Apathit Gadyansh in Hindi | अपठित गद्यांश

पाठ बोधन
अपठित गद्यांश
apathit gadyansh in hindi
अपठित गद्यांश किसे कहते हैं ?
अपठित गद्यांश क्या है ?
अपठित गद्यांश से आप क्या समझते हैं ?
अपठित गद्यांश-बोध से सम्बंधित महत्त्वपूर्ण बातें कौन-कौन सी हैं ?
वह गद्यांश, जिसका अध्ययन पहले कभी न किया गया हो. सामान्यतः अपठित अंश पाठ्यपुस्तक से नहीं लिया जाता है .अपठित भाग के उत्तर विद्यार्थी अपनी समझ और मौलिक सोच के आधार पर देते हैं . अपठित गद्यांश 'पाठ बोधन' के अंतर्गत आता है .
अपठित गद्यांश पढ़कर उस पर आधारित भाव-बोध संबंधी प्रश्न पूछे जाते हैं ताकि विद्यार्थियों की भावग्रहण-क्षमता का संवर्धन एवं मूल्यांकन हो सके। अभ्यास करने पर अपठित गद्य हल करने में कुशलता पायी जा सकती है .
अपठित गद्यांश के प्रश्नों के साथ निम्न बातें ध्यान रखना अनिवार्य हैं -
- अपठित गद्यांश का बार-बार मौन वाचन करके उसे समझने का प्रयास करें.
- इसके पश्चात प्रश्नों को पढ़ें और गद्यांश में संभावित उत्तरों को रेखांकित करें.
- जिन प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट न हों, उनके उत्तर जानने हेतु गद्यांश को पुन: ध्यान से पढ़ें.
- प्रश्नों के उत्तर अपनी भाषा में दें.
- उत्तर संक्षिप्त रखने का प्रयास करें .
- भाषा सरल और प्रभावशाली होनी चाहिए.
- प्रश्नों के उत्तर अपठित भाग पर ही आधारित होने चाहिए .
- यदि कोई प्रश्न शीर्षक देने के संबंध में हो तो ध्यान रखें कि शीर्षक मूल कथ्य से संबंधित होना चाहिए.
- शीर्षक छोटा, सटीक और सारगर्भित होना चाहिए .
- शीर्षक गद्यांश में दी गई सारी अभिव्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाला होना चाहिए.
- अंत में अपने उत्तरों को पुन: पढ़कर उनकी त्रुटियों ( गलतियों ) को अवश्य दूर करें.
पाठ बोधन किसे कहते है?
पाठ-बोधन की परिभाषा:
किसी दिए गए पाठ को पढ़कर अध्येता द्वारा प्रतिपाद्य विषय तथा गद्यांश में निहित मूल अर्थ को हृदयंगम करना ही पाठ-बोधन कहलाता है।
इस प्रकार का अभ्यास परीक्षार्थी की योग्यता को जाँचने का सर्वाधिक मापदण्ड होता है। इससे परीक्षार्थी की सही सूझ-बूझ तथा ग्रहण करने की सही क्षमता की परख की जा सकती हैं।
पाठ-बोधन संबंधी सामान्य बातें
(1) दिए गए पाठ का स्तर, विचार, भाषा, शैली आदि प्रत्येक दृष्टि से परीक्षा के स्तर के अनुरूप होता है।
(2) पाठ का स्वरूप साहित्यिक (अधिकांशतः), वैज्ञानिक, विवरणात्मक आदि होता है।
(3) दिया गया पाठ अपठित (अर्थात जो पढ़ा न गया हो) होता है।
(4) अपठित पाठ प्रायः गद्यांश होते हैं, किसी-किसी परीक्षा में पद्यांश भी।
(5) पाठ से ही संबंधित कुछ वस्तुनिष्ठ प्रश्न नीचे दिए गए होते है तथा प्रत्येक के चार/पाँच वैकल्पिक उत्तर सुझाए गए होते हैं। परीक्षार्थी को इनमें से सही उत्तर चुनकर उसे निर्देशानुसार चिन्हित करना होता है। यदि सही उत्तर चुनने में असमंजस है तो ऐसे विकल्प को चुनना होता है जो सही उत्तर के सबसे करीब लगता है .
(6) अपठित भाग की प्रकृति वस्तुनिष्ठ होती है अतः इसे शीघ्रता से हल करके समय बचाना चाहिए और अन्य HOTS ( Higher Order Thinking Skill ) प्रश्न को हल करने में समय लगाना चाहिए .
पाठ-बोधन पर आधारित प्रश्नों को हल करने की विधि:
(1) प्रथम चरण में पाठ को शीघ्रता से किन्तु ध्यानपूर्वक पढ़कर विषय-वस्तु तथा केन्द्रीय भाव को जानने का प्रयास करें।
(2) दूसरे चरण में पाठ को धीरे-धीरे एवं पूरे मनोयोग से नीचे दिए गए प्रश्नों को ध्यान में रखते हुए पढ़ें। संभावित उत्तरों को साथ-साथ रेखांकित करें।
(3) तीसरे चरण में प्रश्नों के सही उत्तरों को सावधानीपूर्वक चिह्नांकित करें।
नोट :
(i) उत्तर पाठ पर ही आधारित होने चाहिए। कल्पना पर आधारित उत्तर से बचना चाहिए।
(ii) उत्तर प्रसंगानुकूल एवं सीधा होना चाहिए।
(iii) प्रत्येक विकल्प पर विचार करके देखें कि उनमें से किसके अर्थ की संगति संबंधित वाक्य के साथ सही बैठती है।
पाठ-बोधन पर आधारित प्रश्न
apathit gadyansh with answers
अपठित भाग को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए .
