ऊष्मा उपचार (Heat Treatment Operations) क्या है? प्रकार, लाभ-हानि व उपयोग

ऊष्मा उपचार (Heat Treatment Operations in Hindi) । प्रकार, लाभ-हानि व उपयोग

ऊष्मा उपचार प्रक्रिया (Heat Treatment Operations in Hindi) -:

ऊष्मा उपचार एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा धातुओं और मिश्र धातुओं के गुणों में आवश्यकता अनुसार परिवर्तन किए जाते हैं और वांछित गुणों को प्राप्त किया जाता है। इस प्रक्रिया को करके हम धातुओं और मिश्र धातुओं को आवश्यकता अनुसार प्रयोग में लाते हैं। ऊष्मा उपचार प्रक्रिया धातुओं पर करने के लिए सबसे पहले धातुओं को आवश्यकता के अनुसार तापमान दिया जाता है फिर वांछित दर से उनको ठंडा किया जाता है। इस प्रकार वे आवश्यकतानुसार गुण प्राप्त करते हैं। ऊष्मा उपचार विधि एक प्रकार की तापन और शीतलन प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को करने केवल ठोस पदार्थ पर ही किया जाता है।


ऊष्मा उपचार के प्रकार (Types of Heat Treatment in Hindi) -:

धातुओं पर ऊष्मा उपचार करने के आधार पर विभिन्न प्रकार के ऊष्मा उपचार विधियां होती है। जो निम्न हैं -

1. अनीलीकरण (Annealing Process)

2. निर्मलीकरण (Normalising Process)

3. कठोरण (Hardening Process)

4. पायनीकरण (Tempering Process)

5. सतही कठोरण (Surface Hardening Process)


ऊष्मा उपचार के लाभ (Advantages of Heat Treatment in Hindi) -:

1) जिस धातु का ऊष्मा उपचार किया जाता है उसकी मशीनिंग योग्यता बढ़ जाती है।

2) ऊष्मा उपचार करने से धातु के कणों का साइज बदल जाता है। ये बारीक हो जाते हैं।

3) ऊष्मा उपचार करने से धातु के यान्त्रिक गुणों में सामर्थ्य, तनन, कठोरता, तन्यता, आघात प्रतिरोध और संक्षारण के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता में विकास होता है।

4) ऊष्मा उपचार करके धातु के चुंबकीय और विद्युत के गुणों में विकास किया जा सकता है।

5) ऊष्मा उपचार करके धातु की कठोरता और भंगुरता को घटाया और बढ़ाया जा सकता है।

6) इस विधि द्वारा धातु की रासायनिक संरचना में भी परिवर्तन किया जा सकता है।

7) ऊष्मा उपचार द्वारा आंतरिक सतह को तन्य और बाहरी सतह को कठोर बनाया जा सकता है।

8) ऊष्मा उपचार में तापन और शीतलन प्रक्रिया की जाती है जिसके फलस्वरूप आंतरिक प्रतिबल दूर किया जा सकता है।


ऊष्मा उपचार के उपयोग (Applications of Heat Treatment in Hindi) -:

ऊष्मा उपचार करने के निम्नलिखित फायदे हैं -

1) ऊष्मा उपचार करने के फलस्वरुप कार्यखंड मुलायम और मशीनिंग योग्य हो जाते हैं।

2) धातु की तन्यता और तनन सामर्थ्य को आवश्यकतानुसार बना दिया जाता है।

3) ऊष्मा उपचार करने के बाद धातु के चुंबकीय और विद्युत गुणों में वृद्धि कर दी जाती है।

4) धातुओं पर ऊष्मा उपचार करके आंतरिक प्रतिबलों को दूर किया जा सकता है।

5) ऊष्मा उपचार करने के कारण धातुओं की संक्षारण प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।

6) किसी भी धातु का उसमें उपचार करके उसकी रासायनिक संरचना में परिवर्तन किया जा सकता है।

7) धातुओं के लगभग सभी यांत्रिक गुणों में ऊष्मा उपचार द्वारा वांछित परिवर्तन किया जा सकता है।


ऊष्मा उपचार से हानियां (Disadvantages of Heat Treatment in Hindi) -:

1) इस प्रक्रिया को करने के लिए लागत अधिक आती है।

2) इस विधि द्वारा कुछ गिने-चुने ही धातुओं का ऊष्मा उपचार किया जा सकता है।

3) यह विधि भी केवल उन्हीं धातुओं तक सीमित है जिनका आकार सख्त हो सकता है।

4) हीट ट्रीटमेंट करने के लिए कुशल कारीगर की आवश्यकता होती है।

5) जिस धातु का ऊष्मा उपचार किया जाता है उसको निश्चित तापमान ही मिली चाहिए अन्यथा उसमें ऊष्मा उपचार का कोई फायदा नहीं होता है।

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