तिरंगा क्यों नहीं लगाते महेंद्र सिंह धोनी सम्मान दोगुना हो जाएगा Cricketer

Cricketer ms dhoni jankari hindi facts - टीम इंडिया के पूर्व कप्ताब और मौजूदा विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी का आज 37वां जन्मदिन है. भारत को 28 साल बाद आईसीसी वर्ल्ड कप जिताने के अलावा टी20 और टेस्ट में भी नंबर एक बनाने वाले धोनी इस समय टीम के साथ इंग्लैंड के दौरे पर हैं.

 शुक्रवार को इंग्लैंड के साथ दूसरे टी20 मैच के बाद उन्होंने पत्नी साक्षी, बेटी जीवा और टीम के कुछ साथियों के साथ केक काटा. इस मौके पर धोनी ने अपने परिवार व टीम इंडिया के खिलाड़ियों संग जमकर जश्न मनाया. आज धोनी के बर्थडे के मौके पर उनके बारे में एक ऐसी बात बताएंगे जिसे जान आपके अन्दर भी धोनी के लिए सम्मान और बढ़ जाएगा. वैसे तो सचिन तेंदुलकर के बाद अगर किसी भारतीय क्रिकेटर को ढ़ेर सारा प्यार मिला है तो वह धोनी ही हैं.

झारखंड जैसे छोटे से राज्य से निकलकर क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाने वाले धोनी के लिए ये सब कभी आसान नहीं था. धोनी ने जहां क्रिकेट की ट्रेनिंग ली वहां सुविधा के नाम पर कुछ नहीं था. बैटिंग, विकेटकीपिंग और कप्तानी करने का अंदाज बिल्कुल देसी अंदाज, कॉपीबुक स्टाइल से कोई वास्ता नहीं. सबसे अलग तरह के क्रिकेटर हैं महेंद्र सिंह धौनी.

  महेंद्र सिंह धोनी अपने हेलमेट पर तिरंगा क्यों नहीं लगाते?

लेकिन, एक ऐसी बात है जिसे लेकर महेंद्र सिंह धोनी के प्रसंशकों के मन में सवाल जरूर उठते होंगे. वह सवाल यह है​ कि आखिर वह भी सचिन और विराट की तरह अपने हेलमेट पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ लगाकर क्यों नहीं खेलते?

 जब आप इसके पीछे के कारण को जानेंगे तो महेंद्र सिंह धोनी के लिए आपके मन में सम्मान दोगुना हो जाएगा. एक विकेटकीपर के लिए विकेट्स के पीछे काम उससे कहीं बहुत ज्यादा कठिन होता है, जितना आसान दिखता है. सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है फास्ट और स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ बार बार अपना पोजिशन बदलना. महेंद्र सिंह धोनी तेज गेंदबाजों के खिलाफ हेलमेट लगाकर और स्पिनर्स के खिलाफ कैप पहनकर विकेटकीपिंग करते हैं.

इस दौरान धोनी को अपना हेलमेट जमीन पर भी रखना पड़ता है. अब जिस हेलमेट पर भारतीय तिरंगा लगा होगा उसे जमीन पर रखना तिरंगे का अपमान है.

महेंद्र सिंह धौनी के लिए तार्किक रूप से यह संभव नहीं था कि वह हेलमेट को जमीन पर ना रखें और वह तिरंगे का अपमान भी नहीं कर सकते हैं.

इसलिए उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को हेलमेट पर नहीं लगाने का निर्णय लिया. वैसे भी देश और उसके प्रीतक चिन्हों के लिए सम्मान दिल में होना चाहिए. महेंद्र सिंह धौनी ने अपने देश प्रेम का परिचय भारत की ‘प्रादेशिक सेना’ में शामिल होकर दे दिया है.

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