समीक्षा बैठक के दौरान सहायक आयुक्त ने अधीक्षको को अशिक्षा का जमकर पाठ पढ़ाया ।

     बीजापुर :  21शवी शदी के इस दौर में आज जंहा हमारे  देश के ऊर्जावान नवजवान युवा साथी  विदेशों रहकर  शिक्षा ग्रहण करने के बाद अपनी देश की सेवा में लगे हुए है , तो वंही  देश के भीतर  शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूल जरूरत जो आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों में शामिल है ,वह पहुंचने की बात तो दूर है अलबत्ता दूर तक सुनाई ही नहीं देती है । अच्छी शिक्षा और अच्छा स्वास्थ्य किसी भी राष्ट्र को विकास की दिशा में तेजी से आगे की ओर ले जाने में सहायक होती है , इसलिए नागरिकों को आगे बढ़ कर देश की तरक्की और उन्नति हेतू एवं सभ्य समाज की इस आधार भूत ढांचा को मजबूत करने हेतू बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए  । सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है कि नागरिकों से जुड़ी हुई मौलिक अधिकार देश के नागरिकों को सही व तय समय में मिल सके  । शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने हेतू प्रयास करना चाहिए ,हम सभी की जिम्मेदारी एक जैसी है । लेकिन हमारी जिम्मेदारी एवं सरकार की जवाबदेही में साफ तौर पर कुछ कमी है शायद जिसके चलते छत्तिसगढ़ राज्य के लाल धरा के रूप में मशहूर दक्षिण बस्तर में स्थित बीजापुर जिला जंहा समस्त अधीक्षक जिला बीजापुर ने हस्ताक्षर पूर्ण आवेदन अध्यक्ष सर्व आदीवासी समाज विकास खंड भैरमगढ़ जिला बीजापुर छत्तिसगढ़ शासन के नाम लिखित आवेदन प्रस्तुत किया है , जिसमें सहायक आयुक्त बीजापुर द्वारा समीक्षा बैठक में जातिगत गाली गलौज के संबंध में निम्न विषयों को शामिल किया गया है .........
1. तुम आदिवासी सूअर जैसा हो जिस प्रकार सूअर को गंगाजल से नहलाने पर भी टट्टी खाना नहीं छोड़ता उसी प्रकार तुम आदिवासी हो।                                                   2. तुम्हारी मां की गंदा खून से जन्म लिए हो तुम्हारा खून भी गंदा है।          3. तुम चोर हो।                                4. तुम्हें कीड़े पड़ेंगे।                           5. तुम्हारे बाल बच्चे मां बाप गंभीर कोड बीमारी से मरेंगे।                         6. तुम बस्तर के आदिवासी के पास दिमाग शुन्य है ।                                7. तुम्हें सुधारने के लिए 200 वर्ष लग जाएंगे।                                      8. कुछ शिक्षकों को चुटिया शब्द तथा  कुछ महिला शिक्षिकाओं को सर्वाधिक बनावट पर सरेआम जलील किया गया है। इस तरह से सभी अधीक्षकों को , अधीक्षिकाओं को जलिल किया गया है । जिससे हम सभी अपमानित है इस तरह गाली गलौज करने वाले अधिकारी के साथ हम सभी अधीक्षक कार्य नहीं कर सकते ऐसे में अधिकारी को तत्काल 5 दिवस के भीतर इस जिले से हटाने का अनुरोध करते हैं , अन्यथा छठवां दिवस सामूहिक रूप से अधीक्षक पद से त्यागपत्र देने के लिए बाध्य होना पड़ेगा आवेदक महोदय जी को उचित कार्यवाही करने हेतु सादर प्रस्तुत है। छत्तीसगढ़ राज्य अंतर्गत बस्तर वैसे तो पांच जिला मुख्यालयों का समुह है जिसकी दक्षिण दिशा पर स्थित है बीजापुर जो समस्त भारत के भुभाग में स्थित घोर नक्सलवाद के गढ़ के रूप में जाना व पहचाना जाता है । नक्सलवाद या अन्य कई कारणों के चलते विकास का सही मायने में एक ईंट तक नहीं गढ़ा है भला हो सरकार की जिन्होंने बीजापुर जिला वासियों को उनके मौलिक अधिकारों से रूबरू कराने हेतू शिक्षा का अलख नक्सलवाद के गढ़ में जगाने का प्रयास किया है , लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की इस मुहिम को शिक्षा विभाग के जिला सहायक आयुक्त पलिता लगाते हुए नजर आ रहे है जिसके चलते बीजापुर जिला में शिक्षा की उजियारा को घर घर पहुंचाने वाले शिक्षकों ने यह आवेदन सर्व आदीवासी समाज विकास खंड भैरमगढ़ जिला बीजापुर को दिया है ।अब देखना यह है कि , जिला के समस्त अधीक्षक एवं अधीक्षिकाओं के द्वारा दिए गए आवेदन पर क्या विचार करती है , वैसे भी बस्तर के बीजापुर जिला सिलेगर आंदोलन के चलते समस्त संसार में चर्चित है ,जिस पर प्रदेश के अंदर मौजूद सत्ता रूढ़ पार्टी कुछ भी बोलने व कहने से बच रही है ।

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