Greenvale Ki Sachi Ghatna: भूतिया बस्ती ग्रीनवेल की सच्ची घटना


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Greenvale Ki Sachi Ghatna: Bhootiya Basti
ग्रीनवेल की सच्ची घटना: भूतिया बस्ती


"हैल्प मी...प्लीज हैल्प।"


एक जोरदार दर्द भरी पुकार गूंजते ही सारे हाल में एकबारगी खामोशी छा गयी। क्षणिक भयानक खामोशी के साथ सबकी गर्दन उस भयंकर चीख की दिशा में घूम गयीं।


देखते ही उन सब में से कई की चीखें निकल पड़ी और अचानक वहां चीख-पुकार के साथ भगदड़ मच गयी। हर किसी को हॉल से बाहर पहले निकलने की हड़बड़ी थी।


यह एक चर्च था। जिसमें बस्ती के सभी लोग एकत्र थे और फादर विलियम उपदेश दे रहे थे। सब सिर झुकाये ध्यान से सुन रहे थे कि कोने में बैठी लूसी की भयानक चीख ने सबको हिलाकर रख दिया। उसके हाथ अपनी गर्दन पर थे और ऐसा लग रहा था कि मानो वह किसी से अपनी गर्दन छुड़ाने का यत्न कर रही हो। उसकी आंखें बड़ी बुरी तरह फटी पड़ रही थीं। लगता था कि आंखें अभी के अभी बाहर गिर पड़ेंगी।

उसकी दशा देखकर वहां मौजूद स्त्री-पुरुषों के रोंगटे खड़े हो गये। एक-दो ने साहस कर उसकी गर्दन से उसके हाथ हटाने का प्रयास किया तो वह इस प्रकार दूर जा पड़े, मानो किसी ने उठाकर खिलौने को दूर फेंक दिये हों। इसके बाद तो किसी के वहां रुकने का सवाल ही पैदा नहीं होता था। 

पति-पत्नी या बच्चे, किसी को परस्पर एक-दूसरे का ध्यान नहीं रहा और सब बाहर की तरफ दौड़ पड़े। तभी भयंकर कहकहे गूंजने लगे। जिससे हॉल का वातावरण और भी खौफनाक हो उठा। भगदड़ में बैंच आदि पलट गयीं। सब एक-दूसरे को रौंदते हुए भाग रहे थे। जिसमें फादर विलियम भी गिरकर घायल हो गये।


कुछ ही पलों में आध्यात्मिक व्याख्यान से गूंजता यह बड़ा हॉल खाली हो कर किसी भूतिया भवन की भांति सांय-सांय कर उठा। वहां एक अजीब सी वीरानी व्याप्त हो गयी।


थोड़ी देर पश्चात फादर विलियम जैसे-तैसे स्वयं को सम्भाल कर खड़े हुए और उस तरफ बढ़े, जिधर से गर्दन पकड़े युवती चीख रही थी। अब वहां पूरी तरह खामोशी छायी थी। उनका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। दिमाग भी अजीब सा सन्नाटा अनुभव कर रहा था। तभी उन्हें एक ठोकर लगी और वह गिरते-गिरते बचे। झुककर देखा तो वहां एक बच्चे की निष्प्राण देह पड़ी थी। फादर के मुंह से एकदम निकल पड़ा-“ओह गॉड!"


बड़ा खूबसूरत छोटा बच्चा वहां कुचला पड़ा था। जिसकी भयानक अंदाज में फटी-फटी आंखें मानो पूछ रही थीं कि मुझे किस भूल का दंड मिला है। लेकिन फादर क्या जवाब देते? वहीं तीन और बच्चे भी इसी दशा में पड़े हुए थे। उनकी भयानक दशा देखकर फादर का मन भी डर से कांप उठा।


आखिर वह उस युवती तक पहुंच गये। वह भी मर चुकी थी। बड़ा डरावना चेहरा लग रहा था उसका । फादर भी उसे देखकर कांप उठे। बस्ती की अल्हड़ व खूबसूरत नवयौवना लूसी के हाथ अभी भी अपनी गर्दन पर उसी स्थिति में थे, जैसे वह किसी से छूटना चाहती हो। सर दीवार से टकराकर फट गया था। सर से खून बह कर चेहरे को भयानक बना रहा था। खून में भीगी अधखुली आंखें जैसे फादर को घूर रही थीं।


उन आंखों के खौफ को झेल न सके फादर विलियम और बेहोश हो कर धड़ाम से नीचे गिर पड़े।


हॉल से ताबड़तोड़ भागे लोग बाहर मैदान में एकत्र होकर एक-दूसरे को तसल्ली देने का प्रयास कर रहे थे। सबके चेहरे डर से पीले पड़े थे। सब परस्पर पूछने का प्रयास कर रहे थे कि आखिर यह सब क्या है? कैसे हुआ है?


कई बच्चे, कई पुरुष व स्त्री अन्दर भगदड़ में भी जान खो बैठे थे। लेकिन किसी की हिम्मत न पड़ रही थी कि जाकर उन्हें देख ही ले।


तभी अन्दर फादर विलियम को होश आ गया था। वह जैसे-तैसे उठकर जान की खैर मनाते बाहर की ओर भागे। जब वह बड़े दरवाजे से बाहर निकले तो उनके कपड़े फटे थे। बाल बिखरे हुए और पैरों के जूते भी गायब थे। उसी समय एक तीखी व भारी आवाज वहां गूंज उठी--


"आज के बाद इस हॉल में कोई नहीं आयेगा। अब यह हमारा निवास है। अगर किसी ने भी हमारी आज्ञा की अवहेलना का दुस्साहस किया तो उसका अंजाम बहुत भयानक होगा।"


आवाज खामोश होते-होते फादर हवा में कई फुट ऐसे उठे मानो किसी ने दोनों हाथों में उठा लिया हो और वे दूर जा पड़े। उनकी हड्डी-पसली सब एक हो गयी। वहां खड़े लोगों को यह देख कर उनका रहा-सहा साहस भी ख़तम हो गया और वह वहां से तुरंत ही अपने घरों की तरफ दौड़ पड़े। वही आवाज फिर उनके पीछे आयी-