वैज्ञानिक प्रयोग की सफलता ने मनुष्य की बुद्धि का अपूर्व विकास कर दिया है। द्वितीय महायुद्ध में एटम बम की शक्ति ने कुछ क्षणों में ही जापान की अजेय शक्ति को पराजित कर दिया।
इस शक्ति की युद्धकालीन सफलता ने अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रान्स आदि सभी देशों को ऐसे शस्त्रास्त्रों के निर्माण की प्रेरणा दी की सभी भयंकर और सर्वविनाशकारी शस्त्र बनाने लगे। अब सेना को पराजित करने तथा शत्रु-देश पर पैदल सेना द्वारा आक्रमण करने के लिए शस्त्र-निर्माण के स्थान पर देश के विनाश करने की दिशा में शस्त्रास्त्र बनने लगे है। इन हथियारों का प्रयोग होने पर शत्रु-देशों की अधिकांश जनता और संपत्ति थोड़े समय में ही नष्ट की जा सकेगी।
चूँकि ऐसे शस्त्रास्त्र प्रायः सभी स्वतन्त्र देशों के संग्रहालयों में कुछ न कुछ आ गये है, अतः युद्ध की स्थिति में उनका प्रयोग भी अनिवार्य हो जायेगा।
अतः दुनिया का सर्वनाश या अधिकांश नाश तो अवश्य ही हो जायेगा। इसलिए निः शस्त्रीकरण की योजनाएँ बन रही हैं। शस्त्रास्त्रों के निर्माण में जो दिशा अपनाई गई, उसी के अनुसार आज इतने उत्रत शस्त्रास्त्र बन गये हैं, जिनके प्रयोग से व्यापक विनाश आसन्न दिखाई पड़ता है। अब भी परीक्षणों की रोकथाम तथा बने शस्त्रों के प्रयोग के रोकने के मार्ग खोजे जा रहे हैं। इन प्रयासों के मूल में एक भयंकर आतंक और विश्व विनाश का भय कार्य कर रहा है।
(1) इस गद्यांश का मूल कथ्य क्या है ?
(a) आतंक और सर्वनाश का भय
(b) विश्व में शस्त्रास्त्रों की होड़
(c) द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका
(d) निःशस्त्रीकरण और विश्व शान्ति
उत्तर- (d)
(2) भयंकर विनाशकारी आधुनिक शस्त्रास्त्रों के बनाने की प्रेरणा किसने दी ?
(a) अमेरिका ने
(b) अमेरिका की विजय ने
(c) जापान के विनाश ने
(d) बड़े देशों की पारस्परिक प्रतिस्पर्धा ने
उत्तर- (c)
(3) एटम बम की अपार शक्ति का प्रथम अनुभव कैसे हुआ ?
(a) जापान में हुई भयंकर विनाशलीला से
(b) जापान की अजेय शक्ति की पराजय से
(c) अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस की प्रतिस्पर्धा से
(d) अमेरिका की विजय से
उत्तर- (b)
(4) बड़े-बड़े देश आधुनिक विनाशकारी शस्त्रास्त्र क्यों बना रहे हैं ?
(a) अपनी-अपनी सेनाओं में कमी करने के उद्देश्य से
(b) अपने संसाधनों का प्रयोग करने के उद्देश्य से
(c) अपना-अपना सामरिक व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से
(d) पारस्परिक भय के कारण
उत्तर- (c)
(5) आधुनिक युद्ध भयंकर व विनाशकारी होते हैं क्योंकि-
(a) दोनों देशों के शस्त्रास्त्र इन युद्धों में समाप्त हो जाते हैं।
(b) अधिकांश जनता और उसकी सम्पत्ति नष्ट हो जाती है।
(c) दोनों देशों में महामारी और भुखमरी फैल जाती है।
(d) दोनों देशों की सेनाएँ इन युद्धों में मारी जाती हैं।
उत्तर- (b)
(6) इस गद्यांश का सर्वाधिक उपर्युक्त शीर्षक है-
(a) निःशस्त्रीकरण
(b) आधुनिक शस्त्रास्त्रों का विनाशकारी प्रभाव
(c) एटम बम की शक्ति
(d) आतंक और विश्व-विनाश का भय
उत्तर- (a)
(7) ‘व्यापक विनाश आसन्न दिखाई पड़ता है।’ इस वाक्य में ‘आसन्न’ का अर्थ क्या है ?
(a) अवश्य घटित होने वाला
(b) कुछ समय बाद घटित होने वाला
(c) किसी क्षेत्र विशेष में घटित होने वाला
(d) कभी घटित नहीं होने वाला
उत्तर- (a)
(8) ‘निःशस्त्रीकरण’ से क्या तात्पर्य है ?
(a) आधुनिक शस्त्रास्त्रों का मुक्त व्यापार
(b) आधुनिक शस्त्रास्त्रों के परीक्षण, प्रयोग एवं भंडारण पर प्रतिबंध
(c) एटम की शक्ति का रचनात्मक कार्यों में प्रयोग
(d) एटम बम का जनता पर प्रयोग न करने का संकल्प
उत्तर- (b)
(9) निःशस्त्रीकरण की योजनाएँ क्यों बनाई जा रही हैं ?
(a) क्योंकि आतंक और विश्व के सर्वनाश का भय बढ़ता जा रहा है।
(b) क्योंकि बड़े देशों के संसाधन समाप्त होते जा रहे हैं।
(c) क्योंकि तृतीय विश्व युद्ध की अभी कोई सम्भावना नहीं है।
(d) क्योंकि ये योजनाएँ संयुक्त राष्ट्र संघ ने बनाई हैं।
उत्तर- (a)
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अपठित भाग को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए .
