किसानों की खाते से 60 लाख रुपए गायब करने वाले कैश्सिर ,कलर्क निलंबित ।

             
       @ विनोद नेताम             
     बालोद : जिला के निपानी स्थिति जिला सहकारी बैंक जो विगत कई सालों से किसानों को बैंकिंग सेवा का लाभ  प्रदान करते हुए आ रही थी लेकिन आज इस बैंक के चलते निपानी सहित आसपास के कई गांव के किसानों की हालत दयनीय हो गई है , और होगी भी क्यूं ना आखिर किसानों की पैसों का गमन जिला सहकारी बैंक में पदस्थ दो क्लर्को ने किया है जिसमें अजय भेड़िया ,व राम ठाकुर शामिल है , जिन्हें निलंबित कर दिया गया है , मामले में जांच जारी है । जिला सहकारी बैंक निपानी में किसानों की खाते से 60 लाख रुपए गबन की खबर फैलते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया तत्काल जांच में जुटी प्रशासन जो काबिले तारीफ मानी जा सकती है , लेकिन डिजिटल भारत एवं बैंकिंग सेवा से जुड़े रहने संबंधित योजनाओं का यंहा पर खुलेआम बंटाधार हो गया है । ज्ञात हो , कि छत्तीसगढ़ सरकार एवं केन्द्र सरकार की किसानों से संबंधित योजनाओं के भी पैसे भी इसी बैंक के खातों में जमा थे जिसे किसानों ने काम आने पर निकालने के खातिर बैंक में ही जमा रखे हुए थे यानी कि जिला सहकारी बैंक के दो क्लर्को ने किसानों की 60 लाख रुपए गबन कर लेने से किसानों को सरकार की उन योजनाओं का समुचित लाभ तक नहीं मिला अब ऐसे में बैंक की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है क्योंकि इस खबर की बात आसपास में रहने वाले किसानों तक आग की तरह फ़ैल गई है और सभी किसान अपना पासबुक लेकर बैंक में जमा रकम की जांच करवा रहे है , तो वंही जांच अधिकारी टिम गठित कर बैंक में जांच प्रक्रिया पुरी करने में जुटी हुई है । बैंक में जमा रखी हुई पैसों का लाभ जमा करने वाले व्यक्ति को  ही नहीं मिले तो सोचिए ,दिन रात खून पसीना एक कर, एक एक पाई को जोड़कर जमा करने वाले किसानों की हालत क्या होगी , निश्चित तौर यह मंजर हदृय विदारक है साथ ही बैंकिंग व्यवस्था पर बड़ा सवालियां निशान भी उठाती है क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य अंतर्गत पहले ज्यादातर किसानो की घरों में कोठियां बनी हुई होती थी जिसमें किसान मेहनत से उगाई हुई फसल को स्टोर कर रखा करते थे । आधुनिकता की इस दौर में छत्तिसगढ़ के ज्यादातर किसानो के घरों से कोठियां गायब हो रही है , इसमें कोई संदेह नहीं है तो वंही गायब होती हुई कोठियों की जगह बैंक ने ले रखा है यह बात सौ टका सत्य है । किसानों की जमा पूंजी पर इस तरह की लूट निश्चित रूप से परेशान करने वाली खबर है जिस पर राजनीतिक नेताओं की भी नजर बनी हुई है ।                                             किसान हितैषी सरकार के राज में किसानों की कोठियों (जमा पूंजी) पर डाला गया डारेक्ट डांका है , इससे पहले भी जिला में लगातार किसानों के साथ लूट होने की खबरें आती रहती थी जिस पर कार्यवाही के नाम पर महज खानापूर्ति की गई है। परिणामस्वरूप किसानों की आर्थिक हालत दयनीय है ।अब देखने वाली बात यह है कि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक निपानी में किसानों की जमा रकम की सूद सहित हजम का किस्सा कंहा तक पहुंचता है ।

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