विधुत बल्ब में प्रकाश कैसे उत्पन्न होता है? - हिंदी इलेक्ट्रिकल डायरी

प्रकाश क्या होता है?

प्रकाश एक प्रकार का भौतिक कारक होता है जिससे वस्तुओ को देखने की संवेदना प्राप्त होती है। यह एक प्रकार का विधुत चुमबकीय तरंग होता है जिसकी तरंगदैर्घ्य की परास दृश्य होती है। यह निर्वात में 3 × 108 m/s की गति से चलता है। जिस स्थान पर प्रकाश नहीं होता है उस स्थान पर किसी भी वस्तु को देखा नहीं जा सकता है। दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य 400 से 700 नैनोमीटर होता है। 

प्रकाश का उत्पादन कैसे होता है?

किसी परमाणु में इलेक्ट्रान नाभिक के चारो तरफ निश्चित कक्षाओ में घूमते रहते है। यदि परमाणु को किसी बाहरी उर्जा श्रोत से उष्मीय उर्जा प्राप्त होती है तब ये घुमने वाले इलेक्ट्रान इस उर्जा को प्राप्त कर उतेजित हो जाते है और अपनी कक्षा को छोडकर अगली उच्च उर्जा स्तर वाले कक्षा में चले जाते है। चूँकि इस दशा में इलेक्ट्रान उतेजित अवस्था में होते है इसलिए ये अस्थिर होते है अतः कुछ क्षण उच्च उर्जा स्तर में रहने के बाद पुनः दुबारा अपने पहले वाली कक्षा में चले आते है। उच्च उर्जा स्तर से निम्न उर्जा स्तर में आते समय ये इलेक्ट्रान प्राप्त किये गए उर्जा को फोटोन के रूप में छोड़ते है जो तरंग के रूप में परमाणु से बाहर निकलता है। यदि इस तरंग की तरंगदैर्घ्य 400 से 700 नैनोमीटर के बीच होती है तब यह दृश्य प्रकाश के रूप में दिखाई पड़ता है। इसी प्रकार यदि कोई धातु  का तार (Wire) गर्म होता है तब इसके कुछ परमाणु उतेजित होकर प्रकाश उत्पन्न करेंगे जब वे अपने सामान्य अवस्था में वापस लौटेंगे। 

जब किसी चालक से विधुत धारा का प्रवाह होता है तब I2R से चालक से उष्मीय उर्जा का उत्पादन होता है। उपर दिए गए सूत्र के अनुसार यदि विधुत धारा (I) तथा प्रतिरोध R के मान को बढ़ा दिया जाए तब ज्यादा मात्रा में उष्मीय उर्जा का उत्पादन होगा जिससे प्रकाश उत्पन्न होने लगेगा। एडिसन ने दुनिया का पहला विधुत बल्ब इसी सिद्धांत से बनाया था। यदि विधुत धारा पदार्थ के किसी भी अवस्था से (ठोस ,गैस तथा द्रव) प्रवाहित होगी तब उसमे ऊष्मा उत्पन्न सकती है जिससे प्रकाश उत्पन्न हो सकता है। 

आजकल गलियों में उपयोग किये जाने वाले कार्बन अर्क विधुत बल्ब में इसी सिद्धांत से प्रकाश उत्पन्न होता है। इस प्रकार के बल्ब में दो कार्बन रॉड के मदद से विधुत धारा को प्रवाहित किया जाता है। जब दोनों कार्बन रॉड को आपस में टच किया जता है तब दोनों कार्बन के बीच चिंगारी (Arc) जिससे कार्बन वाष्पकृत हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप प्रकाश उत्पन्न होता है। जैसे निचे के चित्र में दिखाया गया है 
कार्बन रॉड
किसी ट्यूब में एक विशेष प्रकार के गैस को भरकर ,दो इलेक्ट्रोड के मदद से जब विधुत धारा प्रवाहित किया जाता है तब ट्यूब में मौजूद गैस के अणु आयनकृत होकर विपरीत इलेक्ट्रोड के तरफ भागते है ,इलेक्ट्रोड पर पहुचने के बाद अपने विपरीत आयन से कंबाइन होकर अणु का निर्माण करते है और इस प्रक्रिया के दौरान प्रकाश उत्पन्न होता है। यह प्रक्रिया ट्यूब के पुरे लम्बाई में भरे हुए गैस के साथ होता है जिससे पूरे ट्यूब से प्रकाश उत्पन्न होने लगता है।  इस प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली प्रकाश का रंग ,ट्यूब में भरे हुए गैस पर निर्भर करता है। जैसे नियोन गैस से लाल रंग ,हीलियम गैस से गुलाबी रंग तथा आर्गन गैस से नीले रंग का प्रकाश उत्पन्न होता है। 

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