Class-6 (रुचिरा) चतुर्दशः पाठः - अहह आः च /NCERT book/CBSE Syllabus
चतुर्दशः पाठः
अहह आः च
शब्दार्थाः
| लीनः | संलग्न, तल्लीन | engaged |
| वाञ्छति | चाहता है/ चाहती है | wishes/wants |
| को Sपि (कः + अपि) | कोई भी | whosoever |
| आनय | लाओ | bring |
| अहह | कष्टसूचक अव्यय | oh! |
| आः | पीड़ासूचक अव्यय | ah! |
| आनेतुम् | लाने के लिए | to bring |
| निर्गच्छति | निकलता है | comes out/ exist/ |
| इतस्ततः (इतः + ततः ) | इधर उधर | here and there |
| धराम् | पृथ्वी को | the earth |
| प्राप्स्यति | पाएगा | will receive |
| व्यथाम् | दुःख को | pain |
| सद्यः | तत्काल, तुरंत | instantly |
| अपर्य | दे दो | give |
| उद्घाटयति | खोलता है | open |
| दशति | डसती है, काटती है | bite |
| अत्युच्चैः(अति+ उच्चैः) | बहुत जोर से | very loudly |
| चीत्करोति | चिल्लाता है | cries |
अभ्यासः
1- अधोलिखितानां पदानां समुचितान् अर्थान् मेलयत्-
| क | ख |
| हस्ते | अकस्मात् |
| सद्यः | पृथ्वीम् |
| सहसा | गगनम् |
| धनम् | शीघ्रम् |
| आकाशम् | करे |
| धराम् | द्रविणम् |
.
| क | ख |
| हस्ते | करे |
| सद्यः | शीघ्रम् |
| सहसा | अकस्मात् |
| धनम् | द्रविणम् |
| आकाशम् | गगनम् |
| धराम् | पृथ्वीम् |
2-मञ्जूषातः उचितं विलोमपदं चित्वा लिखत-
| प्रविषति, सेवकः, मूर्खः, नेतुम्, नीचैः, दुःखितः |
क- चतुरः - मूर्खः
ख- आनेतुम् - नेतुम्
ग- निर्गच्छति - प्रविषति
घ- स्वामी - सेवकः
ड- प्रसन्नः - दुःखितः
च- उच्चैः - नीचैः
3- मञ्जूषातः उचितम् अव्ययपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
| इव, अपि, एव, च, उच्चैः |
क- बालकाः बालिकाः चक्रीड़ाक्षेत्रे क्रीड़न्ति।
ख- मेघाः उच्चैःगर्जन्ति।
ग- बकः हंसः इवश्वेतः भवति।
घ- सत्यम् एवजयते।
ड- अहं पठामि, त्वम् अपि पठ।
4- अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तरं लिखत-
क- अजीजः गृहं गन्तुं किं वाञ्छति?
उत्तर- अजीजः गृहं गन्तुं अवकाशं वाञ्छति।
ख- स्वामी मूर्खः आसीत् चतुरः वा?
उत्तर- स्वामी चतुरः आसीत्।
ग- अजीजः कां व्यथां श्रावयति?
उत्तर- अजीजः वृद्धां व्यथां श्रावयति।
घ-अन्या मक्षिका कुत्र दशति?
उत्तर- अन्या मक्षिका ललाटे दशति।
ड- स्वामी अजीजाय किं दातुं न इच्छति?
उत्तर- स्वामी अजीजाय धनं दातुं न इच्छति।
5- निर्देशानुसार लकारपरिवर्तनं कुरूत-
यथा- अजीजः परिश्रमी आसीत्।
लट्लकारे - अजीजः परिश्रमी अस्ति।
क- अहं शिक्षकाय धनं ददामि।
लट्लकारे - अहं शिक्षकाय धनं दास्यामि।
ख- परिश्रमी जनः धनं प्राप्स्यति।
लट्लकारे - परिश्रमी जनः धनं प्राप्नोति।
ग- स्वामी उच्चैः वदति।
लड.गलकारे- स्वामी उच्चै अवदत्।
घ- अजीजः पेटिकां गृह्णाति।
लृटलकारे - अजीजः पेटिकां ग्रहीष्यति।
ड- त्वम् उच्चैः पठसि।
लोट्लकारे- त्वम् उच्चैः पठ।
6- अधोलिखितानि वाक्यानि घटनाक्रमानुसारं लिखत।
क- स्वामी अजीजाय अवकाषस्य पूर्ण धनं ददाति।
ख- अजीजः सरलः परिश्रमी च आसीत्।
ग- अजीजः पेटिकाम् आनयति।
घ- एकदा सः बृहं गन्तुम् अवकाषं वा´छति।
ड- पीड़ितः स्वामी अत्युच्चैः चीत्करोति।
च‘ मक्षिके स्वामिनं दषतः।
उत्तर- 1-अजीजः सरलः परिश्रमी च आसीत्।
2- एकदा सः बृहं गन्तुम् अवकाषं वा´छति।
3- अजीजः पेटिकाम् आनयति।
4- मक्षिके स्वामिनं दशतः।
5- पीड़ितः स्वामी अत्युच्चैः चीत्करोति।
6- स्वामी अजीजाय अवकाशस्य पूर्ण धनं ददाति।
I would like to thank Mrs. Manju Gautam for contributing all the chapters of Ruchira part-1 on this blog

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