"याद रखना! अब हमारे सिवा यहां कोई आने की हिम्मत न करे।" इसके साथ तेज अंधड़ शुरू हो गया। जिसमें अजीब सा गर्द-गुबार उठने से चारों तरफ अंधेरा सा छा गया। अजीब से वातावरण में भयंकर अट्टाहास तैरने लगे। जिनकी आवाज तेज और तेज होती जा रही थी।


भला किसकी हिम्मत थी, जो अब इस अदृश्य शक्ति की आज्ञा की अनदेखी करता! धूल मिट्टी से लस्त-पस्त गिरते पड़ते सब रोते-बिलखते घरों पर पहुंचे तो वहां भी मानो चारों तरफ तबाही फैली थी। सब उलट-पलट हो चुका था। जैसे-तैसे अंधड़ रुका तो लोगों ने अपने को सम्भालकर अपने घरों को सहेजना प्रारम्भ किया। लेकिन उस दिन से मानो वहां के लोगों पर कयामत आ गयी। आये दिन उन पर आफतों का पहाड़ टूटने लगा तो एक-एक करके सब बस्ती खाली कर गये। 

अब वह गावं पूरी तरह से भूतिया बस्ती बन गया था। इसमें कुछ इन्सानी झलक केवल फादर विलियम, उनका नौकर डिकी और बहन मदर मारिया के रहने से मिल रही थी। चर्च के पास ही एक बंगले में रहते थे फादर, और उनको पूरा विश्वाश था की किसी न किसी दिन यह खौफ भरा माहौल भी ठीक हो जाएगा।


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“आखिर कौन मुझे वहां बुला रहा है?" हाथ में पकड़े पत्र को पढ़कर जानसन सोच रहा था। आज ही यह पत्र उसे मिला था। जिस पर ग्रीनवेल की मोहर छपी थी। ग्रीनवेल...

यह नाम उसी बस्ती का था, जहां से जानसन और उसका परिवार सब कुछ छोड़कर भाग आये थे। गिरजाघर में हुए हादसे के कारण। जानसन को अपने दादा जार्ज की दर्द भरी चीखें आज भी ऐसे याद थीं, मानो आज की ही बात हो। चीखों ने पूरी बस्ती को भी हिलाकर रख दिया था। जार्ज अपने गले को किसी से छुड़ाने का विफल प्रयास करते दिख रहे थे और आखिर कुछ ही देर में उनकी गर्दन एक तरफ लुढ़क गयी थी। उनके प्राण-पखेरू उड़ गये थे। उनकी उबल आयीं आंखों की वीभत्सता उसे आज तक याद थी। 

कई बार तो जानसन को भी ऐसा लगता था, मनो की जैसे उसका भी वही हश्र हो रहा है, उसकी भी आंखें बाहर निकली पड़ी हैं और चेहरा मानो किसी भयंकर शैतान सा हो गया हो। उसकी सिर कटी लाश किसी चौराहे पर पड़ी तड़प रही है। सारा शरीर रक्त में नहाया हुआ है। हाथ-पैर टूटे-कुचले हुए।


पत्र पढ़कर जानसन को जैसे सब कुछ स्मरण हो आया। उसका भाई लायड तो वहां का नाम भी सुनना पसन्द नहीं करता था, लेकिन जाने क्या विचार आया कि जानसन ने पत्र भेजने वाले का आमंत्रण मन ही मन स्वीकार कर लिया। वह गर्वीले स्वभाव का व्यक्ति था। वह जानना चाहता था कि आखिर पत्र भेज कर उसे बुलाने वाला कौन था?


मि. क्लाइव, मि. पीटरसन, मिस एलिस, मिस सूसन को भी ऐसे ही पत्र मिले थे। प्रत्येक पत्र में कहा गया था कि फलां (ये -वो) आ रहा है, इसलिए आप भी अवश्य आये। जबकि जिनको भी यह पत्र मिला था वे सब अलग-अलग सहर में एक-दूसरे से बहुत दूर रहते थे। यहां तक कि वे लोग एक-दूसरे को जानते भी नहीं थे। हाँ यह था की पत्र पाने वाले इन सब लोगों के दादा-नाना कोई न कोई ग्रीनवेल में रहता था।


ग्रीनवेल से आये परिवारों के यह सभी सदस्य अपने-अपने स्थान पर यह पत्र पाकर हैरत में थे कि आखिर उन्हें आमंत्रित करने वाला कौन था? क्लाइव, पीटरसन, एलिस व सूसन, फिलिप्स व एडीसन ग्रीनवेल जा पहुंचे। जहां पर एक झुकी कमर वाले वृद्ध डिकी ने अपना नाम बताकर उनकी अगवानी की। उसने बताया कि मैंने ही आप सब को यहां बुलाया है।


उस निर्जन बस्ती का गिरजाघर शान से सिर उठाये था। किन्तु उसमें अन्दर जाकर किसी ने लम्बे समय से प्रार्थना नहीं की थी। यह अज्ञात शक्तियों की धमकी का ही असर था। आस-पास का क्षेत्र बिल्कुल भुतहा बस्ती दिख रहा था।


उन्हें उत्सुकता थी कि उनके नाम पते डिकी ने कहां से हासिल किये? इस संबंध में पूछने पर डिकी ने कोई उत्तर न देकर इतना ही कहा कि उन सबके लिए वहां अलग-अलग मकान हैं। फिर भी वह चाहें तो एक साथ रह सकते हैं। सैमुअल का सुझाव इकट्ठे रहने के पक्ष में ही था। जिस पर सब सहमत भी हो गये। इस सुझाव के पीछे जानसन की मंशा एलिस के निकट रहने की थी। क्योंकि वह उसे पहली नजर में ही बहुत अच्छी लगी थी। साथ रहने पर वह उसे निहारता भी रह सकता था। वह सब गिरजाघर के पास वाले बंगले में आ गये।


