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मोबाइल का बच्चों पर प्रभाव | Bacho Ko Mobile Se Nuksan


विकास और प्रौद्योगिकी के इस बदलते दौर में मोबाइल मानव जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है। एक पल के लिए भी कोई इसे खुद से दूर नहीं करना चाहता है। इसी का नतीजा है कि माता-पिता की देखा-देखी आज छोटे-छोटे बच्चे भी इसके आदी हो गए हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लाड-प्यार के कारण आपने जिस उपकरण को अपने बच्चे की जिंदगी में दाखिल किया है, आगे चलकर वह आपके बच्चे की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी विषय को ध्यान में रखते हुए हम मॉमजंक्शन के इस लेख में आपको बच्चों में मोबाइल की लत के कारण, इसके जोखिम कारक और इसे छुड़ाने के कुछ उपाय संबंधी जानकारी देने जा रहे हैं।


अन्य विषयों के संबंध में जानकारी हासिल करने से पहले हम बच्चों में मोबाइल के प्रति आकर्षण के कारण को जान लेते हैं।


क्यों बच्चे मोबाइल से इतना अट्रैक्ट होते हैं?


विशेषज्ञों के मुताबिक 6 माह के नवजात तरह-तरह के चित्र और रंगों को देखकर आकर्षित होते हैं (1)। यही कारण है कि मोबाइल के प्रति बच्चों का रुझान बढ़ जाता है। मोबाइल से निकलने वाली रोशनी और उस पर नजर आने वाले चित्र बच्चों को अपनी ओर खींचते हैं। साथ ही मोबाइल की आवाज भी बच्चों में उसके बारे में जानने और उसे छूने की उत्सुकता पैदा करती है।

लेख के आगे के भाग में हम मोबाइल से बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानेंगे।


मोबाइल का बच्चों पर पड़ता दुष्प्रभाव | Bacho Ko Mobile Se Nuksan


बच्चों में मोबाइल फोन के उपयोग के कई दुष्प्रभाव देखे जा सकते हैं, जिनमें से कुछ के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं (2) (3)।


                               


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तंत्रिका विकार : मोबाइल फोन से निकलने वाले रेडिएशन को काफी बच्चों के लिए काफी हानिकारक माना गया है। इसके कारण उनमें कई समस्याएं होने का खतरा रहता है, जिसमें तंत्रिका संबंधी समस्याएं भी शामिल हैं (2)। वैसे तो तंत्रिका विकार में कई गंभीर समस्याएं शामिल हैं, लेकिन साधारण तौर पर इसके कारण चलने, बोलने, सांस लेने, निगलने और सीखने की क्षमता में कमी देखी जा सकती है (4)।


फिजियोलॉजिकल एडिक्शन : फिजियोलॉजिकल एडिक्शन की समस्या को हम किसी भी भौतिक वस्तु के प्रति रुझान कह सकते हैं। सरल शब्दों में इसे लत कहना गलत नहीं होगा। दरअसल, कम उम्र से ही जिन बच्चों के हाथ में मोबाइल फोन आ जाता है, उन्हें इसकी लत लग जाती है। इस कारण वो हर समय मोबाइल में ही लगे रहते हैं। आलम यह हो जाता है कि उन्हें खाने-पीने और सोने तक का होश नहीं रहता।


मानसिक विकास में कमी : मोबाइल फोन का एक दुष्प्रभाव यह भी है कि इससे बच्चे का मानसिक विकास बाधित हो सकता है। कारण यह है कि मोबाइल की लत के कारण बच्चा और किसी भी काम में ध्यान नहीं देता। वहीं, समाजिक और व्यवहारिक रूप से भी वह लोगों से नहीं जुड़ पाता। नतीजन वास्तविक रूप से बच्चे में उम्र के हिसाब जो विकास होना चाहिए, उसमें कहीं न कहीं कमी आ जाती है।


अनिद्रा की समस्या : बच्चे मोबाइल में गेम खेलते हैं। नई-नई चीजें देखते हैं। आज-कल तो कार्टून और अन्य कार्यक्रम भी उन्हें मोबाइल पर ही मिल जाते हैं। इनमें अधिक रूचि होने के कारण वो देर रात तक जागते रहते हैं। इस कारण स्कूल के समय में अक्सर सोने की शिकायत भी आपको मिल सकती हैं। वहीं इस आदत की निरंतरता अनिद्रा की समस्या को जन्म दे सकती है।


