Class-6 (रुचिरा) पञ्चदशः पाठः मातुलचन्द्रः!! /NCERT book/CBSE Syllabus
पञ्चदशः पाठः
मातुलचन्द्रः!!
शब्दार्थाः
| मातुलचन्द्र! | चन्दामामा! | Uncle (Maternal) Moon |
| कुतः(अव्यय) | कहाँ से | From where |
| अतिशयविस्तृतः | अति विशाल | Very stretched, extended |
| दृश्यते | दिखता है/ दिखती है | It looks |
| क्वचित् (अव्यय) | कहीं भी | anywhere |
| प्रायास्यसि | जाओगे/जाओगी | will go |
| गेहम् | घर को | home |
| किरसि | बिखेरते हो/ बिखेरती हो | scatter |
| धवलम् | सफेद वस्त्र | white |
| चन्द्रिकावितानम् | फैली हुई चाँदनी | extensive moonlight |
| तारकखचितं | तारों से शोभित | adorned with stars |
| सितपरिधानम् | सफेद वस्त्र | white clothes |
| मह्यम् | मुझे | to me |
| त्वरितम् | शीघ्र | fast, as soon as |
| एहि | आओ | come |
| श्रावय | सुनाओ | make me listen |
| वर्धय | बढ़ाओ | increase |
अभ्यासः
1- बालगीतं साभिनयं सरस्वरं गायत।
2- पद्यांशान् योजयत-
| मातुल! किरसि | सितपरिधानम् |
| तारकखचितं | श्रावय गीतिम् |
| त्वरितमेह मां | चन्द्रिकावितानम् |
| अतिशयविस्तृत | कथं न स्नेहम् |
| धवलं तव | नीलाकाशः |
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| मातुल! किरसि | कथं न स्नेहम् |
| तारकखचितं | सितपरिधानम् |
| त्वरितमेह मां | श्रावय गीतिम् |
| अतिशयविस्तृत | नीलाकाशः |
| धवलं तव | चन्द्रिकावितानम् |
3- पद्यांशेषु रिक्तस्थानानि पूरयत-
क- प्रिय मातुल! वर्धय में प्रीतिम्।
ख- कथं प्रयास्यसि मातुलचन्द्र।
ग- नैव दृष्यते क्वचिदवकाशः।
घ- मह्यम् दास्यसि मातुलचन्द्र!।
ड- कथमायासि न भो! मम गेहम्।
4- प्रशनाम् उत्तराणि लिखत-
क- अस्मिन् पाठे कः मातुलः?
उत्तर- अस्मिन् पाठे चंद्रः मातुलः।
ख- नीलाकाशः कीदृषः अस्ति?
उत्तर- नीलाकाशः अतिशय विस्तृतः अस्ति।
ग- मातुलचन्द्रः किं न किरति?
उत्तर- मातुलचंद्रः स्नेहं न किरति।
घ- किं श्रावयितुं शिशुः चन्द्रं कथयति?
उत्तर- गीतिम् श्रावयिंतु शिशुः चन्द्रं कथयति।
ड- चन्द्रस्य सितपरिधानं कथम् अस्ति?
उत्तर- चन्द्रस्य सितपरिधानं तारकखचितं अस्ति।
5- उदाहरणानुसारं अधोलिखितपदानि सम्बोधने परिवर्तयत-
यथा - चन्द्रः - चन्द्र!
क- शिष्यः - शिष्य!
ख- गोपालः - गोपाल!
यथा- बालिका - बालिके!
क- प्रियंवदा - प्रियवंदे!
ख- लता - लते!
यथा- फलम् - फल!
क- मित्रम् - मित्र!
ख- पुस्तकम् - पुस्तक!
यथा- रविः - रवे!
क- मुनिः - मुने!
ख- कविः - कवे!
यथा- साधुः- साधो!
क- भानुः - भानो!
ख- पशुः – पशो!
यथा- नदी - नदि!
क- देवी - देवि!
ख- मानिनी - मानिनि!
6- मञ्जूषातः उपयुक्तानाम् अव्ययपदानां प्रयोगेण रिक्तस्थानानि पूरयत-
| कुतः, कदा, कुत्र, कथं, किम् |
क- जगन्नाथपुरी कुत्र अस्ति?
ख- त्वं कदा पुरीं गमिष्यसि?
ग- गड.गानदी कुतः प्रवहति?
घ- तव स्वास्थ्यं कथं अस्ति?
ड- वर्षाकाले मयूराः किम् कुर्वन्ति?
7- तत्समशब्दान् लिखत-
मामा - मातुल
मोर - मयूरः
तारा - तारक
कोयल - पिकः, कोकिला
कबूतर - कपोत
I would like to thank Mrs. Manju Gautam for contributing all the chapters of Ruchira part-1 on this blog

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