यह खुला-खुला बंगला फादर विलियम का सरकारी आवास हुआ करता था। वह सब थके हुए थे ही। स्नान के बाद नाश्ता कर सब अपने-अपने कमरों में जा कर सो गये। शाम को सब लोग फिर चाय पर एकत्र हुए तो डिकी भी उनके साथ था। चुपचाप सब चाय और स्नेक्स खा रहे थे। तब जानसन की आवाज ने मौन वातावरण में विघ्न डाला। 

वह डिकी से बोला-"हमारे रिश्तेदारों ने यहां से हमेशा के लिए अपना रिश्ता तोड़ दिया था। इसलिए यहां से हमारी भी कोई रुचि नहीं है। फिर हमें बुलाने का क्या अर्थ है? इसके अलावा हम सबके पते आपको कैसे मिले?" हर किसी का यही प्रश्न था।


डिकी शांति से सब सुनता रहा। फिर मुस्कराते हुए बोला-"गिरजाघर में जो भी हुआ था, उससे सभी प्रभावित हुए थे। अन्य लोगों के साथ आप सब के रिश्तेदार भी यहां से चले गये थे। फादर विलियम, उनकी बहन मदर मारिया और मैं यहां पर रहकर चर्च को शैतानी शक्तियों से मुक्त कराने का प्रयास करते रहे। हर संभव प्रयास किये और उसी प्रयास में फादर और मदर को जान गंवानी पड़ गयी।


अकेला मैं ही बच गया। मैंने प्रयास किया कि जादू-टोने व भूत-प्रेतों को भगाने वाले ओझाओं की मदद लूं। इस इच्छा से मैंने अनेक ऐसे लोगों की शागिर्दी में आत्माओं को वश में करने के अनुष्ठान सीखे। लेकिन हर बार मुझे यही बताया गया कि ऐसे केसी भी अनुष्ठान करने के लिए इस बस्ती के मूल बाशिंदे अथवा उनके वंशजों का इनमें शामिल होना आवश्यक है।


अतः तब मैं अपना ध्यान ऐसे ही व्यक्तियों को खोजने की तरफ लगाया और मैंने अपेक्षित लोगों के नाम-पते जानने के लिए अनुष्ठान कर समाधि लगायी, फिर आप सबके बारे में अड़तालीस घंटे में जानने में सफल हो गया।" समाधि में आप सब के चेहरों तक से अवगत हो गया था।

उन्हें बुलाने के प्रयास में डिकी को अपनी सफलता का पूरा विश्वास था कि उसके यत्न विफल न होंगे और वास्तव में आज वह सब उसके सामने बैठे थे। प्रसन्न डिकी ने दावा किया कि अब वह समय ज्यादा दूर नहीं, जब वह बस्ती पुनः गुलजार होगी।


"हम लोगों को क्या करना है?" सूसन पूछ उठी।


“यदि आज की रात अच्छे से बीत गयी तो कल कोई शक्ति हमारी सफलता नहीं रोक पायेगी।" डिकी ने बताया। इसी बात के साथ चाय समाप्त हुई। फिर सब लोग बंगले से बाहर आकर शाम ढलने तक बस्ती के अजीब वातावरण से सामंजस्य बिठाने के प्रयास में लगे रहे। प्रथम बार यहां आने के बावजूद उन्हें अच्छा लग रहा था। जबकि वातावरण बड़ा रहस्यमय था। एक साथ रात का खाना खाकर सब वहां के बड़े हॉल में लगे अपने-अपने बिस्तरों पर लेटकर सोने का प्रयास करने लगे। थोड़ी देर हल्का-फुल्का हँसी-खुशी का माहौल बना। इसी दौरान सबने अपने अपने विषय में जानकारी दी। फिर धीरे-धीरे थोड़ी-थोड़ी देर के अन्तराल से सब को नींद आ गयी।


सब चैन से सो रहे थे कि रात्रि का दूसरा प्रहर बीतने के साथ ही यकायक जोरदार धमाके के साथ बंगला डोल उठा। जिस हॉल में वह सब सो रहे थे, वहां ही सबसे ज्यादा कहर बरपा। सब स्त्री-पुरुष व सामान उलट-पलट हो गये। सभी मदद के लिए परस्पर एक-दूसरे को पुकार रहे थे। किन्तु कोई किसी की मदद तो तभी कर सकता था जब किसी को होश होता! कुछ देर बाद यह विचित्र उत्पात शांत हो गया। अब कोई नहीं कह सकता था कि कुछ समय पहले ही यहां पर कुछ हुआ भी होगा।


अब आभास हो रहा था कि जैसे वहां कुछ हुआ ही नहीं है। लाइट जलाने पर हॉल में आस-पास देखने का प्रयास किया गया, किन्तु कुछ हाथ न लगा। तब सब बेचैन दिलों के साथ फिर लेट गये और जैसे-तैसे उन्हें फिर से नींद आ गयी।


लेकिन एक भयानक चीख से फिर उनकी नींद टूट गयी और वह सब हड़बड़ाकर उठ बैठे। उन्हें किसी स्त्री की बुदबुदाहट सुनायी दी-"प्लीज, मैं कहीं भागी तो नहीं जा रही हूं। देखो...सफर में आराम नहीं मिला है, मैं बहुत थकी हुई हूं। मुझे कुछ समय आराम करने दो... । मुझे परेशान मत करो...।" फिर यह बुदबुदाना भी बंद हो गया।


कुछ देर पश्चात फिर एक तेज चीख के साथ सब हिलकर रह गये और अपने बिस्तरों को छोड़कर उठ खड़े हुए। उन्होंने लाइट किया तो देख कर मानो सकते में आ गये। लाइट में उन्होंने देखा कि चीखने वाली एलिस थी। उसके मुंह से ही चीख निकली थी और फंसी सी आवाज में वह अब भी बोलने का प्रयास कर रही थी।