आज हम इस असमंजस में पड़े हैं और यह निश्चय नहीं कर पाए हैं कि हम किस ओर चलेंगे और हमारा ध्येय क्या है? स्वभावत: ऐसी अवस्था में हमारे पैर लड़खड़ाते हैं। हमारे विचार में भारत के लिए और सारे संसार के लिए सुख और शांति का एक ही रास्ता है और वह है-अहिंसा और आत्मवाद का। अपनी दुर्बलता के कारण हम उसे ग्रहण न कर सके, पर उसके सिद्धांतों को तो हमें स्वीकार कर ही लेना चाहिए और उसके प्रवर्तन का इंतजार करना चाहिए। यदि हम सिद्धांत ही न मानेंगे तो उसके प्रवर्तन की आशा कैसे की जा सकती है। जहाँ तक मैंने महात्मा गांधी के सिद्धांत को समझा है, वह इसी आत्मवाद और अहिंसा के, जिसे वे सत्य भी कहा करते थे, मानने वाले और प्रवर्तक थे। उसे ही कुछ लोग आज गांधीवाद का नाम भी दे रहे हैं।
यद्यपि महात्मा गांधी ने बार-बार यह कहा था-“वे किसी नए सिद्धांत या वाद के प्रवर्तक नहीं हैं और उन्होंने अपने जीवन में प्राचीन सिद्धांतों को अमल कर दिखाने का यत्न किया।” विचार कर देखा जाए, तो जितने सिद्धांत अन्य देशों, अन्य-अन्य कालों और स्थितियों में भिन्न-भिन्न नामों और धर्मों से प्रचलित हुए हैं,सभी अंतिम और मार्मिक अन्वेषण के बाद इसी तत्व अथवा सिद्धांत में समाविष्ट पाए जाते हैं। केवल भौतिकवाद इनसे अलग है।
हमें असमंजस की स्थिति से बाहर निकलकर निश्चय कर लेना है कि हम अहिंसावाद, आत्मवाद और गांधीवाद के अनुयायी और समर्थक हैं, न कि भौतिकवाद के। प्रेय और श्रेय में से हमें श्रेय को चुनना है। श्रेय ही हितकर है, भले ही वह कठिन और श्रमसाध्य हो। इसके विपरीत, प्रेय आरंभ में भले ही आकर्षक दिखाई दे, उसका अंतिम परिणाम अहितकर होता है।
प्रश्न –
(क) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ख) आज का मनुष्य असमंजस में क्यों पड़ा है?
(ग) लेखक के अनुसार, विश्व में सुख-समृद्ध और शांति कैसे स्थापित हो सकती है?
(घ) अहिंसा के बारे में लेखक का विचार स्पष्ट कीजिए।
(ड.) आज गांधीवाद की संज्ञा किसे दी जा रही है?
(च) भौतिकवाद को छोड़कर अन्य सिद्धांतों और धर्मों में समानता है, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
(छ) भौतिकवाद से क्या अभिप्राय है? मनुष्य को किसका समर्थक बनना चाहिए?
(ज) निर्देशानुसार उत्तर दीजिए—
उपसर्ग, मूल शब्द और प्रत्यय अलग-अलग कीजिए-
दुर्बलता।
विशेषण बनाइए-
सिद्धांत, निश्चय।
उत्तर –
(क) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर : शीर्षक-श्रेय या प्रेय।
(ख) आज का मनुष्य असमंजस में क्यों पड़ा है?
उत्तर :आज का मनुष्य असमंजस में इसलिए पड़ा हुआ है, क्योंकि वह दिग्भ्रमित है और यह निश्चय नहीं कर पा रहा है कि उसका जीवन-लक्ष्य क्या है और वह किस ओर चले। ऐसी स्थिति में मनुष्य के कदम उसका साथ नहीं दे पाते और वह कोई फैसला नहीं कर पाता।
(ग) लेखक के अनुसार, विश्व में सुख-समृद्ध और शांति कैसे स्थापित हो सकती है?
उत्तर : लेखक के अनुसार विश्व में सुख-शांति और समृद्ध के लिए आवश्यक है कि लोग हिंसा का रास्ता त्याग दें और मन-वचन तथा कर्म से अहिंसा का पालन करें और आत्मवाद का मार्ग अपनाकर औरों की सुख-शांति के लिए सोचें।
(घ) अहिंसा के बारे में लेखक का विचार स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : अहिंसा के बारे में लेखक का विचार है कि अपनी कमजोरी के कारण हम भारतीय अहिंसा को न अपना सके, पर हमें अहिंसा के सिद्धांतों को स्वीकार कर लेना चाहिए और उसके प्रवर्तन का इंतजार करना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि हम उसके सिद्धांत को मानें।
(ड.) आज गांधीवाद की संज्ञा किसे दी जा रही है?
उत्तर : गांधी जी आत्मवाद और अहिंसा का पालन करते थे। इसी अहिंसा और आत्मवाद को वे मानते थे और उसका प्रवर्तन किया तथा इसे ही सत्य का नाम देते थे। उसी को आज गांधीवाद की संज्ञा दी जा रही है।
(च) भौतिकवाद को छोड़कर अन्य सिद्धांतों और धर्मों में समानता है, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : भौतिकवाद को छोड़कर अन्य सिद्धांतों और धर्मों में समानता है, क्योंकि वे दूसरे देशों में अलग-अलग समय और परिस्थितियों में भले ही अलग-अलग नामों और धर्मों से प्रचलित हुए हैं, उन सभी में अंतिम और मार्मिक खोज के बाद सत्य और अहिंसा समाविष्ट पाए गए हैं।
(छ) भौतिकवाद से क्या अभिप्राय है? मनुष्य को किसका समर्थक बनना चाहिए?
