प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव 2022 से पहले ही छठे राज्य वित्त आयोग का गठन सरकार कर सकती है

प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव 2022 से पहले ही छठे राज्य वित्त आयोग का गठन सरकार कर सकती है

आयोग के गठन पर प्रारंभिक स्तर पर चर्चाएं और मंथन शुरू कर दिया गया है। इस आयोग द्वारा राज्य करों में से पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के लिए तय की जाने वाली हिस्सेदारी पर सरकार 2025 से अमल करेगी। आयोग गठित करने के लिए सरकार के पास अभी कुछ समय है। चुनाव की अधिसूचना लागू होने पर आयोग गठन चुनाव तक करना संभव नहीं होगा। लिहाजा सरकार अधिसूचना से पहले ही गठन कर सकती है। इस समय राज्य में पंचायती राज संस्थाओं, नगर निकायों को राज्य करों में हिस्सेदारी पांचवें राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक दी जा रही है। आनंद मिश्रा की अध्यक्षता वाले आयोग ने एक नवंबर 2018 को रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी थी।

 


चुनाव से पहले संभव

● चुनाव से पहले आयोग के गठन पर प्रारंभिक चर्चाएं-मंथन शुरू

● 2025 से लागू होनी हैं छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें

तीन साल में आयोग ये काम करेगा

आयोग का कार्यकाल तीन वर्ष होगा। आयोग पंचायती राज संस्थाओं, नगर निकायों को राज्य करों से दी जाने वाली हिस्सेदारी का फार्मूला तय करेगा। सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार 2025 से पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों को राज्य करों में से तय हिस्सेदारी देगी। सूत्र बताते हैं कि वित्त विभाग द्वारा वित्त आयोग के गठन से संबंधित मसौदा तैयार किया गया है, जिसे विचार के लिए आगे बढ़ाया गया है। बताया जा रहा है कि दिसंबर में सरकार इस मुद्दे पर फैसला ले सकती है।

प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव 2022 से पहले ही छठे राज्य वित्त आयोग का गठन सरकार कर सकती है।

आयोग के गठन पर प्रारंभिक स्तर पर चर्चाएं और मंथन शुरू कर दिया गया है। इस आयोग द्वारा राज्य करों में से पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के लिए तय की जाने वाली हिस्सेदारी पर सरकार 2025 से अमल करेगी। आयोग गठित करने के लिए सरकार के पास अभी कुछ समय है। चुनाव की अधिसूचना लागू होने पर आयोग गठन चुनाव तक करना संभव नहीं होगा। लिहाजा सरकार अधिसूचना से पहले ही गठन कर सकती है। इस समय राज्य में पंचायती राज संस्थाओं, नगर निकायों को राज्य करों में हिस्सेदारी पांचवें राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक दी जा रही है। आनंद मिश्रा की अध्यक्षता वाले आयोग ने एक नवंबर 2018 को रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी थी।

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