एक कोशिश: नीलू शर्मा, देवेंद्र नगर, इंदौर

एक कोशिश 


एक कोशिश है अपनी, सपनों को दूँ मैं रूप नया  
एक कोशिश है अरमानों को, लफ्जों को दूँ मैं रूप नया 
समंदर के विशाल खजाने से, लाऊँ एक मोती नया 
आसमान से तोडूं तारे या बना दूँ इक चाँद नया 

एक कोशिश है अपनी, सपनों को दूँ मैं रूप नया 
कल्पना से परे, कुछ ऐसा कर गुजर जाऊं 
हो दुनिया अपनी जेब में, आकाश अपनी मुट्ठी में
खाली कैनवास पर कुछ अक्स उकेरु नए नए 
इंद्रधनुष के रंगों से या रंग दूँ फिर संसार नया 

एक कोशिश है अपनी, सपनों को दूँ मैं रूप नया  
शब्दों की रचना करने को रच दूँ फिर कोई शब्द नया
सात सुरों की सरगम छेड़ू और बना दूँ एक राग नया 

एक कोशिश है अपनी, सपनों को दूँ मैं रूप नया 
एक साया सा है साथ मेरे, कहता है मुझको 
करती रहो 'कोशिश' तुम कोशिश नयी

हो ख्वाब पूरा, पा सको सभी तुम 
ये चाँद तारे क्या आसमां तेरा 
क्या अंबर क्या आकाश तेरा 
ये दुनिया ये जहान तेरा
ये दुनिया ये जहान तेरा.!

 -नीलू शर्मा, देवेंद्र नगर, इंदौर, मप्र

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