उत्तर : भौतिकवाद से अभिप्राय उस सिद्धांत से है, जिसमें सांसारिक सुख-साधनों की प्रधानता रहती है। इन्हीं सुख-साधनों का अधिकाधिक प्रयोग ही जीवन का लक्ष्य मान लिया जाता है। मनुष्य को अहिंसावाद, आत्मवाद और सत्य का समर्थक बनना चाहिए, भौतिकवाद का बिलकुल भी नहीं।
(ज) निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-
उत्तर :
शब्द -दुर्बलता
उपसर्ग -दुर्
मूल शब्द -बल
प्रत्यय -ता
शब्द विशेषण
सिद्धांत सैद्धांतिक
निश्चय निश्चित
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अपठित भाग को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए .
साहित्य की शाश्वतता का प्रश्न एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। क्या साहित्य शाश्वत होता है? यदि हाँ तो किस मायने में? क्या कोई साहित्य अपने रचनाकाल के सौ वर्ष बीत जाने पर भी उतना ही प्रासंगिक रहता है, जितना वह अपनी रचना के समय था? अपने समय या युग का निर्माता साहित्यकार क्या सौ वर्ष बाद की परिस्थितियों का भी युग निर्माता हो सकता है? समय बदलता रहता है, परिस्थितियाँ और भावबोध बदलते रहते हैं. साहित्य बदलता है और इसी के समानान्तर पाठक की मानसिकता और अभिरुचि भी बदलती है। अतः कोई भी कविता अपने सामयिक परिवेश के बदल जाने पर ठीक वही उत्तेजना पैदा नहीं कर सकती जो उसने अपने रचनाकाल के दौरान की होगी। कहने का तात्पर्य यह है कि एक विशेष प्रकार के साहित्य के श्रेष्ठ अस्तित्व मात्र से वह साहित्य हर युग के लिए उतना ही विशेष आकर्षण रखे, यह आवश्यक नहीं है।
साहित्य की श्रेष्ठता मात्र ही उसके नित्य आकर्षण का आधार नहीं है। उसकी श्रेष्ठता का युग युगीन आधार हैं वे जीवन मूल्य तया उनकी अत्यंत कलात्मक अभिव्यक्ति जो मनुष्य की स्वतंत्रता तथा उच्चतर मानव विकास के लिए पथ-प्रदर्शक का काम करती है। पुराने साहित्य का केवल वही श्री-सौंदर्य हमारे लिए ग्राह्य होगा जो नवीन जीवन-मूल्यों के विकास में सहयोग दे अथवा स्थिति रक्षा में सहायक हो। कुछ लोग साहित्य की सामाजिक प्रतिबद्धता को अस्वीकार करते हैं। वे मानते हैं कि साहित्यकार निरपेक्ष होता है और उस पर कोई भी दबाव आरोपित नहीं होना चाहिए, किन्तु वे भूल जाते हैं कि साहित्य के निर्माण की मूल प्रेरणा मानव जीवन में ही विद्यमान रहती है। जीवन के लिए ही उसकी सृष्टि होती है। तुलसीदास जब स्वांत सुखाय काव्य रचना करते हैं तब अभिप्राय यह नहीं रहता कि मानव समाज के लिए इस रचना का कोई उपयोग नहीं है, बल्कि उनके अंतःकरण में संपूर्ण संसार की सुख-भावना एवं हित-कामना सन्निहित रहती है। जो साहित्यकार अपने संपूर्ण व्यक्तित्व को व्यापक लोक-जीवन में सन्निविष्ट कर देता है, उसी के हाथों स्थायी एवं प्रेरणाप्रद साहित्य का सृजन हो सकता है। संस्कृत के महाकवि कालिदास एवं मसि कागद ज्यों नहीं कलम गही नहि हाथ के उदघोषक भक्तिकालीन संत कबीर का साहित्य इसी कोटि में गणनीय है।
निम्नलिखित में से निर्देशानुसार सही विकल्प का चयन कीजिए :
(i) उपरोक्त गद्यांश किस विषयवस्तु पर आधारित है?
I.साहित्य में अंतर्विरोध
॥. साहित्य की उपादेयता
Ill तुलसी साहित्य
IV. वर्तमान साहित्य
उ: ॥. साहित्य की उपादेयता
(ii) युग परिवर्तन के साथ युगीन साहित्य की प्रासंगिकता कम क्यों हो जाती है?
I. भाषायी परिवर्तन के कारण
II. अन्य लेखकों के प्रभाव के कारण
Ill.भावबोध परिवर्तन के कारण
IV. उपर्युक्त में से कोई नहीं
उ: Ill.भावबोध परिवर्तन के कारण
(iii) पुराने साहित्य के प्रति अरुचि का कारण क्या है?
I. अभिरुचि परिवर्तन
II. परिस्थितियों में परिवर्तन
III. भावबोध परिवर्तन के कारण
IV. उपर्युक्त सभी
उ: IV. उपर्युक्त सभी
(iv) कोई भी साहित्य हमेशा एक-सी उत्तेजना क्यों नहीं पैदा कर सकता?