ऐलिस बिल्कुल जन्मजात अवस्था जैसी नंगी थी और आंखें बंद किये इस प्रकार हाथ-पांव चला रही थी मानो किसी को अपने ऊपर से धकेलने का प्रयास कर रही हो। सूसन ने दौड़ कर पहले उसके बदन पर एक चादर डाली। उसके बाद सबने मिलकर उसे सम्भाला और हिला-डुलाकर जगाने का प्रयास किया। किंतु वह बेहोश थी। उसके चेहरे पर पानी के छींटे मार-मारकर उसके मुंह में जरा सी शराब भी उड़ेल दी। कुछ देर में वह होश में तो आ गयी, लेकिन बहुत घबराई अवस्था में उसने घोषणा कर दी कि वह यहां एक मिनट भी नहीं रुकेगी और वापस जायेगी।


सब परेशान थे और साथ ही उसके साथ क्या हुआ था यह जानने के उत्सुक भी।


कुछ बोलने के प्रयास में एलिस अचानक रुकी और अपने गले को टटोल कर देखा तो वहां क्रॉस गायब था। आते ही डिकी ने सब को पहनने के लिए यह क्रॉस दिये थे और बताया था कि यह मंत्रपूरित हैं। इनके गले में रहते कोई बुरी आत्मा उन्हें सता न सकेगी।


वह सोच में पड़ गयी। उसे विश्वास हो गया था कि गले में क्रॉस न होने के कारण ही यह सब हुआ है। लेकिन क्रॉस कहां चला गया? आखिर उसके गले में से यह क्रॉस किसने निकाला होगा?


जानसन अलग सोच में डूबा हुआ था। वह एलिस के लिए अपने दिल मैं अलग प्रकार के भाव महसूस कर पा रहा था और वह निर्णय भी कर चुका था। वह उसके आस-पास ही घूम रहा था। धीरे-धीरे एलिस नार्मल होने लगी। रात का बाकि बचा समय भी उन्होंने बात कर ही बिताया। सुबह चाय की चुस्कियों के साथ सब लोग चुस्त-दुरुस्त हो गये। 


एलिस भी सहज भाव से रात की घटना बताने लगी- "पहले तो जाने कैसे किसी ने मेरे कपड़े उतार दिये...। उसके बाद किसी अदृश्य शक्ति ने मेरे साथ बलात्कार करना चाहा। मैंने विरोध भी किया... तभी किसी ने मेरा गला दबाना चाहा तो अपनी मौत का आभास पाकर मैं चिल्ला पड़ी।


मुझ पर वश पाने का प्रयास करती अदृश्य शक्ति बोली-“एलिजा, उस जमाने में तो मेरी तमाम शक्तियों के बावजूद तुम मेरा विरोध कर जान देकर बच गयीं। लेकिन अब तुम वापस आ गयी हो। इस बार नहीं बच पाओगी। अब तो मैं तुम्हें पाकर ही रहूंगा... । कहते-कहते वह शक्ति मुझसे लिपट गयी। मुझे लगा जैसे कि कोई सड़ा मुर्दा मुझसे लिपट गया है। भयंकर बदबू से मेरा दिमाग फटने लगा। उसके शरीर से भयानक दुर्गंध आ रही थी। मैं चीख पड़ी। यदि आप सब लोग जाग कर मुझे न छुड़ाते तो निश्चय ही मेरी कहानी तो खत्म हो गयी थी। 

लेकिन प्रश्न यह है कि आखिर वह मुझे एलिजा क्यों कह रहा था?" एलिस बड़बड़ायी-"शायद डिकी जानता हो? उसी से ही पूछूँगी...।"


नाश्ते करने के बाद डिकी वहां आ पहुंचा। सबने रात का वाकया उसे सुनाकर पूछा कि यहां की शैतानी शक्तियों को भगाने का क्या प्लान है? 

एलिस ने पूछा-“यह एलिजा कौन हो सकती है? उसका यहां से क्या सम्बंध है?" शांति से सबकी बातें सुनकर डिकी पहले एलिस को एक और क्रॉस पहनाकर उसे सुरक्षित रखने की हिदायत देते हुए बोला-“एलिजा तुम्हारे ही पूर्वजन्म का नाम है।"


सुनकर सब चौंक उठे और एक साथ उनके मुंह से निकला-"क्या मतलब? यह एलिस का पुनर्जन्म है क्या?"


"जी हां।" डिकी ने शांत भाव से धीरे से जवाब दिया।

क्या पुनर्जन्म वास्तव में होता है? यह तो किस्से-कहानियों की बातें हैं! सब यही एक ही बात बोल रहे थे। किंतु डिकी ने दृढ़ता से इस बात का समर्थन किया और कहा कि एलिस पूर्व जन्म की एलिजाबेथ है। यह उस समय एक बहुत खूबसूरत युवती थी। जिस पर यहां का मुखिया लटू था, किन्तु एलिजा ने उसे घास नहीं डाली तो मुखिया ने चरित्रहीनता का आरोप लगाकर यहीं बने बलि-स्थल पर उसकी गर्दन कटवा दी थी, जहां आज गिरजाघर बना है।


"क्या पूरा मामला बतायेंगे?" सबने पूछा तो अपनी यादें संजोने का प्रयास करता डिकी जैसे कहीं खो गया-

"बस्ती में छोटे-बड़े सभी के आकर्षण का केन्द्र थी एलिजाबेथ । प्यार से उसे एलिजा कहा जाता था। बला की खूबसूरत भी थी। बस्ती के हर नौजवान में उसे पाने की चाहत  रखता था। लेकिन सब से बेपरवाह एलिजा अपनी ही दुनिया में खोई रहती थी। वह जवान तो हो गयी थी, लेकिन ऐसी बातों से अभी भी बेपरवाह थी।


बस्ती के सभी नौजवान उसके दीवाने तो थे, लेकिन इशारों में अपनी मंशा जताने से आगे कोई न बढ़ पाया था। क्योंकि एलिजा में गुस्सा भी इतना था कि सब उससे बात करने में ही डरते थे। लेकिन बस्ती का मुखिया अपने पद के गुरूर में उसे पाने को अपना अधिकार मान बैठा था। उसने कई बार एलिजा को पहले इशारों में और फिर स्पष्ट अपनी मंशा जता भी दी। किन्तु बदले में उसे दुत्कार ही मिली। उसके मुखिया होने का एलिजा पर कोई प्रभाव न पड़ा।


