विधानसभा चुनाव और कोरोना वैक्सीनेशन में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से ऑनलाइन पढ़ाई भी महज खानापूर्ति बनकर रह गई, कैसे होगी बच्चों की पढ़ाई
विधानसभा चुनाव और कोरोना वैक्सीनेशन में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से ऑनलाइन पढ़ाई भी महज खानापूर्ति बनकर रह गई, कैसे होगी बच्चों की पढ़ाई
वाराणसी। कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर शिक्षण संस्थानों में 6 फरवरी तक छुट्टी हो गई है। विधानसभा चुनाव और कोरोना वैक्सीनेशन में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से ऑनलाइन पढ़ाई भी महज खानापूर्ति बनकर रह गई है। इससे जिले के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को कई तरह ही परेशानियों का सामना कर पड़ा रहा है।
जिले के 1144 परिषदीय विद्यालयों में करीब दो लाख छात्र- छात्राएं पंजीकृत हैं। कोरोना की दूसरी लहर में स्कूल बंद रहने पर ऑनलाइन शिक्षा छात्र-छात्राओं के लिए सहायक बना, लेकिन 2022 में
यह व्यवस्था धराशायी होने लगी है। ठंड और कोरोना के कारण इस साल अभी तक स्कूल बंद हैं। फिलहाल 6 फरवरी तक स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है।
ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर है, लेकिन टीकाकरण अभियान संग शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव व मतदाता जागरूकता अभियान में लगा दी गई है। इससे कुछ गिने-चुने परिषदीय स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा न के बराबर हो रही है। कोरोना के कारण पहले ही कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चे पढ़ाई में काफी पीछे हो गए हैं। ऐसे में नियमित कक्षाएं न चलने से वो कोर्स भी भूलने लगे है। वहीं अब तक कोर्स भी पूरा नहीं हो सका है।
मोहल्ला कक्षा व प्रेरणा सारथी नदारद
कोरोना की पहली लहर में जहां मोहल्ला क्लास ने सफलता हासिल की थी। वहीं दूसरी लहर में प्रेरणा सारथी ने अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन तीसरी लहर में शिक्षक संक्रमण के डर से मोहल्ला क्लास लेने से बच रहे है। बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि ऑनलाइन कक्षाओं व प्रेरणा साथी की मदद से बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। जिले के 6 हजार से अधिक शिक्षकों में से 1500 शिक्षकों की ड्यूटी वैक्सीनेशन व 500 से ज्यादा शिक्षकों की ड्यूटी कांटेक्ट ट्रेसिंग में लगाई है। कुछ शिक्षक संक्रमित भी हैं।
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