1. श्रेष्ठ अस्तित्व के कारण
॥ सामयिक परिवेश के बदल जाने से
III.प्राधीन होने के कारण
IV. उपर्युक्त सभी
उ: ॥ सामयिक परिवेश के बदल जाने से
(v) जीवन के विकास में पुराने साहित्य का कौन-सा अंश स्वीकार्य है?
1. जो सुगमतापूर्वक पठनीय हो।
॥. जो जीवन के विकास में पथ प्रदर्शक का काम करता हो।
III. जो प्राचीनता की ओर आकृष्ट करता हो।
IV. जिसमे आकर्षण हो।
उ: ॥. जो जीवन के विकास में पथ प्रदर्शक का काम करता हो।
(vi) तुलसीदास जैसे महान कवि की रचना 'स्वांत:सुखाय' होकर भी जन उपयोगी क्यों है?
I. अंतकरण मैं सुख-भावना निहित होने से
II. मनोरंजक होने के कारण
III.धार्मिक होने के कारण
IV. अवधी भाषा में लिखी होने के कारण
उ: I. अंतकरण मैं सुख-भावना निहित होने से
(vii) साहित्य सृजन का मुख्य उद्देश्य क्या होना चाहिए?
I. संसार की सुख-भावना
II. धन प्राप्ति की भावना
III.स्वांतः सुखाय
IV. मनोरंजन करना
उ: I. संसार की सुख-भावना
(VIII) कैसा साहित्यकार स्थायी प्रेरणास्पद साहित्य का निर्माणकर सकता है?
I. जो समयानुरूप लिखता हो।
II. व्यक्तिगत भावनाओं की अभिव्यक्ति करता हो।
III.जो व्यापक लोक जीवन को समाहित करता हो।
IV. जो धन प्राप्ति की इच्छा से लिखता हो।
उ: III.जो व्यापक लोक जीवन को समाहित करता हो।
(ix) कालिदास किस भाषा के कवि थे?
I. अपभ्रंश
II. हिन्दी
III. अवधी
IV. संस्कृत
उ: IV. संस्कृत
(x) मसि कागद छुयो नहीं कलम गही नहि हाथ। पंक्ति कबीर की कौन-सी विशेषता को उजागर
करती है?
I. उन्होंने विधिवत काव्य शिक्षा ग्रहण की।
II. वे निर्गुण ईश्वर के उपासक थे।
III. उनकी विधिवत शिक्षा-दीक्षा नहीं हुई थी।
IV. वे मसि कागद को नहीं छूते थे
उ: III. उनकी विधिवत शिक्षा-दीक्षा नहीं हुई थी।
III.जो व्यापक लोक जीवन को समाहित करता हो।
IV. जो धन प्राप्ति की इच्छा से लिखता हो।
उ: III.जो व्यापक लोक जीवन को समाहित करता हो।
(ix) कालिदास किस भाषा के कवि थे?
I. अपभ्रंश
II. हिन्दी
III. अवधी
IV. संस्कृत
उ: IV. संस्कृत
(x) मसि कागद छुयो नहीं कलम गही नहि हाथ। पंक्ति कबीर की कौन-सी विशेषता को उजागर
करती है?
I. उन्होंने विधिवत काव्य शिक्षा ग्रहण की।
II. वे निर्गुण ईश्वर के उपासक थे।
III. उनकी विधिवत शिक्षा-दीक्षा नहीं हुई थी।
IV. वे मसि कागद को नहीं छूते थे
उ: III. उनकी विधिवत शिक्षा-दीक्षा नहीं हुई थी।
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अपठित भाग को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए .
संस्कृति और सभ्यता - ये दो शब्द हैं और उनके अर्थ भी अलग-अलग हैं। सभ्यता मनुष्य का वह गुण है, जिससे वह अपनी बाहरी तरक्की करता है। संस्कृति वह गुण है जिससे वह अपनी भीतरी उन्नति करता है, करुणा, प्रेम और परोपकार सीखता है। आज रेलगाडी, मोटर और हवाई जहाज, लंबी-चौड़ी सड़कें और बड़े-बड़े मकान, अच्छा भोजन और अच्छी पोशाक, ये सभ्यता की पहचान है और जिस देश में इनकी जितनी ही अधिकता है उस देश को हम उतना ही सभ्य मानते हैं। मगर संस्कृति इन सबसे बारीक चीज़ है। वह मोटर नहीं, मोटर बनाने की कला है, मकान नहीं, मकान बनाने की रुचि है।
संस्कृति धन नहीं, गुण है। संस्कृति ठाठ-बाट नहीं, विनय और विनम्रता है। एक कहावत है कि सभ्यता वह चीज़ है जो हमारे पास है, लेकिन संस्कृति वह गुण है जो हममे छिपा हुआ है। हमारे पास घर होता है, कपड़े-लत्ते होते हैं, मगर ये सारी चीजें हमारी सभ्यता के सबूत हैं, जबकि संस्कृति इतने मोटे तौर पर दिखलाई नहीं देती, वह बहुत ही सूक्ष्म और महीन चीज़ है और वह हमारी हर पसंद. हर आदत में छिपी रहती है। मकान बनाना सभ्यता का काम है, लेकिन हम मकान का कौन-सा नक्शा पसंद करते हैं-यह हमारी संस्कृति बतलाती है। आदमी के भीतर काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर ये छ: विकार प्रकृति के दिए हुए हैं। अगर ये विकार बेरोक छोड़ दिए जाएँ तो आदमी इतना गिर जाए कि उसमें और जानवर में कोई भेद नहीं रह जाए इसलिए आदमी इन विकारों पर रोक लगाता है। इन दुर्गुणों पर जो आदमी जितना ज्यादा काबू कर पाता है, उसकी संस्कृति भी उतनी ही ऊँची समझी जाती है। संस्कृति का स्वभाव है कि वह आदान प्रदान से बढ़ती है। जब दो देशों या जातियों के लोग आपस में मिलते हैं तब उन दोनों की संस्कृतियाँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। इसलिए संस्कृति की दृष्टि से वह जाति या वह देश बहुत ही धनी समझा जाता है जिसने ज्यादा-से-ज्यादा देशी या जातियों की संस्कृतियों से लाभ उठाकर अपनी संस्कृति का विकास किया हो। भारतीय संस्कृति प्राचीन काल से ही अनेकानेक मान्यताओं, धर्मों, भाषाओं की साझी विरासत रही है।
निम्नलिखित में से निर्देशानुसार सही विकल्प का चयन कीजिए :-
(i) उपरोक्त गद्यांश किस विषयवस्तु पर आधारित है?
