apathit kavyansh in hindi | अपठित काव्यांश हिंदी
apathit kavyansh in hindi
अपठित पद्यांश
apathit padyansh with answers
अपठित भाग को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए .
उस दिन
वह मैंने थी देखी
कॉलेज के निकट ,कच्ची सड़क के पास
गंदी नाली पर पड़ी
जहाँ से गुज़र नहीं सकता
कोई भी बिना नाक पर डाले कपड़ा –
गंदे काले चिथड़ो औ “फटी -पुरानी गुदड़ी में लिपटी ,
देखकर आती जिसको घिन ,
पौष के तीव्र शीत में करती क्रंदन –
“हाय मार गया ,पकड़ो ,पकड़ो ,
धत्त तेरे की !
क्या लिया तुम्हारा मैंने मूज़ी?
क्यों मुझ को व्यर्थ सताता ?
भागो -भागो,हाय मार गया वह मुझको “
सताए कूकर सी कटु कर्कश वाणी में चिल्लाती
वह कुबड़ी काली सी पगली नारी.
सोचा मैंने ,
पर मै समझ न पाया –
क्या वह है दैव की मारी ?
या समाज की ,जो है अत्याचारी
दोनो ,दलितों ,असहायों पर ?
या सम्बन्धियों की निज
छीन लेते हैं जो दलित बंधुओं से
सूखी रोटी का टुकड़ा भी ?
(1) कवि द्वारा प्रयुक्त ‘बिना नाक पर कपड़ा डाले’ से क्या तात्पर्य है -
i) नाक ढकना
ii) मुंह छिपाकर जाना
iii) दुर्गन्ध से बचना
iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर- iii) दुर्गन्ध से बचना
(2) प्रयुक्त शब्द ‘मूज़ी’ का तात्पर्य है-
I) अत्याचारी
II) ज़ालिम
III) सताने वाला
IV) दुर्जन
उत्तर - I) किस्मत की मारी
(3) कवि ने पगली के आवाज़ की तुलना किससे की है-
(i) पक्षी से
II) जानवर से
III) कूकर से
IV)कोई नहीं
उत्तर - III) कूकर से
(4) कवि का स्वर कैसा है?
I) व्यंगात्मक
II) ओजपूर्ण
III) दुखी करने वाला
IV) इनमे से कोई नहीं
उत्तर - III) दुखी करने वाला
(5) क्रंदन शब्द का विलोम है -
I) रोना
II) विलाप करना
III) प्रसन्न होना
IV)इनमे से कोई नहीं
उत्तर - I) प्रसन्न होना
apathit padyansh with answers
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जिस-जिससे पथ पर स्नेह मिला , उस उस राही को धन्यवाद ,
जीवन अस्थिर अनजाने ही ,हो जाता पथ पर मेल कहीं ,
सीमित पग-डग,लम्बी मंजिल तय कर लेना कुछ खेल नहीं ,
दाएँ- बाएँ सुख-दुःख चलते , सम्मुख चलता पथ का प्रसाद -
जिस-जिससे पथ पर स्नेह मिला , उस उस राही को धन्यवाद .
साँसों पर अवलंबित काया ,जब चलते – चलते चूर हुई ,
दो स्नेह शब्द मिल गए ,मिली नव स्फूर्ति ,थकावट दूर हुई ,
पथ के पहचाने छूट गए ,पर साथ – साथ चल रही याद -
जिस-जिससे पथ पर स्नेह मिला , उस उस राही को धन्यवाद .
जो साथ न मेरा दे पाए उनसे कब सूनी हुई डगर
मै भी न चलूँ यदि तो क्या, राही मर , लेकिन राह अमर ,
इस पथ पर वे ही चलते हैं जो चलने का पा गए स्वाद-
जिस-जिससे पथ पर स्नेह मिला उस उस राही को धन्यवाद .
कैसे चल पाता यदि न मिला होता मुझको आकुल अंतर ?
कैसे चल पता यदि मिलते ,चिर- तृप्ति अमरता -पूर्ण प्रहर ,
आभारी हूँ मै उन सबका ,दे गए व्यथा का जो प्रसाद -
जिस-जिससे पथ पर स्नेह मिला , उस उस राही को धन्यवाद .
