मानव में लिंग निर्धारण से क्या तात्पर्य है ? इसकी क्रिया विधि का रेखा चित्र द्वारा वर्णन कीजिए
प्रश्न:- मानव में लिंग निर्धारण से क्या तात्पर्य है ? इसकी क्रिया विधि का रेखा चित्र द्वारा वर्णन कीजिए ।
उत्तर:- मानव में लिंग निर्धारण मानव में दो प्रकार के गुणसूत्र पाए जाते हैं
i) समजात गुणसूत्र (Autosomes) ये कायिक कोशिकाओं में पाए जाते हैं ।
¡¡) लैंगिक गुणसूत्र (Sex chromosome or Allosomes) ये युग्मकों या जनन कोशिकाओं में पाए जाते हैं इन पर लिंग निर्धारण करने वाले जीन पाए जाते हैं ।
लिंग निर्धारण की XY विधि :- स्त्री में दोनों लैंगिक गुणसूत्र XX होते हैं और पुरुष में एक लैंगिक और सूत्र X और दूसरा Y होता है स्त्री में अण्डजनन के फलस्वरुप बने सभी अंडाणुओं में एक अगुणित सेठ दैहिक गुणसूत्रों का और एक X लैंगिक गुणसूत्र का होता है (A+X) । अतः सारे अंडाणु एक समान होते हैं।
इसलिए स्त्री को समयुग्मकी लिंग (Homogametic Sex) कहते हैं ।
इसके विपरीत पुरुष में शुक्राणु जनन के फल स्वरुप बने कुछ शुक्राणुओं में एक अगुणित सेट दैहिक गुणसूत्रों का और X- गुणसूत्र एवं कुछ शुक्राणु में एक सेट दैहिक गुणसूत्रों का और Y - गुणसूत्र (A+X या A+Y) होते हैं । अतः दो प्रकार के शुक्राणुओं का निर्माण होता है लगभग 50 % शुक्राणु (A+X) और शेष 50% (A+Y) गुणसूत्रो वाले होते हैं इसलिए पुरुष को विषमयुग्मकी लिंग (Heterogametic Sex) कहते हैं ।
निषेचन के समय यदि (A+Y) शुक्राणु का समेकन अंडाणु के साथ होता है तब नर संतान (पुत्र) पैदा होता है जबकि यदि अंडाणु का समेकन (A+X) शुक्राणु के साथ होता है तब मादा संतान (पुत्री) पैदा होती है।
रेखाचित्र :-


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