I. संस्कृति एवं संस्कार
II. संसाधन और विकास
IIl. साहित्य का महत्व
IV. सभ्यता और संस्कृति
उ: IV. सभ्यता और संस्कृति
(ii) करूणा, प्रेम, परोपकार निम्न में से किस गुण के अंतर्गत आते हैं?
1. संस्कृति
II. सभ्यता
III. पवित्रता
IV. सभ्यता और संस्कृति
उ: 1. संस्कृति
(iii) निम्नलिखित में से सभ्यता की पहचान कौन-सी चीजें नहीं हैं?
I. भव्य इमारते
II. हवाई जहाज़, लंबी-चौड़ी सड़के
III. नैतिक मूल्य
IV. वस्त्र-आभूषण
उ: III. नैतिक मूल्य
(iv) लेखक का संस्कृति को भौतिक वस्तु न मानने का क्या कारण है?
I. यह आंतरिक गुण है।
II. यह बाहरी गुण है।
III. यह दृश्यमान वस्तु है।
IV. यह भौतिक वस्तु है।
उ: I. यह आंतरिक गुण है।
(v) आदमी के भीतर कितने विकार होते हैं?
I. चार
II. छह
III. तीन
IV. पाँच
उ: II. छह
(vi) मनुष्य अपने विकारों पर काबू नहीं करे तो क्या होगा?
I. संस्कृत मानव कहलाएगा ।
II. सभ्य कहलाएगा
III. उन्नति को प्राप्त होगा।
IV. संस्कृति से पतित हो जाएगा।
उ: IV. संस्कृति से पतित हो जाएगा।
(vii) अपनी संस्कृति को विकसित करने के लिए कौन-सा प्रयास अपेक्षित होगा?
I. सांस्कृतिक आदान प्रदान
II. अन्य देशों से संबंध सुदृढ़ करना
III. विभिन्न संस्कृतियों की अच्छाइयों को स्वीकारना
IV. उपर्युक्त सभी
उ: IV. उपर्युक्त सभी
(viii) कौन-सी जाति या देश अधिक संस्कृत समझे जाते हैं?
I. जो उच्च नैतिक मूल्य अपनाते हो।
II. जिनके पास अधिक संसाधन हो।
III. जो दूसरे की संस्कृति पर हावी हो।
IV. जो प्राचीनतम हो।
उ: I. जो उच्च नैतिक मूल्य अपनाते हो।
(ix) भारतीय संस्कृति की क्या विशेषता रही है?
I. यहाँ एकत्व का अभाव रहा है।
II. विभिन्न संस्कृतियों की साझी विरासत है।
III. अनेक धर्मों को स्वीकृति नहीं है।
IV. सभ्यता और संस्कृति का विकास नहीं है।
उ: ॥ विभिन्न संस्कृतियों की साझी विरासत है।
(x) किसी देश या जाति को अधिक सभ्य किस आधार पर कहा जाता है?
I. जब वह भौतिक रूप से सशक्त हो।
II. जब वह सांस्कृतिक रूप से सशक्त हो।
III. जब साहित्यिक रूप से सशक्त हो।
IV. दया, प्रेम, करुणा का विकास हो।
उ : I. जब वह भौतिक रूप से सशक्त हो।
III. पवित्रता
IV. सभ्यता और संस्कृति
उ: 1. संस्कृति
(iii) निम्नलिखित में से सभ्यता की पहचान कौन-सी चीजें नहीं हैं?
I. भव्य इमारते
II. हवाई जहाज़, लंबी-चौड़ी सड़के
III. नैतिक मूल्य
IV. वस्त्र-आभूषण
उ: III. नैतिक मूल्य
(iv) लेखक का संस्कृति को भौतिक वस्तु न मानने का क्या कारण है?
I. यह आंतरिक गुण है।
II. यह बाहरी गुण है।
III. यह दृश्यमान वस्तु है।
IV. यह भौतिक वस्तु है।
उ: I. यह आंतरिक गुण है।
(v) आदमी के भीतर कितने विकार होते हैं?
I. चार
II. छह
III. तीन
IV. पाँच
उ: II. छह
(vi) मनुष्य अपने विकारों पर काबू नहीं करे तो क्या होगा?
I. संस्कृत मानव कहलाएगा ।
II. सभ्य कहलाएगा
III. उन्नति को प्राप्त होगा।
IV. संस्कृति से पतित हो जाएगा।
उ: IV. संस्कृति से पतित हो जाएगा।
(vii) अपनी संस्कृति को विकसित करने के लिए कौन-सा प्रयास अपेक्षित होगा?
