अपराजिता का फूल आयुर्वेदिक गुण से भरा है जानें कैसे

    अपराजिता के फूल से आप भली भांति परिचित हैं। यह फूल लगभग हर घर में पाया जाता है। इसमें नीला और सफेद रंग का फूल खिलता है। अपराजिता दो तरह का होता है एकपत्ता वाला और दो पत्ता वाला। यह  यह दुर्गा माता का सबसे पसंदीदा फूलों में से एक है। अभी ठंड के मौसम में यह कम खिलता है लेकिन गर्मी और बरसात में बहुत खिलता। कहिए तो यह लगभग हर मौसम में हो जाता है। पूजा पाठ के अलावा यह हेल्थ के लिए भी बहुत फायदेमंद है। बहुत लोग इसका चाय बना कर पीछे है। आइए अपराजिता फूल के बारे में हम विस्तार से बात करते हैं।


      अपराजिता का फूल आयुर्वेदिक गुण से भरा है कैसे....


       अपराजिता फूल बहुत तरह बिमारियों में उपयोग लाया जाता है। अपराजिता में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-स्टरे्स, एंटि- डायबिटीक, एंटी माइक्रोबियल, एंटी - डिप्रेसेंट, एनेसथेनिक जैसे गुण पाए जाते हैं। इन सब गुणों से के कारण टेंशन, अवसाद की समस्या, रेस्पिरेटरी में सूजन, खांसी-जुकाम, अस्थमा जैसी समस्या हो तो आयुर्वेद काढ़ा के रूप में इसका इस्तेमाल करते हैं।

         अपराजिता आंखों की रोशनी,डायरिया, स्माॅल पाॅक्स, माइग्रेन, पेशाब की बिमारी, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में, कान दर्द में, दांत दर्द, गले की खराश या आवाज में बदलाव होने, अपच या गैस की समस्या में, पीलिया आदि में बहुत फायदेमंद है।

       * दांत दर्द की समस्या हो तो अपराजिता की जड़ को काली मिर्च में पीस कर दांत पर रखने से दांत दर्द दूर होता है।

      * टांसिल्स बढ़ गया हो, आवाज खराब हो गया हो तो अपराजिता के कुछ पत्ते पानी में उबालकर,आधा जब बचे तो उसको हल्का ठंडा कर गरारे करें।लाभ होगा।

      * पेशाब में जलन हो तो अपराजिता की जड़ को गर्म पानी या दूध के साथ लें, फायदा होगा। जड़ सुखाकर चूर्ण बनाएं।

      * अगर कोई महिला गर्भवती नहीं हो रही तो ब्लू अपराजिता की जड़ को कुंवारी कन्या द्वारा बकरी के दूध में पीसकर पीरियड के तीन दिन बाद तीन दिन तक पीने से गर्भवती हो सकती।

      * कान में दर्द होने पर अपराजिता के पत्ते को पीसकर कान के चारों तरफ लेप लगाएं। लेप को हल्का गुनगुना कर तब लगाए और कपड़ा से बांध दें।

      * डायबिटीज़ में ब्लड सुगर लेवल कम करने के लिए अपराजिता के फूलों की चाय बनाकर पीएं, सुगर लेवल कम हो जाएगा।

     * पेशाब में पथरी हो जाए तो अपराजिता के जड़ को चावल( कच्चे चावल को बनाने से पहले आधा घंटा पानी में रखें) उस पानी में जड़ पीस कर, छान कर पीने से पथरी पेशाब से निकल जाता।

      * छोटे बच्चे को अगर पेट दर्द की समस्या हो तो, अपराजिता के एक दो बीज को भूनकर, पीस कर मां के दूध या बकरी के दूध या गाय के घी में मिलाकर चटाएं फायदा होगा।

        अपराजिता के नुकसान...


      अपराजिता एक हर्बल दवा‌ है, इसलिए इसका उपयोग बिना किसी आयुर्वेद के जानकार‌ से या आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श लिए बिना सेवन नहीं करें। यह आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। अपराजिता सेवन के बाद उल्टी या डायरिया की समस्या हो सकती है। गर्भावस्था में इसके सेवन से बचें नहीं तो गर्भपात भी हो सकता है।

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