हिंदी चाय शायरी | Chai Par Shayari | Chai Shayari in Hindi

Chai Shayari in Hindi

चाय किसे नहीं पसंद यहाँ प्यार के आशिक़ से ज्यादा चाय के आशिक़ पाए जाते हैं क्यों नहीं पाए जायेंगे सुबह सुबह ३ करोड़ कप जो पिये जाते हैं। 
So Hey Chai Lovers Yaha Aap Dekhenge Best Of The Quotes on Chai, Chai Shayari, Chai Quotes So Read Respectfully :) And Enjoy Your Day.

हिंदी चाय शायरी


आज उसके गाल चूमे तो अंदाजा हुआ ,
चाय अच्छी हैं बस थोड़ा सा मीठा तेज हैं। 


हथेली पे जान मत लाओ यारो 
हिज्र की रात हैं चाय , सिगरेट ले आओ। 


रंग सावला, चाय की दीवानी हैं ,
मेरे महबूब की बस इतनी सी कहानी हैं। 

चाय शायरी


चाय का जायका का तो ऐसे पहचानते हैं ,
जैसे तुझे आज से नहीं बरसो से जानते हैं। 


बात बात पर मुँह बनाने वाली चाहिए ,
चाय और मैगी तो मैं खुद बना लेता हूँ। 

चाय शायरी | Chai Par Shayari | Chai Shayari in Hindi

सिर्फ चाय की भाषा समझते हैं 
हम लड़के हैं जरा अलग किस्म के हैं। 

Chai Par Shayari


चाय बना कर रख दी सामने ,
और पूछती हैं "मैं तुम्हे पसंद तो हु ना ". 


हिंदी बनु मैं तेरी , तू मेरी अंग्रेजी बन जा ,
तू मेरी शाम की चाय Parle-G  बन जा। 


एक सुबह की एक शाम की होनी चाहिए 
चाय हो या मोहब्बत तेरे नाम की होनी चाहिए। 


रात भर लड़ते रहे हम दोनों , सुबह उसने 
भी चाय बना दी और मैंने भी गले लगा दिया। 

Chai Par Shayari


दो दिन क्या बिताये कॉफ़ी के साथ ,
चाय ने तो हमे बेवफा करार दिया। 
 
चाय शायरी | Chai Par Shayari | Chai Shayari in Hindi


चाय हो और टोस्ट ना हो ,
जैसे ज़िंदगी तो हो पर दोस्त ना हो। 


चाय के बिना जो गुजार दी तुमने ,
वो ज़िंदगी, ज़िंदगी ही नहीं। 

Chai Shayari in Hindi


वो चाय सी सवाली लड़की,
मुझे मैगी सा उलझा के रखती थी। 


मैं गर तनहा हु तो चाय हमनवा हैं ,
मैं गर बीमार हु तो दवा चाय हैं। 


तू अपनी चाय  मुझे बचा कर दे ,
ए काश , मैं तेरा इतना लाडला हो जाऊ। 

 
तेरी याद आती रहेगी बार बार ,
हम भी चाय पर चाय पीते रहेंगे। 


चाय शायरी


घायल तो यहाँ हर  परिंदा हैं ,
मगर जो चाय पीता हैं व्ही ज़िंदा हैं। 


ये तनहा राते , ये बारिशो के दिन 
उफ्फ एक और चाय तुम्हारे बिन। 


याद बनकर जो मेरे साथ चाय पीते हो तुम ,
उस अहसास का सो बार सुक्रिया।।

चाय शायरी | Chai Par Shayari | Chai Shayari in Hindi

महक ,रंगत, जायका सब दरकिनार करो 
इश्क़ कितना मिलाया हैं चाय में ये पूछो। 

चाय शायरी


सावली शाम की तरह हैं वो ,
वो न गोरो में हैं , न कालो में। 


सच कहु बड़ा सीधा सा लड़का हु ,
तुम ने चाय पीला दी तुम्हारा हो गया। 


वक्त बदला मगर इंसान नहीं डगमगाया 
पिता ने मुझे खुद्दारी वाली चाय पीना सिखाया। 

चाय शायरी


अपनी अपनी फितरत हैं साहब......, उसने 
बेवफाई नहीं छोड़ी हमने चाय नहीं छोड़ी। 


कभी खुशनुमा तो कभी गम करेंगे 
चाय पि लेंगे और आँख  नम करेंगे। 


जितना भी मिला तुमसे उस प्यार का सुक्रिया 
साथ चाय पे मिले सोम, मंगल...इतवार का सुक्रिया। 


चाय शायरी

 
तेरे झुमको की झनक और पायल की खनक ,
तेरी चूड़े की चनक और चाय की महक, काफी हैं मेरी 
शाम को हसीं बनाने के लिए। 


एक ऐसा फुर्सत का इतवार हो 
तुम हो चाय और  अख़बार हो... !!

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