विश्व गौरैया दिवस : 𝚆𝙾𝚁𝙻𝙳 𝚂𝙿𝙰𝚁𝚁𝙾𝚆 𝙳𝙰𝚈

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आज विश्व गौरैया दिवस है। यह हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है। गौरैया के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए साल 2010 में इस दिवस को मनाने की शुरुआत की गई थी। पिछले कुछ समय से गौरैया की संख्या में काफी कमी आई है।

विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day) हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है। विश्व के कई देशों में गौरैया पाई जाती है। यह दिवस लोगों में गौरेया के प्रति जागरुकता बढ़ाने और उसके संरक्षण के लिए मनाया जाता है। बढ़ते प्रदूषण सहित कई कारणों से गौरैया की संख्या में काफी कमी आई है और इनके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

📌 जानिये भारत में गौरेया की क्या है स्थिति :

प्रत्येक वर्ष 20 मार्च 2020 को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। इस पक्षी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसके संरक्षण के लिए विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। गौरैया भारत में पाया जाने वाला एक सामान्य पक्षी है लेकिन इसे शहरी क्षेत्रों में विलुप्त होने के कगार पर पहुँचा दिया गया है।

"द नेचर फॉर सोसाइटी ऑफ इंडियन एनवायरनमेंट" के संयोजक मोहम्मद दिलावर ने गौरेया की जनसंख्या में तेजी से गिरावट को देखते हुए यह पहल शुरू की। पहला विश्व गौरैया दिवस 2010 में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मनाया गया था।

रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, मनुष्यों और गौरैया के बीच 11,000 साल पुराना संबंध है। अध्ययन में कहा गया है कि तीन अलग-अलग प्रजातियों - कुत्तों, घरेलू गौरैया और मनुष्यों में कृषि के माध्यम से समान अनुकूलन शुरू हुआ था।

⌛️ विश्व गौरैया दिवस का इतिहास :

विश्व गौरैया दिवस, नेचर फॉरएवर सोसाइटी ऑफ इंडिया के साथ-साथ फ्रांस की इकोसेज एक्शन फाउंडेशन की शुरू की गई एक पहल है। सोसाइटी की शुरुआत फेमस पर्यावरणविद् मोहम्मद दिलावर ने की थी। उन्हें 2008 में टाइम मैगजीन ने "हीरोज ऑफ एनवायरमेंट" में शामिल किया गया था। साल 2010 में पहली बार 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया गया। इसके बाद हर साल 20 मार्च को यह दिवस मनाया जाता है। इस दिवस पर गौरैया के संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों को गौरैया पुरस्कार से सम्मानित भी किया जाता है।

▪️ गौरैया से जुडे कुछ रोचक तथ्य :

गौरैया का वैज्ञानिक नाम पासर डोमेस्टिकस और सामान्य नाम हाउस स्पैरो है। इसकी ऊंचाई 16 सेंटीमीटर और विंगस्पैन 21 सेंटीमीटर होते हैं। गौरैया का वजन 25 से 40 ग्राम होता है। गौरैया अनाज और कीड़े खाकर जीवनयापन करती है। शहरों की तुलना में गांवों में रहना इसे ज्यादा पसंद है।

▪️ कम हो रही है गौरैया की संख्या :

गौरैया की संख्या लगातार कम होती जा रही है. एस स्टडी के अनुसार इसकी संख्या में 60 फीसदी तक कमी आई है। विश्व गौरैया दिवस मनाने का एक उद्देशय यह भी है कि हमारे युवा और प्रकृति के प्रति उत्साही लोगों को गौरैया से प्रेम करने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

 ▪️ भारत में गौरैया की स्थिति :

रॉयल सोसाइटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड्स के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले 40 वर्षों में अन्य पक्षियों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन भारत में गौरैया की संख्या में 60% की कमी आई है। दुनिया भर में गौरैया की 26 प्रजातियां हैं, जबकि उनमें से 5 भारत में पाई जाती हैं।

वर्ष 2015 की पक्षी जनगणना के अनुसार, लखनऊ में केवल 5692 और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में लगभग 775 गौरैया थीं। वर्ष 2017 में, तिरुवनंतपुरम में केवल 29 गौरैया की पहचान की गई थी।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि आंध्र प्रदेश में इसकी संख्या में 80% की कमी आई है। केरल, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में 20% तक की गिरावट देखी गई है।

▪️ पृष्ठभूमि 

विश्व गौरैया दिवस पहली बार 2010 में नेचर फॉरएवर सोसायटी के अध्यक्ष मोहम्मद दिलावर के प्रयासों से मनाया गया था। तब से, यह दिवस प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य गौरैया के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता लाना है।

▪️ गौरैया का महत्व :

पर्यावरण संतुलन में गौरैया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गौरैया अपने बच्चों को अल्फ़ा और कैटवॉर्म नामक कीड़े खिलाती है। ये कीड़े फसलों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। वे फसलों की पत्तियों को मारकर नष्ट कर देते हैं। इसके अलावा, गौरैया मानसून के मौसम में दिखाई देने वाले कीड़े भी खाती है।

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