आज है फाल्गुन मास की अमावस्या, इस शुभ योग में करें पूजा और पाए पितृदोष से मुक्ति


आज भगवान गणेश जी का वार है क्योंकि बुधवार सर्वप्रथम पूजनीय श्री गणेश को समर्पित होता है। इसी के साथ आज के दिन फाल्गुन मास की अमावस्या भी है। आज बुधवार का दिन पड़ने अमावस्या का और ज्यादा महत्व बढ़ गया है। जैसे कि हम जानते है कि Amavasya तिथि को पितरों के लिए समर्पित माना गया है। पितरों का आशीर्वाद उनके बच्चों के जीवन में तमाम संकटों को दूर करके उनके जीवन को खुशहाल बनाता है। आज के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना भी बेहद फलदायी माना गया है। Pitra Dosh Upay के लिए भी अमावस्या का दिन एकदम उपर्युक्त माना गया है। जानिए फाल्गुन अमावस्या तिथि से जुड़ी खास बातें-फाल्गुन मास की अमावस्या बन रहे हैं दो शुभ योगअमावस्या तिथि 1 मार्च, मंगलवार को देर रात 01:00 बजे से शुरू हो चुकी है, और 02 मार्च बुधवार को रात 11:04 बजे तक रहेगी। इस बार फाल्गुन अमावस्या पर दो शुभ योग बन रहे हैं, जिसके कारण अमावस्या तिथि का महत्व कहीं ज्यादा बढ़ गया है। आज सुबह 08:21 बजे तक शिव योग है और उसके बाद से सिद्ध योग प्रारंभ हो जाएगा। सिद्ध योग अगले दिन 03 मार्च को प्रात: 05:43 बजे तक रहेगा। दोनों ही योग में शुद्ध मन से किए गए किसी भी शुभ काम का फल कई गुना बढ़ जाता है। यह भी पढ़ें- Russia Ukraine War Updates: झमाझम बरसे रूसी रॉकेट और बम, खारकीव में लगे लाशों के ढेरफाल्गुन मास की अमावस्या क्या करें क्या नहीं-– किसी भी पवित्र नदी में स्नान करें या घर में ही जल में गंगाजल डालकर स्नान करें, इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें। पितरों का तर्पण करें।– पीपल के पेड़ की पूजा करें। पीपल को मीठा जल अर्पित करें औ सरसों के तेल का दीपक जलाएं। संभव हो तो इस दिन किसी स्थान पर पीपल का पौधा भी लगाएं और उसकी सेवा करें।– महादेव और नारायण का पूजन करें। दूध, दही, शहद, घी और बूरा से महादेव का अभिषेक करें।– शनिदेव का पूजन करें और उन्हें सरसों का तेल चढ़ाएं। उनके समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं और काली उड़द, काले तिल, लोहे की वस्तु, काली दाल, सरसों का तेल आदि किसी निर्धन को दान करें।– अमावस्या के दिन दोपहर का समय पितरों के लिए होता है, इसलिए दिन में सोना नहीं चाहिए।– इस दिन तमाम लोग व्रत भी रखते हैं। अगर आपने भी व्रत रखा है, तो व्रत में सेंधा नमक का इस्तेमाल न करें।– अगर दरवाजे पर कोई भिक्षुक आ जाए तो उसे खाली हाथ न लौटाएं। कुछ न कुछ अवश्य दें।– स्वच्छ वस्त्र पहनें, लेकिन काले रंग के वस्त्र न पहनें। क्रोध न करें, प्रेमपूर्वक आचरण करें।

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