मुखिया डगलस ने स्पष्ट कर दिया कि 'एलिजा, या तो मेरी रात रंगीन कर दे, वरना वह अंजाम होगा कि तू पछता भी न सकेगी!' लेकिन एलिजा ने फिर उसे दुत्कार दिया। एक दिन तो हद ही हो गयी। एक वीराने में डगलस ने एलिजा को घेरकर अपनी प्यास बुझाने का प्रयास किया और करीब-करीब सफल भी हो रहा था कि उसकी आंखों में अंगुली घुसेड़कर, अपने फटे कपड़े सम्भालती एलिजाबेथ वहां से बच निकली।


डगलस बौखला गया। वह जान गया कि यह लड़की कल उसके लिए मुसीबत खड़ी कर देगी। अतः उस रात को ही उसकी योजनानुसार सारी बस्ती में यह बात फैल गयी कि एलिजाबेथ के मैथ्यू से अवैध संबंध हैं। यह बात दिन निकलते-निकलते बतंगड़ बन चुकी थी। डगलस के कई चमचे चश्मदीद गवाह बन गये और उन्होंने गवाही दी की उन लोगों ने दोनों को अवैध संबंध बनाते देखा है।


ग्रीनवेल में ऐसे संबंध रखने वाली लड़की के लिए सामाजिक कानून था-गर्दन काटकर मौत की सजा। अतः उसे सजा देने का फरमान जारी हो गया और सिपाही एलिजाबेथ को उसके घर से रस्सियों में जकड़कर घसीटते हुए उस स्थान पर ले आये, जहां ऐसे मामलों के फैसले होते थे और जान ले ली जाती थी।


एलिजा निरन्तर चीख-चीख कर अपनी निर्दोषता व्यक्त कर रही थी, लेकिन कोई उसकी सुनने वाला न था। अब उस पर कोड़े भी बरसाये जाने लगे। मैदान में सारी बस्ती के लोग एकत्र थे। एलिजा के परिवार वाले भी बेबस खड़े थे।


एक ऊंचे स्थान पर बस्ती के बुजुर्गों के साथ मुखिया डगलस भी खड़ा था। तभी डगलस ने अपने हाथ ऊपर उठाये तो वहां मच रहा शोर बंद होकर खामोशी छा गयी। उसने सबको संबोधित करते हुए कहा-“एलिजा ने बस्ती के कानून का उल्लंघन किया है। उसने अपने यार के साथ अवैध संबंध बनाकर सबको शर्मसार कर दिया है। अतः हमारे कानून के मुताबिक, उसे सजाये मौत एकमात्र दंड है। आप सब क्या कहते हैं?"  

कहना क्या था?  सभी ने इस बात पर सहमति व्यक्त की।


अगले जन्म में सही रहने की सलाह देने के बहाने डगलस एलिजा के पास गया और धीरे से फुसफुसाया-“अब भी मेरी बात मान ले, मैं किसी तरह अब भी तुझे बचा लूंगा..."


थू! गुस्से से कांपती एलिजा ने उसके मुंह पर थूक दिया और चिल्लाकर बोली-“मुझ पर लगाया इल्जाम गलत है। मैथ्यू से मेरा कोई वास्ता नहीं है। मुखिया ही मुझ पर गलत निगाह रखता है। उसकी इच्छा पूरी न करने के कारण मुझ पर यह आरोप लगाया गया है...।"


लेकिन उसकी बात पूरी होते-होते मुखिया के चमचों ने शोर मचाकर उसकी आवाज दबा दी। वहां मौजूद मैथ्यू ने भी बाइबिल तक की कसम खाकर यह इल्जाम गलत बताया। लेकिन मुखिया के आगे सब बेकार रहा।


डगलस नहीं चाहता था कि अब एलिजाबेथ जीवित रह कर उसकी पोल खोल सके। उसने जल्लादों को इशारा किया तो वे कुल्हाड़ी लेकर एलिजाबेथ की ओर बढ़े।


मौत सामने देखकर घबराई एलिजाबेथ ने फिर बस्ती वालों पर आशा भरी निगाह डालते हुए चिल्लाकर कहा-"मैं शपथपूर्वक कहती हूं...कि मेरा मैथ्यू से कोई संबंध नहीं है। यह डगलस ही मुझसे वासनापूर्ति करना चाहता था...किन्तु मैंने इसकी बात नहीं मानी। जिसका यह परिणाम मिल रहा है...।" लेकिन कोई उसकी मदद को तैयार न था।


तभी जल्लादों ने आगे बढ़कर उसके हाथ पकड़ लिए और घसीटकर बलि-स्थल पर झुकाने लगे। अचानक सारा भय भूलकर एलिजा पूरी शक्ति से चिल्लाई। उसने सबको सुनाकर कहा-“मैं पूरी तरह निर्दोष हूं... । यदि मेरा विश्वास न कर मेरी हत्या की गयी तो यह सारी बस्ती इसका नतीजा भुगतेगी...और डगलस कुत्ते की मौत मरेगा।"


डगलस तेजी से आगे बढ़ा और उसके गाल पर एक जोरदार थप्पड़ मारकर बोला-“हरामजादी! ऐसा काम करते शर्म नहीं आया? और अब सब को बद्दुआ दे रही हो? मार दो छिनाल को!" उसने जल्लादों को तेजी से हुकुम दिया। 


जल्लादों ने जबरन उसका सिर नीचे टिकाया और एक ही कुल्हाड़ी में एलिजाबेथ की गर्दन धड़ से अलग हो गयी। एक दर्दनाक चीख के साथ एलिजा की कहानी खत्म हो गयी।


