देश के 55 करोड़ गरीबों के लिए शुरू की गई आयुष्मान योजना का लाभ जल्द ही मध्य वर्ग को भी मिल सकता है, मिलेगी मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा

 देश के 55 करोड़ गरीबों के लिए शुरू की गई आयुष्मान योजना का लाभ जल्द ही मध्य वर्ग को भी मिल सकता है, मिलेगी मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा

देश के 55 करोड़ गरीबों के लिए शुरू की गई आयुष्मान योजना का लाभ जल्द ही मध्य वर्ग को भी मिल सकता है। सरकार ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है और आगामी बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसका एलान कर सकती हैं। आयुष्मान भारत के तहत 10.74 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपये तक सालाना मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा दी गई है।

 


केंद्र सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, मध्य वर्ग को आयुष्मान भारत में शामिल करने की प्रक्रिया पर मंथन कुछ महीने पहले ही शुरू हो गया था। मध्यमवर्ग को इसके दायरे में लाने के लिए कई तरह के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इसमें सालाना आय से लेकर संगठित और गैर संगठित क्षेत्र के कामगार जैसे आधार हो सकते हैं। लेकिन मध्य वर्ग को शामिल करने के लिए निजी कंपनियों और संस्थाओं में काम करने वालों को प्राथमिकता मिल सकती है। इसके लिए निजी कंपनियों को सरकार सीधे तौर पर अपने कर्मचारियों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने का विकल्प खोल सकती है। इससे इन निजी कंपनियों को काफी कम प्रीमियम में अपने कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का अवसर मिल जाएगा। बहुत सारी कंपनियां सामूहिक स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने के लिए अपने कर्मचारियों से प्रीमियम की रकम वसूल करती है। ऐसे में कर्मचारियों को सीधे आयुष्मान भारत योजना से जुड़ने का विकल्प भी दिया जा सकता है।

ध्यान देने की बात है कि पिछले दिनों गृह मंत्रलय की पहल पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ दिया गया है और वहां काम करने वाले सभी जवानों को आयुष्मान कार्ड दिया जा रहा है। आयुष्मान भारत से मध्य वर्ग को जोड़ने की दिशा में इसे पहला कदम बताया जा रहा है।

’>>शुरू में निजी कंपनियों व संस्थाओं के कर्मचारियों के लिए खुल सकते हैं आयुष्मान भारत के दरवाजे

’>>योजना के तहत सालाना पांच लाख रुपये तक होता है मुफ्त और कैशलेस इलाज

’>>मध्य वर्ग को योजना के दायरे में लाने के लिए कई विकल्पों पर किया जा रहा विचार

शुरुआत में 10.74 करोड़ परिवारों को रखा गया था

2018 के बजट में जब तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आयुष्मान भारत योजना की घोषणा की थी, तब उसमें पहले से चिह्न्ति 10.74 करोड़ परिवारों को रखा गया था। इन परिवारों का चयन 2011 में हुई सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आधार पर किया गया था। यानी इसमें किसी को हटाने या जोड़ने की कोई गुंजाइश नहीं थी। इस योजना में अभी तक एक तिहाई से भी कम लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड बन पाया है। इसके तहत सभी 55 करोड़ गरीबों को आयुष्मान कार्ड दिया जाना था। लेकिन योजना लागू होने के साढ़े तीन साल बाद भी 17.35 करोड़ आयुष्मान कार्ड ही बनाए जा सके हैं। कोरोना के बाद सरकार अब बड़े पैमाने पर लाभार्थियों को ढूंढने और उन्हें कार्ड जारी करने में जुटी है।

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