Shayari on Chai | Chai Quotes | Chai Par Shayari
चाय किसे नहीं पसंद यहाँ प्यार के आशिक़ से ज्यादा चाय के आशिक़ पाए जाते हैं क्यों नहीं पाए जायेंगे सुबह सुबह ३ करोड़ कप जो पिये जाते हैं।
So Hey Chai Lovers Yaha Aap Dekhenge Best Of The Quotes on Chai,Chai Shayari , Chai Quotes So Read Respectfully :) And Enjoy Your Day.
Shayari on Chai (चाय पर शायरी )
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| चाय पर शायरी |
"इस भागते हुए वक्त पर कैसेलगाम लगाई जाए....!!ऐ वक्त...आ बैठ तुझे एक कप चायपिलाई जाए..."|
कुछ इस तरह दोस्ती निभाएंगे
नौकरी न मिली तो बिलकुल नहीं घबराएंगे
दोनों स्टेशन पर चाय की दुकान लगाएंगे
तुम चाय बनाना हम चाय चाय चिलाएँगे।
फ़िज़ा भी वही चाय की गर्माहट भी वही
पर दोस्त कहा मिलेंगे कोई बताये तो सही।
तेरे हाथो की चाय में जो सुकून हैं
उस सुकून की तलब हैं मुझे
Shayari on Chai
सुनो एक कप चाय हो जाये
ववो भी एक ही कप में।
मेरी एक दुआ कबूल हो जाये
उनके साथ एक चाय मुक़्क़मल हो जाये।
चाय की भी इज्जत हैं
रिस्तो को जोड़ने में।
कुल्हड़ बन गया हु इस चाय के इश्क़ में
इसे पीकर मर जाने का जी चाहता हैं।
रंग सावला और हाइट थोड़ी कम हैं
तो क्या हुआ ,चाय भी तो मुझको आधा कप पसंद हैं।
Chai Quotes
कड़क चाय जैसा किरदार रखता हु
चाय की खुसबू जैसा इखलाख रखता हु
चाय गर्म शौक़ीन-ए-मिजाज रखता हु
मेरे चाय फर्क बताती हैं मुलाकात का
गरम हैं तो साथ में हैं
ठंडी हैं तो इंतज़ार में हैं।
कितनो को सुकून देती हैं
ना जाने किसकी मोहब्बत हैं
हर शख्स दीवाना हैं इसका
हर कोई इस चाय को अपनी कहता हैं।
आँखों से सुकून तो नहीं देखा
मगर चाय को पतीले में सुकून से
उबलते हुए देखा हैं।
इस सावली सी चाय का जिक्र हैं
इस चकाचोंध से सरोबार इस शहर में।
मत दो कोई राय हमे
अगर देनी हैं तो चाय दो हमे।
Shayari on Chai
किसी का साथ नहीं चाहीये
ना चाहिए सौगात
बस एक चाय चाहिए
तेरे साथ चाहिए।
चाय में शक्कर नहीं तो पीने का क्या मज़ा
और ज़िंदगी में दोस्त नहीं तो जीने में क्या मज़ा।
एक हो जाए हासिल तो दूसरी की तलब रखता हु
हां में अपनी चाय का नाम भी तलब रखता हु।
हम चाय को देखते थे जितनी मोहब्बत से
वो मुझे देखती थी उतनी मोहब्बत से।
Chai Quotes
लोग रोए तो जरूर होंगे
चाय के खाली कुल्हड़ को देखकर
जिंदगी कैसी बीत रही हैं
ये सवाल पूछा था उन्होंने।
मेरी आँखों में ये चेहरा पुराना हो गया
कही मिलो तुम्हारे साथ चाय पिए एक अरसा हो गया।
यु ना होती जो चाय की तलब हमारी
तो सुनी ही रह जाती मोहब्बत हमारी।
चाय ही हमेशा साथ रहती हैं
इंसान तो अपनी फितरत बदलता रहता हैं

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