लेकिन उसी समय एक अजीब चमत्कार हुआ। मानो कुदरत को भी यह हत्या नागवार लगी। एलिजा की गर्दन कटकर नीचे न गिरकर, आसमान की ओर उड़ गयी और तभी घनघोर अंधेरा छा गया। चमचमाता सूरज गायब हो गया। तेज अंधड़ ने लोगों के होश उड़ा दिये। आधे घंटे बाद शांति हुई तो लोग चौंक गये। वहां से एलिजा का धड़ भी गायब था। वहां उसकी गर्दन से बहे खून की एक बूंद भी न थी।


वहां बेबस खड़े मैथ्यू ने सब से कहा कि इस अत्याचार की सजा सब को भुगतनी होगी और वह वहां से जाने कहां चला गया। भीड़ में खलबली मच गयी। उन्हें लगा कि उनसे वास्तव में भूल हुई है। एलिजा सच बोल रही थी। सब की क्रोधित निगाहें डगलस को घूरने लगीं और वहां का मुखिया होते हुए भी वह उनका सामना न कर वहां से खिसक गया। सब लोग खुद को दोषी मान रहे थे। वहां तरह-तरह की बातें होने लगीं


एलिजा निर्दोष थी-डगलस ही दोषी है-अब इस गुनाह की सजा सबको भुगतनी ही होगी। कंपकपाते लोग ऊपर हाथ उठाकर प्रार्थना करने लगे-गॉड! यह हम सब का गुनाह है। हमें इसकी सजा से बचा। पवित्र मरियम! गॉड ! रहम...हम पर रहम कर।


इस घटना को लम्बा समय हो गया। बस्ती वाले भूलने लगे थे कि कभी एक निर्दोष सच्ची युवती की यहां हत्या भी की गयी थी। और इस हत्या में बस्ती वाले भी बराबर के दोषी थे।


अब वहां का नया मुखिया और नयी पंचायत बन चुके थे। पुराना बलि-स्थल समाप्त कर वहां पर गिरजाघर बना दिया गया था। उसी चर्च में एक दिन आये  शैतानी तूफान ने बस्ती ही खाली करा दी थी।


"लेकिन मैथ्यू का क्या हुआ?” एलिस ने पूछा।


"उस दिन के बाद उसे किसी ने नहीं देखा। लेकिन उस घटना के बाद ऐसा भय व्याप्त हुआ कि शाम होते-होते सब लोग घरों में बंद हो जाते थे। कोई यदि किसी कारणवश बाहर रह भी जाता तो उसे दो साये टहलते दिखते, जिनसे डरकर आदमी बेहोश हो जाता था। बाहर से कोई आता तो इन खतरनाक सायों से डरकर वापस भाग जाता था। एक साल तक वहां कोई बलि न दी गयी।


"लेकिन यह बस्ती वीरान कैसे हो गयी?" सूसन ने सवाल किया।


"वही बता रहा हूं।" डिकी बोला- "इसके बाद से डगलस तो इतना डर गया कि वह बस्ती वालों के सामने जाने से भी कतराने लगा। पंचायत बुलाकर लोगों ने बलि-स्थल पर गिरजाघर बनवाने का निर्णय लिया। जिससे मरियम और गॉड उन पर दया करें, वह किसी मुसीबत में न पड़ें और बुरी बलायें वहां से टल जायें।"


डिकी आगे बोला-“लेकिन वह इस बात से अन्जान थे कि किस्मत कुछ और ही चाह रही थी। चर्च की नींव खोद दी गयी। दीवार उठनी प्रारम्भ हुई। लेकिन जैसे ही धरती से ऊपर नींव आया तो नींव उखड़ने लगी। तब प्रत्येक कोने में क्रॉस स्थापित कर बुनियाद बनायी गयी।


दीवारें तैयार हो गयीं तो छत का नम्बर आया। लेकिन फिर नयी परेशानी प्रारम्भ हो गयी। कभी कोई ईंट उछलकर किसी मजदूर को लगती और उसे घायल कर देती। कभी कोई मजदूर नीचे गिरकर घायल हो जाता। निरन्तर लम्बे समय तक ऐसा ही होता रहा। एक दिन सब एकत्र हुए और सलाह कर घास पर ही पवित्र मरियम की प्रतिमा स्थापित कर दी गयी। तब जाकर छत डल सकी और गिरजाघर का निर्माण पूरा हुआ। 


चर्च का निर्माण पूरा होते-होते डगलस किसी अज्ञात बीमारी से सड़-सड़कर कुत्ते सी मौत मरा। बड़ा भयानक दृश्य था उस समय का। मरकर डगलस किसी भयानक प्रेत जैसा हो गया था। उसके क्रिया-कर्म के लिए लोग उसका शव उठाने गये तो मृत शरीर जाने कहां गायब हो गया था!


चर्च में लाख चाहकर भी शांति का अनुभव न होता था। बस्ती में ऐसे तो कोई समस्या नहीं थी, लेकिन कोई भूले से बलिवेदी वाले स्थान की ओर चर्च की दीवार की तरफ गया तो फिर उसे किसी ने दोबारा नहीं देखा।


अब से आधी सदी पहले भयानक भूकम्प आया था। जिससे बलिवेदी की तरफ की चर्च की दीवार फट गयी। उस स्थान की तो मरम्मत करा दी गयी, लेकिन लोग इस बात से अनजान थे कि उस तरफ पैशाचिक शक्तियां अन्दर पहुंच गयी थीं। एक दिन फादर विलियम प्रार्थना सभा में प्रवचन को खड़े हुए तो एक भयानक शैतानी जलजले में सुन्दर लूसी को गला घोंटकर मार डाला गया। भगदड़ में कई बच्चे व अन्यों की जान चली गयी।


लूसी के बैठने की जगह से दीवार फट गयी थी। क्या-क्या बताऊं, बताते भी कलेजा फट जाता है! उस दिन से आज तक गिरजाघर दुष्ट आत्माओं और शैतानी शक्तियों के साये में ही कैद है। तब से आज तक कोई भी इसके अन्दर गया तो वापस बाहर न आना ही उसकी नियति बन गयी। धीरे-धीरे बस्ती खाली हो गयी।"


डिकी ने बात आगे बढ़ायी-“प्रभु पर विश्वास रख फादर, मदर और मैं यहीं रह गये। एक दिन फादर विलियम और मदर मारिया चर्च के भीतर ऐसे गये कि फिर लौटकर बाहर न आ सके। दो दिन के पश्चात उनके शव बुरी दशा में पहाड़ी की गोद में पड़े थे।"


“आपने हमें क्यों बुलाया है?' जानसन ने पूछा।


“क्योंकि चर्च की मुक्ति के लिए फिर बलि चाहिए... ।” डिकी का रहस्यमय स्वर सुनकर सब जैसे थर्रा गये और घबराहट मिश्रित क्रोध के साथ एकदम चिल्लाये“क्या हमारी बलि देकर तुम चर्च वापस लेना चाहते हो?"


