शिक्षण कार्य में रंग मंच विधा का प्रयोग अब बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में किए जाने पर जोर दिया जा रहा, दिया जाएगा प्रशिक्षण
शिक्षण कार्य में रंग मंच विधा का प्रयोग अब बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में किए जाने पर जोर दिया जा रहा, दिया जाएगा प्रशिक्षण
हाथरस: इसे लेकर 25 फरवरी को ऑनलाइन प्रशिक्षण यू-ट्यूब सेशन के माध्यम से दिया जाएगा।
रंगमंच लगभग सभी शैक्षिक अवधारणाओं की सहज समझ विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। इस कारण रंग मंच को वैश्विक स्तर पर शिक्षण प्रक्रिया का एक विशिष्ट माध्यम माना गया है। अध्यापन कौशल विकास में रंग मंच (थिएटर) की अहम भूमिका रहती है। जब तक अध्यापक अपनी भाषा, छाव-भाव, लहजे और वाणी के उतार-चढ़ाव के माध्यम से अपने छात्रों के मानस पटल में स्थान नहीं बना लेते, तब तक कोई भी पाठ या किसी भी विषय के प्रति बच्चों का स्वाभाविक जुड़ाव नहीं हो पाता हर विषय और हर पाठ को कहानी के रूप में प्रस्तुत करना अध्यापन कला का खास गुण है।
लोक कलाएं, कथावस्तु (कथानक) कथा-शैली एवं कथा- वाचन न सिर्फ जीवन मूल्यों से जुड़ी शिक्षा को प्रेषित करते हैं, बल्कि बच्चों में सीखने को ललक कौतूहल और उनकी विवेचन क्षमता को भी प्रखर करते हैं। पंचतंत्र की कथाए हितोपदेश को कहानियों आदि इसका प्रमाण है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में प्रत्येक विषय में कला एवं खेल आधारित शिक्षण शास्त्र का प्रयोग किए जाने पर बल दिया गया है। तभी तो रंगमंच विधा से अब बच्चों को पढ़ाने की पहल की जा रही है। इसे लेकर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद
(एसईआरटीसी) द्वारा शिक्षक, प्रशिक्षकों, शिक्षकों एवं डीएलएड प्रशिक्षुओं के लिए शिक्षण रंगमंच विधा का प्रयोग केंद्रित ऑनलाइन व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षक प्रशिक्षकों, शिक्षकों एवं बीएलएड प्रशिक्षुओं में रंगमंच विद्या की शिक्षण शास्त्रीय समझ एवं कौशल विकसित करना है, ताकि यह इसके माध्यम से बच्चों को पढ़ाई के साथ विषय को अच्छे से समझा सके। इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण 25 फरवरी की दोपहर को एक बजे से दो बजे तक एससीईआरटीसी के यू ट्यूब चैनल पर भी किया जाएगा।
Comments
Post a Comment
Ask me anything here...