प्रकाश का अपवर्तन क्या है ?

 प्रकाश का अपवर्तन


[REFRACTION OF LIGHT]


         जब कभी प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है तो वह अपने मार्ग से विचलित हो जाता है। प्रकाश के इस गुण को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं। यह बात हम इकाई 1.1 में पढ़ चुके हैं। प्रकाश किसी समांग पारदर्शी माध्यम में सीधी रेखा में चलता है लेकिन जब प्रकाश एक समांग पारदर्शी माध्यम से चलकर दूसरे माध्यम के सीमा पृष्ठ पर पहुँचता है तो प्रकाश का कुछ भाग सीमा पृष्ठ से टकराकर पहले ही माध्यम में लौट आता है तथा शेष भाग दूसरे माध्यम में प्रवेश कर जाता है। पहले ही माध्यम में लौट जाने वाले प्रकाश को परावर्तित प्रकाश व दूसरे माध्यम में प्रवेश कर जाने वाले प्रकाश को अपवर्तित प्रकाश कहते हैं। जब कोई प्रकाश किरण दोनों माध्यमों को अलग N करने वाले तल पर अभिलम्बवत् आपतित होती है तो वह दूसरे माध्यम

में बिना विचलित हुए प्रवेश कर जाती है, लेकिन तिरछी आपतित होने पर वह अपने मार्ग से विचलित हो जाती है। चित्र 1.10 में, वायु से काँच में जाने पर प्रकाश के अपवर्तन को दिखाया गया है।

A किरण IO, OR व OR' क्रमशः आपतित, परावर्तित व अपवर्तित किरण कहलाती हैं। तथा NON' अभिलम्ब कहलाता है। आपतित किरण और अभिलम्ब के बीच के कोण को आपतन कोण, परावर्तित किरण और अभिलम्ब के बीच के कोण को परावर्तन कोण तथा अपवर्तित किरण और अभिलम्ब के बीच के कोण को अपवर्तन कोण कहते हैं।

प्रयोगों के द्वारा यह देखा जा चुका है कि जब कोई प्रकाश किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह अभिलम्ब की और झुक जाती है तथा जब सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो अभिलम्ब से दूर हट जाती है।

अपवर्तन के नियम (Laws of Refraction)


 प्रकाश का अपवर्तन निम्नलिखित दो नियमों का पालन करता है -

    (1) आपतित किरण, अपवर्तित किरण और आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब, सभी एक ही तल में होते हैं। (2) किन्हीं दो माध्यमों के लिए तथा एक-वर्णी (एक निश्चित रंग) प्रकाश के लिए) आपतन कोण कीज्या  तथा अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात एक नियतांक होता है। यदि आपतन कोण । व अपवर्तन कोण r हों, तब इस नियमानुसार,

...(1)

इस नियम को स्नैल का नियम कहते हैं क्योंकि इसे विलब्रोड स्नैल्स (Willebrod Snellius) ने खोजा था। यह नियतांक पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक कहलाता है तथा इसको n या ।। से प्रदर्शित करते हैं। यदि पहले माध्यम को 1 से तथा दूसरे माध्यम को 2 से प्रदर्शित करें, तो पहले माध्यम 

यदि प्रकाश का मार्ग उल्टा हो जाए ( अपवर्तन माध्यम 2 से माध्यम 1 में हो ) तो प्रकाश उत्क्रमणीयता 
सिद्धांत से,

यदि पहला माध्यम जिसमें आप आपतित किरण होती है, निर्वात हो तो दूसरे माध्यम का इसके सापेक्ष अपवर्तनांक, दूसरे माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक कहलाता है जिसे हम माध्यम का अपवर्तनांक भी कहते है। किसी पदार्थ का अपवर्तनांक, पदार्थ का एक विशिष्ट गुण होता है। विभिन्न पदार्थो के अपवर्तनांक भिन्न भिन्न होते हैं तथा किसी पदार्थ का अपवर्तनांक विभिन्न रंगों के प्रकाश के लिए भी भिन्न होता है।

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