"नहीं-आप सब गलत सोच रहे हैं।" डिकी ने शांत स्वर में सबको आश्वस्त करते हुए कहा-“बल्कि ऐसा ही एक अन्य उपाय किया जायेगा। तन्त्र साधना के दौरान मुझे बताया गया है कि चर्च को शैतानी शक्तियों से मुक्त कराने के लिए वीरान बस्ती के सात मूल निवासियों के उत्तराधिकारियों का रक्त यदि इस चर्च की दीवारों पर और भीतर छिड़क दिया जाये तो शैतानी आत्माओं का अन्त हो जायेगा...और चर्च मुक्त हो जायेगा।"


“अच्छा तो हमारा रक्त निकालने के लिए बुलाया गया है..." लार्केन भड़ककर बोला-“चर्च मुक्त हो न हो, हमें कोई मतलब नहीं है। किन्तु हम इसके लिए तैयार नहीं हैं।"


“पहले पूरी बात सुन लो।" डिकी ने हौले से डपटते हुए कहा-"कोई तुम्हारी दो-चार बाल्टी खून नहीं चाहिए। बस कुछ बूंदें ही पर्याप्त हैं इस कार्य के लिए। मेरी साधना से मुझे ज्ञात हुआ है कि आप सात शख्स ही इस पुनीत कार्य के पात्र हैं। आप सब से बहुत थोड़ा-थोड़ा रक्त लेकर हमारा उद्देश्य हासिल हो जायेगा। अतः भयभीत न हों। आज रात यह कार्य होना आवश्यक है।"


डिकी की बात जैसे समझ गये हों, इस प्रकार सबने सहमति में गर्दने हिला दीं। दिन भर सब साथ रहे। रात का भोजन भी सबने इकट्ठे ही किया। रात का दूसरा प्रहर आते-आते डिकी भी उनमें शामिल हो गया। इसी समय सात प्राणियों का रक्त एकत्र होना था।


डिकी ने सभी दरवाजे, खिड़कियां बन्द कर परदे भी गिरा दिये। हाल के सभी दरवाजों और खिड़कियों पर क्रॉस टांग दिये। इसके बाद सब से रक्त लेने का नम्बर आया। हाल के मध्य में एक बड़ी मेज बिछी थी और उस पर रक्त एकत्र करने के लिए इंजेक्शन, सिरिंज, रूई, स्प्रिट व कुछ खाली शीशियां व एक खाली बर्तन व कुछ अन्य सामान भी रखा हुआ था।


डिकी ने एक-एक कर जानसन, क्लाइव, पीटरसन, सूसन, लार्केन व जार्डन का कुछ रक्त इंजेक्शन से ले लिया। किन्तु एलिस अपनी बारी में जैसे ही टेबिल पर आयी तो गहरा अंधकार हो गया। भयानक स्वर गूंजने लगे। मानो भूकम्प से हाल डगमगाने लगा। 

डिकी ने फुर्ती से एलिस के चारों तरफ एक घेरा बना दिया। जिसके बाद फिर से शांति व्याप्त हो गयी। डिकी ने एलिस का रक्त भी ले लिया।


टेबल से उठकर एलिस सबके पास पहुंच गयी। वह बड़ी उद्विग्न दिख रही थी। जानसन ने धीरे से सहानुभूतिपूर्वक उसके कंधे पर हाथ रखकर पूछा-“क्या बात है एलिस! तुम ठीक तो हो?"


“अगर जल्दी से डिकी ने मेरे चारों तरफ घेरा न बनाया होता तो समझो कि मेरी जान चली ही गयी थी। अज्ञात अदृश्य पिशाच यहां आ गया था। जिसके हाथ मेरी गर्दन तक भी आ पहुंचे थे। इसके बावजूद भी वह जाते-जाते बोला था कि एलिजा तुम मेरी हो और मेरी ही रहोगी। अब तो जो कुछ तुम लोग चाहते हो, वह करके ही रहोगे। लेकिन कोई ताकत तुम्हें मेरी प्यास बुझाने से नहीं रोक सकती।


रात जैसे-तैसे पूरी हुई और अगले दिन सूर्य निकलने से पहले डिकी के साथ सब चर्च की ओर बढ़े और बड़े दरवाजे पर पहुंच गये।

डिकी ने सबको साथ ले मुख्य द्वार पर सबका मिला खून छिड़का और यही करता हुआ चर्च का चक्कर पूरा कर फिर वही आ गया। सब उसके साथ थे। मुख्य द्वार से कुछ दूर हट कर डिकी मंत्रोच्चारण करने लगा। शांत खड़े सब यह देख रहे थे। कुछ ही पलों में आश्चर्यचकित खड़े सबने देखा कि मुख्य द्वार स्वयं ही धीरे-धीरे खुलना प्रारम्भ हुआ और फिर थोड़ी देर में दोनों दरवाजे पूरे खुल गये और अचानक धुएं का एक गुबार, दर्द भरी कराहों के साथ बाहर निकलना प्रारम्भ हो गया।


बिल्कुल ऐसे स्वर उभर रहे थे मानो किसी को पीटकर जबरन उसके घर से धकेला जा रहा हो। कराहटें गूंज रही थीं। थोड़ी देर बाद धुंआ समाप्त हो गया। 

