष्टों को महासागर आसानी से अपने में सम्मिलित कर लेते हैं। परन्तु अब इनका अस्तित्व खतरे में हो गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछली दो शताब्दियों में 525 अरब टन कचरा महासागरों में गया है। इसके अलावा मानवीय गतिविधियों के कारण निकले कार्बन डाई ऑक्साइड का करीब आधा हिस्सा भी समुद्र में समा गया। वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण अंटार्कटिक के चारों ओर फैले दक्षिणी महासागर में कार्बन डाइ ऑक्साइड सोंखने की क्षमता पर गहरा संकट मंडरा रहा है। जिससे की पर्यावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने का खतरा बढ़ता जा रहा है। दक्षिणी महासागर कार्बन डाइ ऑक्साइड से पूरी तरह भर गया है। अब इसमें इतनी कार्बन डाइ ऑक्साइड आ गई है कि सागर इसे सोंखने की बजाए यह वापस वातावरण में छोड़ रहा है। अगर इसे रोका नहीं गया तो दुनिया का तापमान तेजी से बढ़ेगा। यदि हम वैज्ञानिकों की चेतावनी पर भरोसा करें तो आने वाला समय मानव ही नहीं बल्कि समस्त जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न होगा।

-सुदर्शन सोलंकी, विज्ञान लेखक एवं ब्लॉगर

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