I. सांस्कृतिक आदान प्रदान
II. अन्य देशों से संबंध सुदृढ़ करना
III. विभिन्न संस्कृतियों की अच्छाइयों को स्वीकारना
IV. उपर्युक्त सभी
उ: IV. उपर्युक्त सभी
(viii) कौन-सी जाति या देश अधिक संस्कृत समझे जाते हैं?
I. जो उच्च नैतिक मूल्य अपनाते हो।
II. जिनके पास अधिक संसाधन हो।
III. जो दूसरे की संस्कृति पर हावी हो।
IV. जो प्राचीनतम हो।
उ: I. जो उच्च नैतिक मूल्य अपनाते हो।
(ix) भारतीय संस्कृति की क्या विशेषता रही है?
I. यहाँ एकत्व का अभाव रहा है।
II. विभिन्न संस्कृतियों की साझी विरासत है।
III. अनेक धर्मों को स्वीकृति नहीं है।
IV. सभ्यता और संस्कृति का विकास नहीं है।
उ: ॥ विभिन्न संस्कृतियों की साझी विरासत है।
(x) किसी देश या जाति को अधिक सभ्य किस आधार पर कहा जाता है?
I. जब वह भौतिक रूप से सशक्त हो।
II. जब वह सांस्कृतिक रूप से सशक्त हो।
III. जब साहित्यिक रूप से सशक्त हो।
IV. दया, प्रेम, करुणा का विकास हो।
उ : I. जब वह भौतिक रूप से सशक्त हो।
apathit gadyansh with answers
अपठित भाग को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए .
विज्ञान आज के मानव-जीवन का अविभाज्य एवं घनिष्ठ अंग बन गया है. मानव-जीवन का कोई भी क्षेत्र विज्ञान के अभूतपूर्व अविष्कारों से अछूता नहीं रहा. इसी कारण से आधुनिक युग विज्ञान का युग कहलाता है.आज विज्ञान ने पुरुष और नारी,साहित्यकार और राजनीतिज्ञ,उद्योगपति और कृषक,चिकित्सक और सैनिक,पूँजीपति और श्रमिक,अभियंता, शिक्षक और धर्मज्ञ सभी को और सभी क्षेत्रों में किसी-न-किसी रूप में अपने अप्रतिम प्रदेय से अनुग्रहीत किया है. आज समूचा परिवेश विज्ञानमय हो गया है. विज्ञान के प्रभाव किसी गृहणी के रसोईघर से लेकर बड़ी-बड़ी प्राचीरों वाले भवनों और अट्टालिकाओं में ही दृष्टिगत नहीं होते ,अपितु वे जल-थल की सीमाओं को लांघकर अंतरिक्ष में भी विद्यमान हैं. वस्तुतः विज्ञान अद्यतन मानव की सबसे बड़ी शक्ति बन गया है. इसके बल से मनुष्य प्रकृति और प्राणिजगत का शिरोमणि बन सका है . विज्ञान के अनुग्रह से वह सभी प्रकार की सुविधाओं एवं संपदाओं का स्वामित्व प्राप्त कर चुका है. अब वह मौसम और ऋतुओं के प्रकोप से भयाक्रांत एवं संत्रस्त नहीं है. विद्युत् ने उसे आलोकित किया है,उष्णता एवं शीतलता दी है,बटन दबाकर किसी भी कार्य को संपन्न करने की ताकत भी दी है. मनोरंजन के विविध साधन उसे सुलभ हैं. यातायात एवं संचार के साधनों के विकसित एवं उन्नत होने से समय और दूरियां बहुत कम हो गयी हैं और समूचा विश्व एक कुटुंब सा लगने लगा है . कृषि एवं उद्योग के क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ने के कारण आज दुनिया पहले से अधिक धन-धान्य से संपन्न है. शिक्षा एवं चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान की देन अभिनंदनीय है. विज्ञान के सहयोग से मनुष्य धरती और समुद्र के अनेक रहस्य हस्तामलक करके अब अन्तरिक्ष लोक में प्रवेश कर चुका है. सर्वोपरि,विज्ञान ने मनुष्य को बौद्धिक विकास प्रदान किया है और वैज्ञानिक चिंतन पद्धति दी है. वैज्ञानिक चिंतन पद्धति से मनुष्य अंधविश्वासों और रूढ़िवादी परम्पराओं से मुक्त होकर स्वस्थ एवं संतुलित ढंग सोच-विचार कर सकता है और यथार्थ एवं सम्यक जीवन जी सकता है. इससे मनुष्य के मन को युगों के अंधविश्वासों, भ्रमपूर्ण और दकियानूसी विचारों, भय और अज्ञानता से मुक्ति मिली है. विज्ञान की यह देन स्तुत्य है. मानव को चाहिए की वह विज्ञान की इस समग्र देन को रचनात्मक कार्यों में सुनियोजित करें.
