पिछले दो वर्ष से कोरोना के नाम पर निजी स्कूलों के बंद होने से लाखों शिक्षक एवं कर्मचारी बेरोजगार

पिछले दो वर्ष से कोरोना के नाम पर निजी स्कूलों के बंद होने से लाखों शिक्षक एवं कर्मचारी बेरोजगार

सिकंदराराऊ वित्तविहीन प्रधानाचार्य महासभा के प्रांतीय संगठन मंत्री नरेश चतुर्वेदी ने सरकार से स्कूल खोलने की मांग करते हुए कहा है कि पिछले दो वर्ष से कोरोना के नाम पर निजी स्कूलों के बंद होने से लाखों शिक्षक एवं कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। वर्तमान में भी स्कूल बंद होने से उनमें आक्रोश व्याप्त है। गरीब एवं मध्यम वर्ग के छात्र ऑनलाइन शिक्षा से वंचित हैं, जिससे उनका शैक्षिक स्तर चौपट हो गया । अभिभावक भी आक्रोशित है।

शासन चार-चार छुट्टियां बढ़ाकर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर रहा है। यदि स्कूल न खोले गए तो वित्तविहीन शिक्षक आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। उपेक्षा पूर्ण रवैये

 


से शिक्षक समाज प्रताड़ित है और अब चुनाव बहिष्कार जैसी रणनीति पर विचार कर रहा है। वित्त विहीन शिक्षकों व कर्मचारियों की संख्या लाखों में हैं। शिक्षकों और छात्रों को वास्तविक स्थिति का संज्ञान लेकर शिक्षकों का रोजगार बचाने तथा छात्रों का शैक्षिक जीवन बचाने के लिए कोरोना गाइडलाइन के तहत स्कूल खोलने का आदेश जारी करने चाहिए। चतुर्वेदी ने कहा कि कोरोना काल वितविहीन शिक्षकों के जीवन

में अंधेरा कर गया है। वर्ष 2020 में कोरोना के कारण प्राइवेट स्कूल व शिक्षकों की स्थिति खराब थी। वर्ष 2021 में उन्हें उम्मीद थी कि सबकुछ पटरी पर लौट

आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब 2022 में भी हालात बदतर बने हुए हैं। एक माह से स्कूल बंद चल रहे हैं। इनमें पढ़ाने वाले शिक्षक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। इनके परिवार का खर्च नहीं चल पा रहा है। पहले शीतकालीन अवकाश के नाम पर स्कूलों को बंद कर दिया गया। अब कोरोना के नाम पर स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गई है, जबकि प्रदेश

में सबकुछ खुला हुआ है। स्कूलों के अलावा अन्य किसो जगह कोई पाबंदी नहीं है। सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने आज तक वित्तविहीन शिक्षकों को सुध नहीं ली है। दो साल से स्कूल खुले नहीं तो अधिकांश बच्चों की फीस भी नहीं आई। फीस नहीं आई तो स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों को दिए जाने वाले मानदेय पर भी असर पड़ा। बहुत से छोटे छोटे स्कूल तो बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं, जो दोबारा खुलने की स्थिति में नहीं हैं। शिक्षकों के समक्ष स्वयं के साथ परिवार के लोगों के भी जीविकोपार्जन का घोर संकट है। शिक्षकों के प्रति सरकार को भी संजीदा होना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। सरकार से निराशा ही मिल रही है। इस वर्ग को छोड़कर हर वर्ग के लिए सरकार ने कुछ न कुछ किया है। संगठन ने मांग की थी कि

ऐसे सभी शिक्षकों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय उनके खाते में भेजा जाए, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण हो सके, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस मौके पर आदित्य सिंह, आरपी सिंह जादौन, नीरज धनगर, संजीव गौतम, जसवंत सिंह, जितेंद्र कुमार सिंह, रूपेंद्र सिंह, केके दीक्षित, रवि शर्मा, आरके जादीन आदि मौजूद थे।

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