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[ भूमंडलीकरण वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से सम्पूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था को संसार की अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करना है। वस्तुओं, सेवाओं, व्यक्तियों और सूचनाओं का राष्ट्रीय सीमाओं के आरपार स्वतंत्र रूप से संचरण ही वैश्वीकरण या भूमंडलीकरण कहलाता है।
भूमंडलीकरण के उद्देश्य
भूमंडलीकरण के माध्यम से विश्व की अर्थव्यवस्था को एकीकृत करके स्वतंत्र एवं मुक्त व्यापार नीति को अपनाना है। सम्पूर्ण देशों को एक आर्थिक अर्थतंत्र के माध्यम से जोड़ना भूमंडलीकरण का प्रमुख उद्देश्य है।
भूमंडलीकरण के द्वारा विश्व-व्यापार का काफी तीव्र गति से विस्तार करना है। इसके विस्तार के उद्देश्य हैं।
भूमंडलीकरण के कारण स्थानीकरण के मौद्रिक घाटा को कम करना।
बाह्य उदारीकरण के तहत विदेशी वस्तुओं, सेवाओं, प्रौद्योगिकी और पूँजी के आयात से प्रतिबंध हटाना।
घरेलू उदारीकरण के तहत उत्पादन, निवेश और बाजार व्यवस्था का महत्व बढ़ाना।
भूमंडलीकरण के माध्यम से विभिन्न देशों के बीच की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन, उपभोक्ता की अभिरूचि, जीवन शैली, और मांग में बदलाव लाना भूमंडलीकरण का प्रमुख उद्देश्य रहा है। भूमंडलीकरण की प्रक्रिया से बाजार में आंतरिक एवं बाह्य प्रतिस्पर्धा को तेजी से बढ़ाने के लिए एक से अधिक देशों की अर्थव्यवस्था को एक स्वतंत्र व्यापार की संबंधता से जोड़ना रहा है। भूमंडलीकरण का सबसे प्रमुख उद्देश्य यह रहा है कि विश्व की अर्थव्यवस्था पद्धति में एक ऐसी प्रक्रिया को अपनाया जाय जिससे सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को सुनियोजित तरीके से स्वतंत्र व्यापार संतुलन बनाया जा सके। विश्व के सभी देश एक मुक्त व्यापार संगठन की प्रक्रिया में भाग ले सकें। भूमंडलीकरण के कारण विकसित एवं विकासशील देशों के साथ एक सामंजस्य की स्थिति को लेकर सम्पूर्ण विश्व की आर्थिक प्रक्रिया में एक विवाद की समस्या बनी हुई है।
भूमंडलीकरण की अर्थव्यवस्था को भारतीय अर्थव्यवस्था के द्वारा समझा जा सकता है। जैसे कि - भारतीय अर्थव्यवस्था में उत्तरोत्तर उदारीकरण के माध्यम से भूमंडलीकरण करने के लिये किये गये प्रयासों एवं विश्व व्यापार संगठन के प्रावधानों को लागू करने के परिणामस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था पर जो प्रभाव पड़े हैं, उनकी समीक्षा तथा आकलन करके भूमंडलीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को समझा जा सकता है।
भूमंडलीकरण आपसी प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है। जिसके माध्यम से विश्व के सम्पूर्ण देश उदारीकरण की प्रक्रिया में समान रूप से भाग ले सके एवं सामंजस्य बनाये रखे। भूमंडलीकरण के माध्यम से बुनियादी आर्थिक उद्देश्यों की प्राप्ति होती है। उदारीकरण एवं भूमंडलीकरण के प्रभावों की समीक्षा करने के लिए विश्व व्यापार संगठन के मुख्य प्रावधानों का देश के कृषि, उद्योग, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विनियोग एवं सेवा आदि क्षेत्रों का आकलन करना आवश्यक है।
Q- मानव विकास से क्या आशय है ??
Ans- मानव विकास, स्वास्थ्य भौतिक पर्यावरण से लेकर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्वतंत्रता तक सभी प्रकार के मानव विकल्पों को सम्मिलित करते हुए लोगों के विकल्पों में विस्तार और उनके शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सशक्तीकरण के अवसरों में वृद्धि की प्रक्रिया है।
[प्रश्न -मानव विकास के चार प्रमुख घटक क्या है?
उत्तर: मानव विकास अवधारणा के चार स्तम्भ हैं-समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता तथा सशक्तीकरण समता को आशय प्रत्येक व्यक्ति (स्त्री अथवा पुरुष) को बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध अवसरों के लिए समान पहुँच की व्यवस्था करना है।
प्रश्न -मानव विकास अवधारणा के अंतर्गत समता और सतत पोषणीयता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-मानव विकास अवधारणा के अंतर्गत समता और सतत पोषणीयता से आशय प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपलब्ध अवसरों तक समान पहुंच की व्यवस्था करना है। यह लिंग, जाति, आय आदि के भेदभाव रहित विचार को व्यक्त करती है। समता समाज में सभी वर्गों के लिए समान विकल्पों का प्रबंध कराने में भी सहायक है।
प्रश्न -मानव विकास सूचकांक से क्या आशय है ?
उत्तर-मानव विकास सूचकांक (HDI) एक सूचकांक है, जिसका उपयोग देशों को "मानव विकास" के आधार पर आंकने के लिए किया जाता है। इस सूचकांक से इस बात का पता चलता है कि कोई देश विकसित है, विकासशील है, अथवा अविकसित है। मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) [जीवन प्रत्याशा], [शिक्षा], और [प्रति व्यक्ति आय] संकेतकों का एक समग्र आंकड़ा है, जो मानव विकास के चार स्तरों पर देशों को श्रेणीगत करने में उपयोग किया जाता है। जिस देश की जीवन प्रत्याशा, शिक्षा स्तर एवं जीडीपी प्रति व्यक्ति अधिक होती है, उसे उच्च श्रेणी प्राप्त होती हैं। एचडीआई का विकास पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक द्वारा किया गया था। इसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ( UNDP)द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
[ प्रश्न- आर्थिक विकास के सूचक क्या हैं ?
