शब्द शक्ति: परिभाषा, भेद & उदाहरण | Shabd Shakti
शब्द शक्ति | Shabd Shakti Kise Kahte Hain?
किसी भी उक्ति में शब्द और अर्थ दोनों का होना अनिवार्य है। शब्द विहीन और अर्थ हीन उक्ति की कल्पना ही नहीं की जा सकती। शब्द और अर्थ एक दूसरे से मिले -जुले रहते हैं। जैसे-काव्य के लिए सुंदर शब्दों की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार उनसे व्यक्त होने वाले सुंदर अर्थ की भी।
'शब्द की शक्ति उसके अंतर्निहित अर्थ को व्यक्त करने का व्यापार है।' कारण जिसके द्वारा कार्य संपादन करता है, उसे 'व्यापार' कहा जाता है।'
उदाहरण के लिए -
जिस प्रकार घड़ा बनाने के लिए 'मिट्टी', 'चाक', 'दण्ड' तथा 'कुम्हार' आदि कारण हैं और चाक का घूमना वह 'व्यापार' हैं, जिससे घड़ा बनता है। इसी तरह अर्थ का बोध कराने में 'शब्द' कारण है और 'अर्थ' का बोध कराने वाले व्यापार - अभिधा ,लक्षणा तथा व्यंजना है। आचार्यों ने इन्हीं को 'शक्ति 'तथा 'वृत्ति' नाम दिया है। आचार्य मम्मट ने 'व्यापार' शब्द का प्रयोग किया है तो आचार्य विश्वनाथ ने 'शक्ति 'का ।
शब्द शक्ति की परिभाषा:-
शब्दों के अर्थों का बोध कराने वाले अर्थव्यापारों को 'शब्द शक्ति' कहते हैं।
प्रसंग के अनुसार शब्द का अर्थ:-
शब्द का अर्थ प्रसंग के अनुसार लिया जाता है। पशुओं के मध्य एक विशेष प्रकार के पशु के लिए' बैल' शब्द का प्रयोग होता है, परंतु किसी मूर्ख और विवेक शून्य व्यक्ति को कोई बात समझाते- समझाते जब ऊबकर और खीजकर कोई यह कह बैठता है कि 'तुम तो निरे बैल' हो, तब बैल का आशय 'मूर्ख 'होता है।
बहुत दिनों से मूर्ख को 'बैल' कहने की एक रूढि - परंपरा हो गई है। इस प्रकार इस वाक्य में 'बैल' का साधारण तथा प्रचलित अर्थ ( दो सिंग, एक पूंछ, दो कान और चार पैरवाला पशु ) न लेकर दूसरा ही अर्थ- अर्थात् 'अत्यंत मूर्ख' लिया जाएगा। अतः वाक्य में प्रसंग के अनुसार 'बैल' शब्द का अर्थ 'मूर्ख' लिया जाएगा ।
केवल सार्थक शब्दों में ही किसी व्यक्ति, पदार्थ, वस्तु, क्रिया आदि का ज्ञान कराने की शक्ति होती है। ऐसे शब्दों का ठीक अर्थ वाक्य के शब्दों के बीच उसके स्थान और प्रयोग से ही निश्चित होता है। जैसे- 'उल्लू ' शब्द का स्वतंत्र रूप में प्रयोग करने पर उस विशेष प्रकार के पक्षी का बोध करायेगा, जो रात में ही घोंसले से बाहर निकलता है ,दिन में नहीं । जैसे- 'उल्लू सूर्य के प्रकाश में भी अंधा रहता है ।'
इस वाक्य में 'उल्लू' का अर्थ 'पक्षी विशेष' ही लिया जायेगा, परंतु किसी व्यक्ति को बार-बार कोई विषय समझाने पर भी समझ में नहीं आता तो क्रुद्ध होकर कह दिया जाता है- "ऐसे उल्लुओं को तो बृहस्पति भी नहीं समझा सकते।"
इस वाक्य में 'उल्लू 'का अर्थ पक्षी विशेष नहीं ,परंतु 'अत्यंत मूर्ख ' समझा जाएगा।
शब्द के प्रकार
शब्द मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं-
1. वाचक शब्द
2. लक्षक शब्द
3. व्यंजक शब्द
वाचक शब्द से जो अर्थ ग्रहण किया जाता है उसे वाच्यार्थ, लक्षक शब्द से जो अर्थ ग्रहण किया जाता है उसे लक्ष्यार्थ, तथा व्यंजक शब्द से जो अर्थ ग्रहण किया जाता है उसे व्यंग्यार्थ कहा जाता है।
शब्द शक्तियां-
वाचक शब्द लक्षक शब्द व्यंजक शब्द
वाच्यार्थ लक्ष्यार्थ व्यंग्यार्थ
अभिधा लक्षणा व्यंजना
"वाच्यश्च लक्ष्यश्च व्यंग्यश्चेति" (साहित्य दर्पण)
इस आधार पर तीन प्रकार की शब्द शक्तियां मानी गयी है:-
(1) अभिधा शब्द शक्ति
(2) लक्षणा शब्द शक्ति
(3) व्यंजना शब्द शक्ति
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