तभी एक भयानक समवेत् स्वर गूंजा-'डगलस और हम सब यहां से जा रहे हैं। लेकिन अवसर पाते ही वापस अवश्य आयेंगे। जब तक यह चर्च यहां पर है, हम भी यही कही अगल बगल ही रहेंगे और अवसर पाते ही इस पर अधिकार भी कर लेंगे। तुम सब बच कर रहना और डिकी! तुम्हारा तो हम खून पी जायेंगे।"


ये बाते सुनकर डिकी हंस पड़ा। वह बोला-“मेरी अब उम्र ही कितनी शेष है!" डगलस व उसके साथियों की कराहटें बंद हो गयीं। वातावरण सामान्य हो गया। काफी समय तक वह सब वहीं खड़े रहे, फिर डिकी ने कदम उठाये और बड़े दरवाजे से चर्च में प्रवेश कर गया। वह निरन्तर रक्त की बूंदें छिड़ककर मंत्रोच्चारण कर रहा था। उसने उन सबको भी अन्दर आने का संकेत किया।


पूरे चर्च में रक्त की बूंदें छिड़की गयीं। उसके पश्चात सबने मिलकर वहां की सफाई कर डाली। फिर प्रार्थना की गयी। उसके बाद वह अपने आवास-स्थल पर आ गये। इस समय सब बड़ी मानसिक शांति का अनुभव कर रहे थे। रात्रि शयन के समय डिकी भी उन सबके पास आ गया था। उसने विचार व्यक्त किया कि उन सबके सहयोग से बुरी आत्माओं का प्रकोप फिलहाल तो खत्म हो गया है। लेकिन अभी वह समाप्त नहीं हुआ हैं। अतः उनका खात्मा आवश्यक है। इसके लिए आवश्यक है कि इस चर्च का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया जाये। इसके बजाये, थोड़ा हटकर प्रार्थना-स्थल का निर्माण किया जाये। अन्यथा इस चर्च के रहते डगलस और उसके वफादार पिशाच अपनी शैतानियों से बाज नहीं आयेंगे। 


सके सुझाव पर सबने सहमति व्यक्त की। अगले दिन चर्च की सभी प्रतिमाएं व अन्य वस्तुएं हटाकर जलाने के लिए एकत्र कर ली गयीं। इस दौरान ऐसा आभास होता रहा कि इस सारी प्रक्रिया से कोई बहुत कष्ट में है। किन्तु चाहकर भी उन्हें रोक नहीं पा रहा है। चर्च की बुनियादें तक खोदकर उसका अस्तित्व मिटा दिया गया। फिर एक बहुत बड़ा गड्ढा तैयार कर उसमें एक बड़ा अलाव जलाया गया और सभी मूर्तियां व अन्य सामान उसमें डाल दिये गये। जिससे पैशाचिक शक्तियों का कोई अवशेष भी न बच सके।


डिकी ने मंत्रोच्चारण प्रारम्भ किया तो अलाव की लपटें और भड़क उठीं तथा ऐसा लगा जैसे किसी को खींच-खींच कर आग में धकेला जा रहा हो। अब इस प्रकार हाय तौबा गूंज रही थी मानो कोई शक्तियां अग्नि में झुलस रही हों।


तभी डगलस का प्रायश्चित में डूबा स्वर गूंजा-'एलिजाबेथ उर्फ एलिजा एक बड़ी खूबसूरत लेकिन चरित्रवान लड़की थी। मैं ही उसके सौंदर्य से पागल हो उठा था और जब उसने मेरी वासना-तृप्ति को नकार दिया तो मैंने षड्यंत्र कर उसे मौत की सजा तय करा दी थी कि शायद वह मेरी इच्छापूर्ति को तैयार हो जाये। लेकिन वह चरित्रवान युवती थी। इसलिए मेरे कुत्सित इरादों के आगे हथियार डालने के स्थान पर मौत को गले लगाना सही समझा।


यदि उस दिन मैथ्यू वहां न आ पहुंचता तो शायद मैं अपने मन की कर गुजरता। ईश्वर मुझे...माफ...करे...आ ऽ ऽ ऽ एलिस एलिजाबेथ ही है...और जानसन ही मैथ्यू..., कराहते डगलस की आवाज डूबती चली गयी। मानो वह खत्म हो गया हो।


थोड़ी सी अवधि में ही जानसन और एलिस बहुत निकट आ गये थे। दोनों एक दूसरे के प्रति आकृष्ट होते गये।


डिकी ने जानसन व उसके दूसरे साथियों की मदद से प्रयास किया तो पूरे अमेरिका से चर्च के निर्माण के लिए भारी धनराशि प्राप्त होने लगी। कुछ ही समय में रात-दिन के प्रयास और अनवरत श्रम के फलस्वरूप नया चर्च पूरी भव्यता के साथ तैयार हो गया। इसके साथ ही लोगों में विश्वास जगा तो ग्रीनवेल में पुराने लोगों के वंशजों का लौटना व नयों का भी आगमन प्रारम्भ हो गया। दूर-दराज के लोग भी वहां आकर बसने लगे।


बहुत थोड़े से समय में ग्रीनवेल एक बड़े शहर के रूप में विकसित हो गया। डिकी के सतत् प्रयासों के फलस्वरूप उसे फादर डेविड की उपाधि प्रदान की गयी और उसे ग्रीनवेल शहर का मेयर भी बना दिया गया।


इन नये बने भव्य चर्च में जो प्रथम विवाह सम्पन्न हुआ, वह जानसन और एलिस का था। एलिस की नानी एलिजाबेथ उर्फ एलिजा की सगी बहन थी। कभी जिस मैथ्यू के साथ एलिजा का झूठा नाम घसीटा गया था, उसका वंशज ही आज के विवाह का दूल्हा यानी जानसन मैथ्यू का पौत्र था।


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..... Greenvale Ki Sachi Ghatna Bhootiya Basti .....

Team Hindi Horror Stories

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