उत्तर-आय की वृद्धि को आर्थिक विकास का सबसे उचित सूचक मानना चाहिये । ये अर्थशास्त्री हैं- साइमन कुजनैटस, मायर तथा बाल्डविन । प्रो. कुजनैटस ने इस विधि को आर्थिक विकास के माप का आधार स्वीकार किया है ।
इस प्रयोजन से, शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) को कुल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) की तुलना में वरीयता दी जाती है क्योंकि यह राष्ट्र की प्रगति के सम्बन्ध में बेहतर जानकारी देता है ।
प्रो. मायर और बाल्डविन के अनुसार- “यदि प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि को आर्थिक विकास के माप के रूप में लिया जाये तो, उसकी वास्तविक राष्ट्रीय आय के बढ़ जाने पर देश को विकसित न हुआ कहना अनुपयुक्त प्रतीत होगा यदि जनसंख्या भी उसी दर से बढ़ जाये ।”
इसी तरह प्रो. मैकेड कहते हैं कि- ”कल्याण को मापने के लिये प्रति व्यक्ति आय की तुलना में कुल आय की धारणा अधिक प्रासंगिक है ।”
अत: आर्थिक विकास को मापने के लिये सर्वाधिक अनुकूल उपाय अन्तिम वस्तुओं और सेवाओं की गणना करना होगा, परन्तु उत्पादन की प्रक्रिया के दौरान यन्त्रों और पूंजीगत वस्तुओं के प्रयोग पर ध्यान देना आवश्यक है ।
प्रश्न-मानव विकास सूचकांक से क्या आशय है ?
उत्तर-मानव विकास सूचकांक
मानव विकास सूचकांक तीन बिंदुओं पर आधारित है। इसके तीन प्रमुख बिंदु हैं, जिसके आधार पर इस इंडेक्स का निर्माण किया जाता है। पहला है जन्म के समय जीवन प्रत्याशा, दूसरा है संभावित स्कूली शिक्षा, तीसरा महत्वपूर्ण बिंदु पीपीपी आधार पर प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय है।
[: प्रश्न-उदारीकरण , निजीकरण और भूमंडलीकरण से क्या आशय है ??
उत्तर-1980 का दशक भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव लेकर आया था। सुधारों के इस नए मॉडल को सामान्यतः उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरणमाँडल (एलपीजी मॉडल) के रूप में जाना जाता है। इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत की अर्थव्यवस्था को तेजी से विकसित अर्थव्यवस्था बनाना तथा दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के निकट पहुंचना या उनसे आगे निकलना था।
एक अधिक कुशल स्तर करने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को उठाने पर लक्षित व्यापार, विनिर्माण करने का संबंध है, और वित्तीय सेवाओं ने उद्योगों के साथ जगह ले ली है कि सुधारों की श्रृंखला। इन आर्थिक सुधारों को एक महत्वपूर्ण तरीके से देश के समग्र आर्थिक विकास को प्रभावित किया था।
उदारीकरण
उदारीकरण सरकार के नियमों में आई कमी को दर्शाता है। भारत में आर्थिक उदारीकरण 24 जुलाई 1991 के बाद से शुरू हुआ जो जारी रखने के वित्तीय सुधारों को दर्शाता है।
निजीकरण और वैश्वीकरण
निजीकरण के रूप में अच्छी तरह से निजी क्षेत्र के लिए व्यापार और सेवाओं और सार्वजनिक क्षेत्र (या सरकार) से स्वामित्व के हस्तांतरण में निजी संस्थाओं की भागीदारी को दर्शाता है। वैश्वीकरण की दुनिया के विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं के समेकन के लिए खड़ा है।
[
भारत की भौगोलिक संरचना में लगभग सभी प्रकार के स्थलरूप पाए जाते हैं।
एक ओर इसके उत्तर में विशाल हिमालय की पर्वतमालायें हैं तो दूसरी ओर और दक्षिण में विस्तृत हिंद महासागर, एक ओर ऊँचा-नीचा और कटा-फटा दक्कन का पठार है तो वहीं विशाल और समतल सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान भी, थार के विस्तृत मरुस्थल में जहाँ विविध मरुस्थलीय स्थलरुप पाए जाते हैं तो दूसरी ओर समुद्र तटीय भाग भी हैं। कर्क रेखा इसके लगभग बीच से गुजरती है और यहाँ लगभग हर प्रकार की जलवायु भी पायी जाती है। मिट्टी, वनस्पति और प्राकृतिक संसाधनो की दृष्टि से भी भारत में काफ़ी भौगोलिक विविधता है।
प्राकृतिक विविधता ने यहाँ की नृजातीय विविधता और जनसंख्या के असमान वितरण के साथ मिलकर इसे आर्थिक, सामजिक और सांस्कृतिक विविधता प्रदान की है। इन सबके बावजूद यहाँ की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक एकता इसे एक राष्ट्र के रूप में परिभाषित करती है। हिमालय द्वारा उत्तर में सुरक्षित और लगभग ७ हज़ार किलोमीटर लम्बी समुद्री सीमा के साथ हिन्द महासागर के उत्तरी शीर्ष पर स्थित भारत का भू-राजनैतिक महत्त्व भी बहुत बढ़ जाता है और इसे एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करता है।
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