निम्नलिखित में से निर्देशानुसार विकल्प का चयन कीजिए –
(1) कवि के अनुसार जीवन कैसा है?
I) दुख पूर्ण है
II) अस्थिर है
III) संघर्ष युक्त है
IV) इनमे से कोई नहीं
उत्तर –(II) अस्थिर है
(2) जीवन रूपी यात्रा में कैसे-कैसे अनुभव आते हैं?
I)सुख – दुःख और प्रमाद के अवसर आते रहते हैं
II) दुःख ही दुख आता है
III) कटु अनुभव आते हैं
IV) सभी
उत्तर – i ) सुख – दुःख और प्रमाद के अवसर आते रहते हैं
(3) “जिस -जिस ” में कौन सा अलंकार है -
i)यमक
ii) अनुप्रास
iii) पुनरोक्ति प्रकाश
iv) कोई नहीं
उत्तर - iii) पुनरोक्ति प्रकाश
(4) राह को अमर क्यों कहा गया है -
i) क्योंकि यह लम्बी है
ii) क्योंकि जीवन रुपी राह अनंत है
iii) दोनो
iv) कोई नहीं
उत्तर - ii) क्योंकि जीवन रुपी राह अनंत है
5)सुख – दुःख में कौन सा समास है?
i) कर्मधारय समास
ii)द्विगु समास
iii) द्वन्द समास
iv )कोई नहीं
उत्तर - iii) द्वन्द समास
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पूर्व चलने के बटोही ,
बाट की पहचान कर ले.
पुस्तकों में है नहीं छापी गयी इसकी कहानी ,
हाल इसका ज्ञात होता है न औरों की ज़बानी
अनगिनत राही गए इस राह से ,
उनका पता क्या
पर गए कुछ लोग इस पर छोड़ पैरों की निशानी ,
यह निशानी मूक होकर भी ,बहुत कुछ बोलती है
खोल इसका अर्थ पंथी ,पंथ का अनुमान कर ले
पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले.
है अनिश्चित किस जगह पर सरित ,गिरि ,गह्वर मिलेंगे ,
है अनिश्चित किस जगह पर बाग़ वन सुन्दर मिलेंगे ,
किस जगह यात्रा ख़त्म हो जाएगी ,यह भी अनिश्चित
है अनिश्चित कब सुमन ,कब कंटकों के शर मिलेंगें
कौन सहसा छूट जायेंगे , मिलेंगे कौन सहसा
पूर्व चलने के बटोही , बाट की पहचान कर ले.
रास्ते का एक काँटा ,पाँव का दिल चीर देता
रक्त की दो बूँद गिरती ,एक दुनिया डूब जाती
आँख में हो स्वर्ग लेकिन ,पाँव पृथ्वी पर टिके हों
कंटकों की इस अनोखी सीख का सम्मान कर ले
पूर्व चलने के बटोही , बाट की पहचान कर ले.
निम्नलिखित में से निर्देशानुसार विकल्प का चयन कीजिए –
(1) “खोल इसका अर्थ,पंथी,पंथ का अनुमान कर ले” का क्या आशय है?
i)चलते समय रास्ते को समझना
ii) प्रेरणा ग्रहण कर लक्ष्य का निश्चय करना
(iii)उपर्युक्त दोनों
iv) कोई नहीं
उत्तर – ii) प्रेरणा ग्रहण कर लक्ष्य का निश्चय करना
(2) 'मूक' शब्द का विलोम है-
i) बहरा
ii) वाचाल
iii)मौन
iv) कोई नहीं
उत्तर – ii) वाचाल
(3) – “खोल इसका अर्थ पंथी ,पंथ का अनुमान कर ले
पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले .”
पंक्ति में कौन सा अलंकार है ?
i) यमक अलंकार
ii) रूपक अलंकार
iii) अनुप्रास अलंकार
iv) कोई नहीं
उत्तर – अनुप्रास अलंकार
(4) गह्वर शब्द का पर्यायवाची नहीं है -
i) कन्दरा
ii) गुफा
iii) सराय
iv) दुर्भेद्य
उत्तर – iii) सराय
(5) 'शर' शब्द का अर्थ है?
i) सुई
ii) बाण
iii) सिंह
iv) शैय्या
उत्तर -ii) बाण
जय हिन्द:जय हिंदी
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