कब और कैसे खत्‍म होगी रूस-यूक्रेन के बीच जंग, क्‍या हो सकता है भारत का रोल?

Russia-Ukraine Conflict: यूक्रेन पर रूस के हमले () का शनिवार को दसवां दिन था। अब तक सुलह (Russia-Ukraine Reconciliation) का रास्‍ता नहीं दिख रहा है। रूस को (Russia-Ukraine War) रोकने की कोशिशें जारी हैं। इसके लिए पश्चिमी देशों ने प्रतिबंधों (Sanctions on Russia) का भी सहारा लिया है। यह और बात है कि रूस अपने स्‍टैंड से टस से मस नहीं हुआ है। वहीं, यूक्रेन किसी भी कीमत पर हथियार रखने को तैयार नहीं है। वह आखिरी समय तक लड़ने का ऐलान कर चुका है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर यह जंग () खत्‍म कैसे होगी? क्‍या इसे खत्‍म करने में भारत की भी कोई भूमिका हो सकती है? आइए, यहां समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे इस युद्ध पर विराम लग सकता है। रूस को कर दिया जाए मजबूर रूस को पश्चिमी देशों ने अलग-थलग करने की कवायद शुरू कर दी है। उस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं। यूक्रेन पर हमले के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र के अलग-अलग निकायों में भी रूस के खिलाफ प्रस्‍ताव लाए गए हैं। इनका मकसद रूस को जंग रोकने के लिए मजबूर कर देना है। इस कड़ी में आगे और कदम उठाए जाने पर रूस पर लगातार दबाव बढ़ेगा। उसके लिए दुनिया से व्‍यापार करना मुश्किल होगा। रूस एक बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है। वह किसी भी हालत में सब कुछ दांव पर लगाकर अनिश्चितकाल तक युद्ध को जारी नहीं रख सकता है। यूक्रेन रूसी हमले के आगे टिका रहे हाल में हम देख चुके हैं कि किस तरह अफगानिस्‍तानी फौजों ने तालिबान के आगे कुछ ही दिनों में घुटने टेक दिए थे। इसने तालिबान को अफगान‍िस्‍तान पर कब्‍जा करने का मौका दिया। वह एक-एक कर तमाम इलाकों को अपने काबू में लेता चला गया। यूक्रेन के संबंध में भी यही बात लागू होगी। यहां उसके सैनिकों के धैर्य की अग्निपरीक्षा है। अब तक उसने रूसी हमले से लोहा लिया है। यूक्रेन ने राजधानी कीव पर कब्‍जा करने की रूसी सैनिकों की कोशिशों को नाकाम किया है। खारकीव और मारियुपोल जैसे प्रमुख शहरों पर भी उसका नियंत्रण बना हुआ है। युद्ध लंबे समय तक चलेगा तो इससे रूसी सेना का मनोबल टूटेगा। ऐसे में यूक्रेन के लिए रूसी सेना के सामने जमे रहना जरूरी है। देर सवेर यह युद्ध रुकने का कारण बन सकता है। धन-बल दोनों से कमजोर हो रूस प्रतिबंधों के रूप में पश्चिमी देशों का शिकंजा बढ़ने के साथ यूक्रेन का संयम रूस को धन-बल दोनों से कमजोर करेगा। दुनिया के ज्‍यादातर देशों को यूक्रेन का समर्थन प्राप्‍त है। यह भी उसे अपने से कई गुना ताकतवर रूस के सामने खड़े होने की ताकत देगा। अर्थव्‍यवस्‍था को डगमगाता देख व्‍लादिमीर पुतिन गुणा-गणित बदल सकते हैं। घरेलू स्‍तर पर रूस पर बढ़े दबाव पुतिन के सामने रूस के अंदर ही किसी तरह के विरोध को थामने की चुनौती होगी। छोटे-मोटे प्रदर्शनों की खबरें वहां से आई हैं। इनमें लोगों ने हमले का विरोध किया है। कई की गिरफ्तारी भी हुई है। अंदरूनी दबाव बढ़ा तो इसकी आंच सत्‍ता तक पहुंचेगी। रूस अपने मंसूबों में सफल हो रूस अगर अपनी सैन्‍य ताकत से यूक्रेन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दे तो भी युद्ध रुक जाएगा। हथियारों और सैन्‍य सजो-सामान से रूस यूक्रेन से कई गुना ज्‍यादा ताकतवर है। रूस की कीव पर कब्‍जा करने की कोशिशें जारी हैं। भारत की भूमिका भारत और चीन एशिया की दो प्रमुख महाशक्तियां हैं। यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर अब तक इनका रुख न्‍यूट्रल रहा है। भारत ने तो खासतौर से इस मामले में अपने सामने लक्ष्‍मण रेखा खींच रखी है। युद्ध की शुरुआत से ही वह यूक्रेन और रूस दोनों के संपर्क में रहा है। यहां तक उसने युद्ध को रोकने में अपनी ओर से किसी सार्थक भूमिका की पेशकश की है। भले भारत का यह रुख पश्चिमी देशों का अखरा है। लेकिन, भारत का यही रुख पुतिन के साथ किसी सार्थक बातचीत का पुल बन सकता है। भारत के साथ मिलकर चीन भी युद्ध को रोकने में बड़ा किरदार अदा कर सकता है।


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