निम्नलिखित में से निर्देशानुसार विकल्प का चयन कीजिए -
1)आज विज्ञान को मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग क्यों माना जाता है-
(i) विज्ञान के आविष्कार अभूतपूर्व हैं
(ii) विज्ञान ने सभी क्षेत्रों में मानव को प्रभावित किया है
(iii) विज्ञान ने आर्थिक उन्नति प्रदान की है
(iv) आधुनिक युग विज्ञान का युग है
उत्तर- (ii) विज्ञान ने सभी क्षेत्रों में मानव को प्रभावित किया है
2)किसके बल पर मनुष्य प्रकृति और प्राणिजगत का शिरोमणि बन सका है-
(i) स्वयं के
(ii) साधनों के
(iii) विज्ञान के
(iv)सत्ता के
उत्तर - (iii) विज्ञान के
3) वैज्ञानिक चिंतन पद्धति ने मनुष्य को सबसे पहले किससे मुक्ति दिलाई-
(i) संतुलित अनुचिंतन
उत्तर - (iii) विज्ञान के
3) वैज्ञानिक चिंतन पद्धति ने मनुष्य को सबसे पहले किससे मुक्ति दिलाई-
(i) संतुलित अनुचिंतन
(ii) प्राचीन सांस्कृतिक परम्पराओं
(iii) औपचारिकताओं
(iii) औपचारिकताओं
(iv) भ्रमपूर्ण रूढ़िवादी विचार
उत्तर - (iv) भ्रमपूर्ण रूढ़िवादी विचार
(4) विज्ञान के चरण गतिशील क्यों कहे जा सकते हैं-
(i) विज्ञान की तीव्र गति के कारण
(ii) यातायात के साधन अविष्कृत करने के कारण
(iii) विज्ञान के उत्तरोत्तर विभिन्न दिशाओं में उन्मुख होने के कारण
(iv) प्रगतिशील विचारधारा के कारण
उत्तर- (iii) विज्ञान के उत्तरोत्तर विभिन्न दिशाओं में उन्मुख होने के कारण
(5) समूचा विश्व एक परिवार के सामान लगने का क्या कारण है-
(i) विज्ञान की गतिशील शक्ति
(ii) विज्ञान और जीवन में घनिष्ठता
(iii) यातायात और संचार के साधनों का विकास
(iv) विश्वबंधुत्व की भावना का विकास
उत्तर- iii) यातायात और संचार के साधनों का विकास
(6) विज्ञान के सहयोग से मनुष्य ने कहाँ प्रवेश कर लिया है-
(i) मनुष्य के ह्रदय में
उत्तर - (iv) भ्रमपूर्ण रूढ़िवादी विचार
(4) विज्ञान के चरण गतिशील क्यों कहे जा सकते हैं-
(i) विज्ञान की तीव्र गति के कारण
(ii) यातायात के साधन अविष्कृत करने के कारण
(iii) विज्ञान के उत्तरोत्तर विभिन्न दिशाओं में उन्मुख होने के कारण
(iv) प्रगतिशील विचारधारा के कारण
उत्तर- (iii) विज्ञान के उत्तरोत्तर विभिन्न दिशाओं में उन्मुख होने के कारण
(5) समूचा विश्व एक परिवार के सामान लगने का क्या कारण है-
(i) विज्ञान की गतिशील शक्ति
(ii) विज्ञान और जीवन में घनिष्ठता
(iii) यातायात और संचार के साधनों का विकास
(iv) विश्वबंधुत्व की भावना का विकास
उत्तर- iii) यातायात और संचार के साधनों का विकास
(6) विज्ञान के सहयोग से मनुष्य ने कहाँ प्रवेश कर लिया है-
(i) मनुष्य के ह्रदय में
(ii) अंतरिक्ष में
(iii) विदेशों में
(iv) समुद्र में
उत्तर-(ii) अंतरिक्ष में
(7) वैज्ञानिक चिंतन पद्धति के प्रभाव से मनुष्य कैसा जीवन जी सकता है-
(i) यथार्थ
उत्तर-(ii) अंतरिक्ष में
(7) वैज्ञानिक चिंतन पद्धति के प्रभाव से मनुष्य कैसा जीवन जी सकता है-
(i) यथार्थ
(ii) सम्यक
(iii) i और ii दोनों
(iv) बनावटी
उत्तर- (iii) (i) और (ii) दोनों
(8) मानव से विज्ञान की देन को किन कार्यों में नियोजित करने की अपेक्षा है-
(i) लाभप्रद
उत्तर- (iii) (i) और (ii) दोनों
(8) मानव से विज्ञान की देन को किन कार्यों में नियोजित करने की अपेक्षा है-
(i) लाभप्रद
(ii) सहयोगप्रद
(iii) रचनात्मक
(iv) विध्वंसात्मक
उत्तर-(iii) रचनात्मक
(9) लेखक की दृष्टि में विज्ञान की सबसे बड़ी दें क्या है-
(i) संचार सुविधाएँ
उत्तर-(iii) रचनात्मक
(9) लेखक की दृष्टि में विज्ञान की सबसे बड़ी दें क्या है-
(i) संचार सुविधाएँ
(ii) विद्युत् का अविष्कार
(iii) वैज्ञानिक चिंतन पद्धति
(iii) वैज्ञानिक चिंतन पद्धति
(iv) चिकित्सा और शिक्षा की सुविधाएँ
उत्तर- (iv) चिकित्सा और शिक्षा की सुविधाएँ
(10) प्रस्तुत गद्यांश किस विषयवस्तु पर आधारित है-
(i) विज्ञान का मानव जीवन पर प्रभाव
(ii) वैज्ञानिक चिंतन और मानव
(iii) विज्ञान के गतिशील चरण
(iv) विज्ञान के आविष्कार
उत्तर-(ii) वैज्ञानिक चिंतन और मानव
उत्तर- (iv) चिकित्सा और शिक्षा की सुविधाएँ
(10) प्रस्तुत गद्यांश किस विषयवस्तु पर आधारित है-
(i) विज्ञान का मानव जीवन पर प्रभाव
(ii) वैज्ञानिक चिंतन और मानव
(iii) विज्ञान के गतिशील चरण
(iv) विज्ञान के आविष्कार
उत्तर-(ii) वैज्ञानिक चिंतन और मानव
जय हिन्द : जय हिंदी
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