डॉ. अम्बेडकर जी से सीख सकते है आप ज्ञान का महत्व क्या है ?

 

dr br ambedkar biography hindi

करतार सिंह पोलोनियस ने चेन्नई से प्रकाशित होने वाले 'जय भीम' के 13 अप्रैल, 1947 के अंक में लिखा था, "एक बार मैंने बाबा साहेब से पूछा था कि आप इतनी सारी क़िताबें कैसे पढ़ पाते हैं. उनका जवाब था, लगातार क़िताबें पढ़ते रहने से उन्हें ये अनुभव हो गया था कि किस तरह क़िताब के मूलमंत्र को आत्मसात कर उसकी फ़िज़ूल की चीज़ों को दरकिनार कर दिया जाए."
"उन्होंने मुझे बताया था कि तीन क़िताबों का उनके ऊपर सबसे अधिक असर हुआ था. पहली थी 'लाइफ़ ऑफ़ टॉलस्टाय', दूसरी विक्टर ह्यूगो की 'ले मिज़राब्ल' और तीसरी थॉमस हार्डी की 'फ़ार फ़्रॉम द मैडिंग क्राउड.' क़िताबों को लेकर उनका प्यार इस हद तक था कि वो सुबह होने तक क़िताबों में ही लीन रहते थे."

भारत के सबसे पढ़े-लिखे व्यक्ति

आंबेडकर अपने ज़माने में भारत के संभवत: सबसे पढ़े-लिखे व्यक्ति थे. उन्होंने मुंबई के मशहूर एलफ़िस्टन कॉलेज से बीए की डिग्री ली थी. बाद में उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से उन्होंने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी|

शुरू से ही वो पढ़ने, बागवानी करने और कुत्ते पालने के शौक़ीन थे. कहा जाता है कि उस ज़माने में उनके पास देश में क़िताबों बेहतरीन संग्रह था. मशहूर क़िताब 'इनसाइड एशिया' के लेखक जॉन गुंथेर ने लिखा है कि "1938 में जब राजगृह में आंबेडकर से मेरी मुलाक़ात हुई थी तो उनके पास आठ हज़ार क़िताबें थीं. उनकी मौत के दिन तक ये संख्या बढ़ कर 35,000 हो चुकी थी."

बाबासाहेब आंबेडकर के निकट सहयोगी रहे शंकरानंद शास्त्री अपनी क़िताब 'माई एक्सपीरिएंसेज़ एंड मेमोरीज़ ऑफ़ डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर' में लिखते हैं, "मैं रविवार 20 दिसंबर, 1944 को दोपहर एक बजे आंबेडकर से मिलने उनके घर गया. उन्होंने मुझे अपने साथ जामा मस्जिद इलाक़े में चलने के लिए कहा. उन दिनों वो पुरानी क़िताबें खरीदने का अड्डा हुआ करता था."

"मैंने उनसे कहने की कोशिश की कि दिन के खाने का समय हो रहा है लेकिन उन पर इसका कोई असर नहीं हुआ. जामा मस्जिद में उनके होने की ख़बर चारों तरफ़ फैल गई और लोग उनके चारों ओर इकट्ठा होने लगे. इस भीड़ में भी उन्होंने विभिन्न विषयों पर क़रीब दो दर्जन क़िताबें ख़रीदीं. वो अपनी क़िताबें किसी को भी पढ़ने के लिए उधार नहीं देते थे. वो कहा करते थे कि अगर किसी को उनकी किताबें पढ़नी हैं तो उसे उनके पुस्तकालय में आकर पढ़ना चाहिए|"

आंबेडकर के एक और अनुयायी नामदेव निमगड़े अपनी क़िताब 'इन द टाइगर्स शैडो: द ऑटोबायोग्राफ़ी ऑफ़ एन आंबेडकराइट' में लिखते हैं, "एक बार मैंने उनसे पूछा था कि आप इतना लंबे समय तक पढ़ने के बाद अपना 'रिलैक्सेशन' यानि मनोरंजन किस तरह करते हैं. उनका जवाब था कि मेरे लिए 'रिलैक्सेशन' यानि मनोरंजन का मतलब एक विषय को छोड़ दूसरे विषय की क़िताब पढ़ना."

निमगड़े लिखते हैं, "रात में आंबेडकर क़िताब पढ़ने में इतना खो जाते थे कि उन्हें बाहरी दुनिया का उन्हें कोई ध्यान नहीं रहता था. एक बार देर रात मैं उनकी स्टडी में गया और उनके पैर छूए. किताबों में डूबे आंबेडकर बोले, 'टॉमी ये मत करो.' मैं थोड़ा अचंभित हुआ. जब बाबा साहेब ने अपनी नज़रें उठाई और मुझे देखा तो वो झेंप गए. वो पढ़ने में इतने ध्यानमग्न थे कि उन्होंने मेरे स्पर्श को कुत्ते का स्पर्श समझ लिया था."

टॉयलेट में अख़बार और क़िताबें पढ़ना था पसंद
आंबेडकर के लाइब्रेरियन के रूप में काम करने वाले देवी दयाल ने अपने लेख 'डेली रुटीन ऑफ़ डॉक्टर आंबेडकर' में लिखा है, "आंबेडकरअपने शयनकक्ष को अपनी समाधि समझते थे. बाबासाहेब अपने बिस्तर पर अख़बार पढ़ना पसंद करते थे. एक-दो अख़बारों को पढ़ने के बाद वो बाक़ी अख़बारों को अपने साथ टॉयलेट ले जाते थे. कभी-कभी वो अख़बार और क़िताबें टॉयलेट में छोड़ देते थे. मैं उनको वहाँ से उठा कर उनकी तय जगह पर रख देता था|"
आंबेडकर की जीवनी लिखने वाले धनंजय कीर लिखते हैं, "आंबेडकर पूरी रात पढ़ने के बाद भोर के वक्त सोने के लिए जाते थे. सिर्फ़ दो घंटे सोने के बाद वो थोड़ी कसरत करते थे. उसके बाद वो नहाने के बाद नाश्ता किया करते थे."
"अख़बार पढ़ने के बाद वो अपनी कार से कोर्ट जाते थे. इस दौरान वो उन क़िताबों को पलट रहे होते थे जो उस दिन उनके पास डाक से आई होती थीं. कोर्ट समाप्त होने के बाद वो क़िताब की दुकानों का चक्कर लगाया करते थे और जब वो शाम को घर लौटते थे तो उनके हाथ में नई क़िताबों का एक बंडल हुआ करता था|जहाँ तक बागवानी का सवाल है दिल्ली में उनसे अच्छा और देखने वाला बगीचा किसी के पास नहीं था| एक बार ब्रिटिश अख़बार डेली मेल ने भी उनके गार्डन की तारीफ़ की थी.वो अपने कुत्तों को भी बहुत पसंद करते थे. एक बार उन्होंने बताया था कि किस तरह उनके पालतू कुत्ते की मौत हो जाने के बाद वो फूट-फूट कर रोए थे|

 

Comments

Popular posts from this blog

Gove confirms mandatory housebuilding targets for councils will be abolished in face of Tory rebellion – UK politics live

Kotak Mahindra Bank Recruitment 2022 Released for Graduate Candidates And Apply Online