‘उलूक’ लिखता है बहुत कुछ दिखता है खुद की चार सौ बीसी कहाँ कब लिख पाता है है कहीं आईना जो बताता है
एक ने
दो के कान मे
फुसफुसाया
लिखे लिखाये को
गौर से देख
लिखे लिखाये से
लिखने वाले के बारे में
सब कुछ पता हो जाता है
दो ने
किसी एक
लिखने लिखाने वाले को
खटखटाया
जी मैंने कुछ लिखा है
कुछ आप ने मेरे बारे में
मुझे अब तक क्यों नहीं है बताया
अजब गजब संसार है
चिट्टों और चिट्ठाकारों का
लिखना लिखाना
चिट्ठे टिप्पणी
चर्चा
लिंक लेना लिंक देना
पसंद अपनी अपनी
अपने हिसाब से
करीने से लिखने लिखाने को
प्रमाण पत्र दे कर आभारी कर करा लेना
अब दो को
कौन समझाये
कौन समझाये
कि
लिखने वाला
लिखने वाला
कभी अपनी कहानी
किसी को नहीं बताता है
कहीं से
एक आधा या पूरा घड़ा लाकर
यहाँ फोड़ जाता है
सबसे बड़ा बेवकूफ
वो है
वो है
जिसे लिखे लिखाये पर
लेखक का चेहरा नजर आता है
सच कह रहा हूँ
कब से लिख रहा हूँ
इधर का उधर का लाकर
यहाँ फैलाता हूँ
एक भी पन्ना देख कर
आप नहीं कह पायेँगे
‘उलूक’ के लिखे लिखाये से
वो चार सौ बीस
जानता है अपने बारे में
कि वो है
कोई दिखा दे उसके
किसी
लिखे पन्ने पर
लिखे पन्ने पर
उसका
चार सौ बीस लिखा
हस्ताक्षर नजर अगर उसे आता है

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