सुप्रीम कोर्ट का बोर्ड परीक्षा पर बड़ा बयान
सुप्रीम कोर्ट का फैसला बोर्ड परीक्षा होगी या नहीं
12वीं कक्षा की परीक्षाओं को रद्द करने की याचिका पर आज फैसला लिया गया इस मुद्दे पर ए.एम खानविलकर जस्टिस और दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने सुनवाई की सुप्रीम कोर्ट में कोरोनावायरस के मामलों की वृद्धि पर नजर रखते हुए दसवीं की परीक्षा को रद्द करने तथा 12वीं की परीक्षा को स्थगित करने की घोषणा की थी।
शिक्षा मंत्रालय में हाल ही इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई CBSE ने12वीं बोर्ड की परीक्षा 15 जुलाई से 26 अगस्त के मध्य में परीक्षा आयोजित करने और सितंबर माह में परीक्षा परिणाम घोषित करने का प्रस्ताव रखा है।
याचिका में कहा गया है कि राज्यों का यह कर्तव्य होगा कि वह छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखें पिछले वर्ष की तुलना में कोविड-19 की स्थिति अधिक गंभीर है, शिक्षा मंत्रालय ने अभी तक कुछ भी तय नहीं किया है।
सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार ने 2 दिन का समय मांगा है, यदि 2 दिन में सरकार के द्वारा फैसला नहीं लिया जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट खुद फैसला करेगा।
याचिका में तर्क दिया गया है कि देश में स्वास्थ्य और कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के कारण परीक्षा आयोजित कराना संभव नहीं है परीक्षाओं को स्थगित करने से संबंधित पिछले महीने से मांग की जा रही है, अभी सूचनाओं को रद्द करने का अनुरोध भी किया गया है।
कक्षा बारहवीं के छात्रों के अंकों का आकलन करने के लिए पिछले वर्ष की तरह ही मानदंड अपनाना चाहिए।
CBSE और ICSE कई विकल्पों पर विचार कर रहा है-
इनमें से परीक्षाओं को रद्द करना और वैकल्पिक मूल्यांकन पद्धति को अपनाना यह सभी विकल्प परीक्षा में शामिल हो सकते हैं ज्यादातर राज्यों ने प्रमुख विषयों के लिए छोटी अवधि में परीक्षाओं का आयोजन कराने का समर्थन किया है।
परीक्षाओं को रद्द करने और पिछली परीक्षाओं के आधार पर छात्रों को अंक देने के विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा सीबीएसई बोर्ड ने कक्षा 11 में प्राप्त अंकों को जमा करने के लिए कहा है हालांकि बोर्ड की ओर से यह स्पष्ट अभी तक नहीं किया गया है कि परीक्षाओं को रद्द किया जाएगा।

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