RNA (राइबोज़ न्यूक्लिक अम्ल) की खोज किसने की?

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे इस नई पोस्ट में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर आर एन ए या राइबो न्यूक्लिक अम्ल की खोज किसने की? दोस्तों अगर आप एक डॉक्टर है या एक स्टूडेंट और आप बायोलॉजी पढ़ते हैं तो आपने जरूर सुना होगा आर एन ए के बारे में। अगर आप नहीं जानते कि आर एन ए कि खोज किसने की  तो आप यह आर्टिकल पूरा पढिए हम इसमें आपको RNA के बारे में पूरा इतिहास बता देंगे कि आखिर इसकी खोज किसने की और कैसे की। 

आरएनए की खोज किसने की?
आरएनए की खोज किसने की?

क्योंकि अधिकतर लोग यह नहीं जानते कि RNA ने और DNA में अंतर क्या है? और RNA ने की खोज किसने की और DNA की खोज किसने की कई लोग इसे मिक्स कर देते हैं तो आज हम नहीं बातों को स्पष्ट रूप से आपके सामने रखेंगे कि RNA क्या है? और RNA कि खोज किसने की?

RNA (राइबोन्यूक्लिक एसिड) क्या है?

rna ने एक विशिष्ट प्रकार का एकल सूत्रीय नाभिकीय अम्ल होता है जिसमें राइबोस नामक पेंटोंज शर्करा पाई जाती है rna सामान्यतः कोशिका द्रव्य में स्वतंत्र रूप से पाया जाता है कोशिका द्रव्य में यह राइबोसोम के अंदर या उससे संबंधित पॉलिराइबोसोम में पाया जाता है। यूकैरियोटिक कोशिका में क्लोरोप्लास्ट एवं मैट्रोकानड्रिया में भी rna पाए जाते हैं। इस की आधारभूत इकाई राइबोन्यूक्लियोटाइड होती है। यूकैरियोटिक कोशिका के क्लोरोप्लास्ट एवं माइट्रोकांड्रिया में भी आने पाए जाते हैं। 

ज्यादातर पादप विषाणुओ में अनुवांशिक पदार्थ के रूप में सिर्फ rna नामक न्यूक्लिक अम्ल अर्थात नाभिकीय अम्ल पाया जाता है केंद्र के अंदर स्थित कोशिका ही मुख्यतः rna के विभिन्न प्रकारों का निर्माण स्थल होता है। 

आरएनए की खोज किसने की?

इसकी खोज फ्रेडरिक मिशर ने की थी। आरएनए के महत्वपूर्ण कार्यों में से एक जीन को विनियमित करना और उनकी प्रतियां बनाना है। यह विभिन्न प्रकार के प्रोटीनों को बांधने का भी कार्य करता है। इसकी कई किस्में हैं, जिनमें मुख्य हैं राइबोसोमल आरएनए, ट्रांसफर आरएनए और मैसेंजर आरएनए। आरएनए श्रृंखला में फॉस्फेट और राइबोज के समूह होते हैं, जिससे इसके चार मूल तत्व, एडेनिन, साइटोसिन, ग्वानिन और यूरैसिल जुड़े होते हैं। डीएनए के विपरीत, आरएनए एक एकल श्रृंखला है जिसकी सहायता से यह स्वयं को कोशिका के संकीर्ण आकार में एकत्रित करता है। एक सहस्राब्दी यानी एक हजार साल में आरएनए का रूप बहुत कम बदलता है।

 इसलिए, इसका उपयोग विभिन्न प्राणियों के सामान्य पूर्वज को खोजने के लिए किया जाता है। डीएनए स्वयं आरएनए के संयुग्म की भूमिका निभाता है। मूल रूप से आरएनए का रूप डीएनए में ही निहित होता है। इसलिए जरूरत के हिसाब से जिस डीएनए में आरएनए बनाने की ताकत होती है उसे जरूरी जानकारी मिल जाती है और उसे इसकी आदत हो जाती है।

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Conclusion :-

तो डॉटऑन आज कि इस पोस्ट मे मैंने आपको यह बताने का प्रयास किया कि आखिर आरएनए की खोज किसने की? अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी ज्ञानवर्धक तथा सटीक लगती है तो कृपया इसे अपने दोस्तों तक भी पहुचाएं ताकि उनको भी ऐसे ही रोचक जानकारियाँ जानने को मिले। 

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