व्यवहार में बदलाव : बच्चे के द्वारा मोबाइल फोन का लगातार उपयोग उसके व्यवहार में बदलाव का भी कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा माना गया है कि मोबाइल की लत बच्चे में किसी अन्य काम में उसका ध्यान केंद्रित नहीं होने देती। ऐसे में अगर आप उससे एकदम से मोबाइल दूर करेंगे, तो हो सकता है कि उसके मन में आपके प्रति नकारात्मक भाव पैदा हों, वह चिड़चिड़ा भी हो सकता है या फिर मोबाइल को पाने के लिए नाराजगी (रोकर या खाना छोड़कर) जाहिर करे।


कैंसर का खतरा : बच्चों पर मोबाइल के पड़ने वाले दुष्प्रभावों से संबंधित एक शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन कैंसर का कारण बन सकता है। साथ ही ब्रेन ट्यूमर के लिए भी जिम्मेदार हो सकता है (2)।


सिर दर्द : कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि मोबाइल का अधिक समय तक उपयोग करने वाले बच्चों में सिरदर्द की समस्या हो जाती है।


डिप्रेशन और शॉर्ट टेंपर : मोबाइल के इस्तेमाल के संबंध में इस बात के भी प्रमाण मिलते हैं कि बच्चों में मोबाइल के अधिक उपयोग से डिप्रेशन और जल्द गुस्सा आने की समस्या भी पनप सकती है (3)।


क्यों लगती है बच्चों को मोबाइल की लत?


बच्चों में मोबाइल की लत लगने के कारणों को हम निम्न बिंदुओं के माध्यम से समझ सकते हैं।


बच्चों को प्यार-दुलार के चलते मोबाइल देना।


रोते बच्चों को बहलाने के लिए उन्हें मोबाइल देकर चुप कराना।


खाना खाने के लिए उन्हें मोबाइल देने का लालच देना।


माता-पिता का यह सोचना कि कम उम्र में मोबाइल ऑपरेट करना बच्चे के विकास के लिए लाभकारी होगा।


बच्चों को मोबाइल फोन के जोखिम से बचाने के लिए सुझाव


मोबाइल फोन के जोखिम से बच्चों को बचाने के लिए निम्न बातों को जरूर ध्यान में रखें।


16 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल बिलकुल भी न दें। कारण यह है कि 16 से कम उम्र में बच्चे का मस्तिष्क बहुत संवेदनशील होता है, जो मोबाइल से निकलने वाले विकरण को सहने के लिए तैयार नहीं होता।


बच्चों को सीधे मोबाइल हाथ में न पकड़ाएं। अगर आपको उन्हें कुछ खास (गाना या कुछ और) सुनाना चाहते हैं, तो हेडफोन का इस्तेमाल करें। ध्यान रहे कि हेडफोन भी बच्चों के काम पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, इसका प्रयोग कम आवाज में और बड़ी ही सावधानी के साथ किया जाना चाहिए।


लिफ्ट, ट्रेन, बस या कार में बच्चों को मोबाइल बिलकुल भी इस्तेमाल न करने दें, क्योंकि ऐसा करने से रेडिएशन की तीव्रता बढ़ सकती है, जो बच्चों के लिए नुकसानदायक है।


नेटवर्क न होने की स्थिति में बच्चों को बिलकुल भी मोबाइल न दें। कारण यह है कि इस स्थिति में मोबाइल नेटवर्क के लिए नए एंटीना से जुड़ने का प्रयास करेगा, जिससे रेडिएशन की तीव्रता बढ़ सकती है।


घर या स्कूल का चुनाव करते वक्त ध्यान रखें कि आसपास कोई मोबाइल टावर न हो।


इस बात का आपको ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के बेडरूम में सोते वक्त मोबाइल न रहे।


ध्यान रखें कि आपका बच्चा मोबाइल स्कूल लेकर न जाए।


जरूरी कॉल आने पर बच्चों से अलग जाकर फोन का इस्तेमाल करें।


बच्चों को फोन पर किसी से बात कराने का प्रयास न करें।


हालांकि, मोबाइल आपके जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है, लेकिन इसके बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लेख में आपको इसके नुकसानों के बारे में अच्छे से समझाया गया है। वहीं बच्चों को मोबाइल की लत न लगे इसके लिए भी कुछ आसान उपाय बताए गए हैं। इसके विपरीत अगर आपका बच्चा मोबाइल में चिपका रहता है, तो उसे मोबाइल से दूर करने के कुछ विकल्प भी आपको लेख के माध्यम से सुझाए गए हैं। इन्हें अपनाकर आप बच्चों को भविष्य में आने वाले बड़े जोखिमों से बचा सकती हैं। इस विषय में कोई अन्य सवाल और सुझाव हों, तो आप उन्हें नीचे दिए कमेंट बॉक्स के माध्यम से हम तक पहुंचा सकते हैं।

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